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हिंदुस्तान, बनारस का एक और पत्रकार फंसा

वाराणसी। हिंदुस्तान के पत्रकार पवन सिंह का मामला ठंडा भी नहीं पड़ने पाया था कि इसी अखबार के मऊ के एक संवाददाता जमीन संबंधी विवाद में फंसते नजर आ रहे हैं। इस बाबत इस अखबार के दो कर्मचारियों संदीप त्रिपाठी और लोकनाथ ने विगत दिनों स्थानीय संपादकीय प्रभारी के निर्देश पर मऊ जाकर संवाददाता महोदय के बाबत आए कम्प्लेंट की जांच की। मामला धीरेंद्र सिंह से संबंधित है।

वाराणसी। हिंदुस्तान के पत्रकार पवन सिंह का मामला ठंडा भी नहीं पड़ने पाया था कि इसी अखबार के मऊ के एक संवाददाता जमीन संबंधी विवाद में फंसते नजर आ रहे हैं। इस बाबत इस अखबार के दो कर्मचारियों संदीप त्रिपाठी और लोकनाथ ने विगत दिनों स्थानीय संपादकीय प्रभारी के निर्देश पर मऊ जाकर संवाददाता महोदय के बाबत आए कम्प्लेंट की जांच की। मामला धीरेंद्र सिंह से संबंधित है।

धीरेंद्र मऊ में हिंदुस्तान अखबार के पदस्थ स्टाफर हैं। इस बाबत एक शिकायती पत्र शंभू सिंह की ओर से हिंदुस्तान के स्थानीय संपादकीय प्रभारी के अलावा लखनऊ और दिल्ली स्थित हिंदुस्तान के संपादकों को भी भेजा गया था। साथ ही यह पत्र राज्यपाल, मुख्यमंत्री, डीआईजी और जिलाधिकारी को भी दिनांक 5-10-2010 को भेजा गया है। यह शिकायती पत्र शंभू सिंह की ओर से सर्वत्र भेजा गया है जिसमें उन्होंने कहा है कि वे आराजी संख्या 363, 364, 365 और 366 जो मौजा शहादतपुरा में स्थित है, के स्वामी हैं। यह जमीन 275.73 वर्गमीटर में है और इंद्रदेव पुत्र राजपति ने फर्जी ढंग से 1,37,500 रुपये में अमिषा सिंह के नाम 26-8-2010 को रजिस्ट्री की है जो धीरेंद्र प्रताप सिंह की पत्नी हैं और धीरेंद्र प्रताप सिंह हिंदुस्तान अखबार के पत्रकार हैं। इस जमीन पर उनका (शंभू सिंह का) कब्जा है और उनकी नांद आदि भी है।

यही नहीं इस पर उन्होंने स्टे भी ले रखा है। धीरेंद्र प्रताप सिंह 28-8-2010 को इस जमीन पर असलहा धारी अनेक लोगों के साथ कब्जा करने आए थे। उन्हें बताया गया कि उनका इस जमीन पर स्टे आर्डर है फिर भी इस पर कब्जा लेने का उन्होंने प्रयास किया जिसे आसपास के लोगों ने विफल कर दिया। 15 दिन पहले वे फिर आए थे और यह पता होने के बाद भी कि स्टे है, इस पर कब्जा करने की कोशिश की पर इस बार भी वे इसमें असफल रहे। इसपर उन्होंने जान से मारने की उन्हें (शंभू सिंह को) धमकी भी दी और कहा कि पत्रकार होने के नाते वे इसपर कब्जा लेकर रहेंगे, पुलिस और प्रशासन उनके साथ है। शंभू सिंह ने अमिषा सिंह को रजिस्ट्रीकृत इस जमीन को मुक्त कराने के लिए तहसीलदार मऊ न्यायालय में वाद दाखिल करके आग्रह किया है इस जमीन का नामांतरण न किया जाए। इसके अलावा स्टांप चोरी के बाबत जिला महानिरीक्षक निबंधक को भी 2-11-2010 को शिकायती आवेदन पत्र दिया है। धीरेंद्र प्रताप सिंह काफी रसूख वाले पत्रकार माने जाते हैं। काफी सस्ते में ली गई जमीन की इस खबर की पूरे पूर्वांचल में जबर्दस्त चर्चा है।  (साभार : पूर्वांचलदीप डॉट कॉम)

