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दुख-दर्द

ये मीडियावाले हैं, खूब पीट लो इन्हें!

: अमर उजाला और हिंदुस्तान के फोटोग्राफर की हालत गंभीर : जिसे देखो वो मीडिया वालों को पीट रहा है. उनको नहीं, जो शीशे के घरों में बैठे हैं. उनको जो फील्ड में हैं. या जो वो लिख-पढ़ रहे हैं जिससे सीधे सीधे सत्ता और उनके दलालों के उपर अटैक हो रहा है और उनके पर्दाफाश की स्थिति आ रही है. ताजी सूचना वेस्ट यूपी के मुज़फ्फरनगर जिले से है.

: अमर उजाला और हिंदुस्तान के फोटोग्राफर की हालत गंभीर : जिसे देखो वो मीडिया वालों को पीट रहा है. उनको नहीं, जो शीशे के घरों में बैठे हैं. उनको जो फील्ड में हैं. या जो वो लिख-पढ़ रहे हैं जिससे सीधे सीधे सत्ता और उनके दलालों के उपर अटैक हो रहा है और उनके पर्दाफाश की स्थिति आ रही है. ताजी सूचना वेस्ट यूपी के मुज़फ्फरनगर जिले से है.

समाज के चौथे स्तंभ माने जाने वाले पत्रकार बंधुओ पर गुंडई पर उतरे वकीलों ने हमला किया. इसमें वकीलों ने दो प्रमुख हिंदी दैनिक अख़बार के दो फोटोग्राफरों को बंधक बनाकर कई घंटों तक पीटा. इनको कई घंटों बाद मुक्त किया गया, फोटोग्राफरों की हालत गंभीर बनी हुई है. बताया जा रहा है कि दोनों लोग इस समय जिंदगी और मौत के बीच जिला हॉस्पिटल में लड़ रहे हैं. सूचना के अनुसार शनिवार को वेस्ट यूपी के मुजफ्फरनगर के परकाश चौक के पास पुलिस और जिला प्रशासन अतिक्रमण हटा रहा था. वहां पर सारी मीडिया न्यूज़ कवरेज कर रही थी. उसी दौरान एक वकील भी वहां जा पहुंचा, जो कि वहां पर अनाप-शनाप कमेन्ट करने लगा. जिस पर गुस्साई भीड़ ने वकील की अच्छी तरह से पिटाई कर दी. पिटाई के इस दृश्य को अमर उजाला के कैमरामेन रमेश चौहान और हिंदुस्तान के कैमरामैन मनीष चौहान ने कैद कर लिया. इस फोटोग्राफी के विरोध में वकील और उनके साथ के लोगों ने फोटोग्राफरों से गाली-गलौच करना शुरू कर दिया.

इस घटनाक्रम के बाद वकील ने कचहरी का रास्ता नापा तो दोनों कैमरामेनों और अन्य रिपोर्टरों-कैमरामैनों ने खबरों के प्रधान स्थल कचहरी की ओर रुख किया. उधर, कचहरी पहुंच कर वकील ने अपने अन्य साथी वकीलों को बुला लिया. सभी ने मीडिया वालों, खासकर उन दो कैमरामैनों को पीटने की साजिश कर डाली जिन्होंने वकील की पिटते हुए तस्वीर ली थी.  दोनों कैमरामैनों के कचहरी पहुंचते ही कई वकीलों ने इन्हें दबोच लिया. करीब 200 से 250 वकीलों ने दोनों को जमीन पर डालकर बुरी तरह लात-घूंसों से पीटा, ये क्रम तक़रीबन डेढ़ घंटे तक चला, इतना ही नहीं, वकीलों ने कचहरी परिसर में घुसने वाले हर रिपोर्टर को इसी तरह से पीटने की घोषणा कर दी. वकीलों ने मार-पीट कर दोनों फोटोग्राफरों को एक कमरे में बन्द कर दिया. इन दोनों को तीन घंटे बाद पुलिस बंधन मुक्त करा सकी. पुलिस इन्हें लेकर तुरंत हॉस्पिटल गयी, जहां पर दोनों की गंभीर अवस्था के चलते उपचार हेतु भर्ती कर लिया गया है. इस घटना से पत्रकार जगत में रोष व्याप्त है. इतना ही नहीं,  लोग पुलिस और जिला प्रशासन की निरंकुशता पर भी चिंतित हैं.

मुज़फ्फरनगर से अमित सैनी की रिपोर्ट.

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0 Comments

  1. धीरज कुमार साहू

    January 29, 2011 at 4:33 pm

    वकीलों पर केस कर दो और उन्हे सबक सिखाओ। और पुलिस तो आजकल सिर्फ झक मारने के लिए रह गयी है, उनसे तो उम्मीद करना ही बेकार है।

  2. madan kumar tiwary

    January 29, 2011 at 4:43 pm

    देश के ७० प्रतिशत वकील वैसे हैं जिनको एक आवेदन भी अच्छी तरह से लिखना नही आता । सभी बार एसोशियेशन जातिवाद से ग्रसित हैं। दलाली में लिप्त रहना इंन्हे ज्यादा पसंद है । मैं भी एक वकील हूं , अब बात निकल गई है तो १-२ दिन में वकालत और वकिलों के कारनामे लेकर आउंगा ।

  3. jabalpur jjournalist

    January 29, 2011 at 5:52 pm

    kuch karo kalamkaro nahi to kal hamari baari hi

  4. vivek.chauhan

    January 30, 2011 at 12:49 am

    muzaffarnagar me andher nagri chopat raja wali kahawt lagu ho rahi hai 18 ghante bitne ke baad bhi police fir darj karne aur mediakarmio ke camera baramad karne me naakam hai udhar wakilo ka talibani farman hai jo media karmi kacheri me ghuse use maro ye jangal raj nahi to aur kya hai

  5. sageer khaksar

    January 30, 2011 at 3:55 am

    patrakaron par yah hamla sharmnank hai. doshiyon ke khilaf karywahi ki jaani chahiye,

  6. gulshan saifi

    January 30, 2011 at 4:30 am

    meadia shuru se hi nishane par h vakilo ko paiso do or khul kar zurm karo……….vakilo ki vajah se bhi stithi kharab h vakilo ko apne kartavay yaad karane ki aawashyakta hai,,

  7. rishiraj rahi

    January 30, 2011 at 5:03 am

    des ka budhijivi khlane wala varg talibani kam karega to kis par bharosa karenge.

  8. rishiraj rahi

    January 30, 2011 at 5:05 am

    desh ka chautha khambha kyon mon hai

  9. santosh jain.raipur

    January 30, 2011 at 5:06 am

    patrakaro me soutia dah khatam karna jaruri hai/yaha chhattishgarh me bhi do patrakar mare gaye 2mah me,pulish kewal pichwada khujane ke liye hai,neta kewal mundi khujane ke liye,janta kewal tamasha dekhne ke liye jinda hai

  10. anuj mudgal muzaffarnagar

    January 30, 2011 at 5:57 am

    kuch to karna padega kal hamari bhi bari aa sakti hai jago kalam ke sipahiyo aab jaag jao naukri bhachane ke chakkar main farz ko daga mat do likho is jurm ke virudh.

  11. anil mittal

    January 30, 2011 at 6:26 am

    कितने दुर्भाग्य की बात है जी वकीलों को कानून की जानकारी है वही कानून अपने हाथो में लेकर मरते भी है तो उस निरीह पत्रकार को जिसके पास कलम के अलावा कुछ होता ही नहीं है ,,वेसे भी मुज़फ्फर नगर के आधे से जयादा वकील तो दलाली करते है वकालत तो उनके बीएस की बात है ही नहीं बाकी २५% हफ्ता वसूली ,,प्रोपर्टी पर कब्ज़ा ,और गुंडा गर्दी करते है ,पुलिस तो वह हाथ हाथ धरे बैठे रहती है उसके सामने कोई मरे या पिटे उसे कोई मतलब नहीं है ,,मेरी शुभकामना उस पत्रकार के साथ है जो बेचारा खामखा पिता है अनिल मित्तल रिपोर्टर देहरादून

  12. Ghanshyam saini Hardwar

    January 30, 2011 at 7:42 am

    agar ab bhi kaale kot wale gundo ka ilaaj nahi kar sake to MEDIA CENTER aur PRESS CLUB par tala laga dena.

  13. ankit chauhan

    January 30, 2011 at 7:59 am

    itna kuch ho gaya aur abhi tak police ne vakilo ke khilaf kuch nahi kiya. police ke karya parnali ise se pata chalti hai. marpeet karne vale vakilo ko sabak sikhana hi hoga aur iske liye sabhi patrakaro ko ek hona padega

  14. narender

    January 30, 2011 at 8:19 am

    देश में दो तरह के सरकारी गुन्डे है पहली पुलिस और दूसरे वकील। कानून की किताब हाथ में पकड़ने के बाद इनकी ताकत के सामने कोई नही आता। मैं ये बात सारी वकील बिरादरी के लिए नही कहता, लेकिन काला कोट पहनकर खुलेआम गुंडई करने वाले इन चंद लोगो ने वकालत के पेशे को बदनाम कर रखा है। हैरत की बात ये है कि इस तरह के वकील प्रैक्टिस नही करते, केवल दलाली करते है और नेतागीरी करते है। सरकार ने इन पर नकेल कसने के लिए थोड़े दिन पहले कमर कसी थी, लेकिन वकीलों के दबाब के सामने उसकी पेटी खुल गई। पत्रकारों ने निर्भीकता से अपने काम को अंजाम दिया, वे बधाई के पात्र है। रही बात वकीलों की गुन्डई की सो ये अपने पेशे का एक पहलू है। आप कानूनी लड़ाई लड़िये। इन वकीलों की जमात में ऐसे लोगो की कमी नही जो इन अदालत में इन गुन्डो के खिलाफ खड़े दिखाई दें। कचहरी पर तैनात रहने वाली पुलिस और जिले के एसएसपी की भूमिका निन्दनीय है।

  15. vikas verma

    January 30, 2011 at 10:11 am

    vakeelo savdhan kabhi haathe chad gaye na………… phir dekhna……

  16. sanjeevmalik

    January 30, 2011 at 12:04 pm

    ye sab aapsi fhut ka natija hai

  17. sanjeevmalik

    January 30, 2011 at 12:16 pm

    ye sab aapsi fhut ka natija hai

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