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0 Comments

  1. madan kumar tiwary

    January 26, 2011 at 10:08 am

    सीना चौडा हो गया । अब पत्रकारों को मेहनत की जरुरत नही है । किसी तरह से जुगाड भिडा कर झंझट वाली कोई जमीन सस्ते में खरीद लो और जबरदस्ती कब्जा कर के बेच दो । आम जनता के लिये भी सहुलियत हो गई । जमीन के विवाद के लिये किसी गुंडे बदमाश के पास जाने की जरुरत नहीं , हम पत्रकार हैं न , माफ़िया से ज्यादा कारगर हैं।

  2. arvind

    January 26, 2011 at 4:22 pm

    दरअसल हिंदुस्‍तान में संपादक पवन सिंह के आभामंडल से कुछ इस तरह प्रभावित रहे कि उसकी दलाली को अनदेखा करते रहे। नतीजा सामने है हिंदुस्‍तान वाराणसी की कार्यसंस्‍कृति ही घिना चुकी है। पवन सिंह ने राकेश न्‍यायिक के माध्‍यम से अपने अखबार को नोटिस दिलवायी थी। इस मामले में स्‍ांपादकीय प्रभारी पर्दा डालने में कामयाब रहे। लेकिन आखिर बकरे की मां कब तक खैर मनायेगी। सोयेपुर जहरीली शराब कांड में मुकदमा हो गया। अब संपादकीय प्रभारी अखबार के है पुलिस और अदालत के तो हैं नहीं। बचा नहीं पाये। लिहाजा आजकल पवन सिंह बजाय दफतर आने के आई डीआइजी और प्रमुख सचिव गृह से टांका जोड़ रहे हैं। कोशिशि हो रही है कि सोयेपुर मुकदमा स्‍पंज हो जाए। करवा भी सकते हें। लेकिन उनके मुकदमें ने हिंदुस्‍तान की आंखे खोल दी है। अब वो शिकायतों पर गंभीर हो गया है।

  3. sunil

    January 29, 2011 at 2:51 am

    ek kovva kan le gaya to aap kovve ke pichhe daurne lage.Aur patrkar itna neereh bhi hota hai’ye bhi aap logo ne sarvjnic kar diya.jawahar ne jameen bechi to us samay adhikari aankh band kar registri sign kiya tha kya.are mahodya aap ye kyon nahi sochte ki koi bhi apni hi jameen ka pahle se stay kyon lega.Kyon mukdma ladega.Akhir aap log bhi to jameen wale honge.Ek police per attack,ek adhikari per janch hoti hai,ek ias per kanoon ka danda chalta hai to sab ek ho jate hain lekin patrakar samajik aur parivarik jeevan me itna akela hai.ye bat to mauke per kabja karne ke din hi dekh liya. Mai shambhu ka padosi hoon aur majdoor mistri fawda lekar khoodai kar rahe the hathiyaar ke dam per to un logon ne kaam rookya tha. mauke par police bhi pahunchi thi to kya unki aankhe band rahi.Patrakar apni garima ko dekhte huye mauke per unse apna kaggej dikhane ko kah rahe the lakin jab unke paas hota tab na dikhate.sirf muh se bol dena ki ye jameen meri hai to kya unki ho jayegi aur aap log bhi unite hoiye ek dusre ki taang mat khinchiye’ parasper sahyog ke saath dono paksh dekhiye.verna vah din door nahi ki choutha stabh kshe jaane walon me arajakta shamil ho jaye.

  4. dps vishwash

    January 29, 2011 at 5:55 am

    aap ke likh dene se madan jee is samsya ka koi hal to nahi nikal sakta patrakar agar ek mafia ho jayee to mujhe bhi kahin ka patrakar bana do automatic sabhi patrakar paise bina diye karoeo ke malik ho jayenge. janaab ye sochiye ki koi apni hi jameen ke liye stay kyon lega jaroor vah bhi kahin se galat hai .Aur ek patrakar vaise bhi bahut dookhi hoga Kyon ki uski to pasine ki kamaai doobti najar aa rahi hai.aur office ke log patrakar ke bhoomika ki jaanch kar rahe hain. thoda doosre party ka bhi khoj khaber lein tab aap likhe aap ke likhne ka swagat hoga. inf

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