मुज़फ्फरनगर में पत्रकारों और वकीलों के बीच चल रहा घमासान मंगलवार की रात उस समय समाप्त हो गया, जब बार संघ अध्यक्ष ने अन्य सदस्यों के साथ अस्पताल में उपचाराधीन छायाकारों से सामूहिक रूप से खेद व्यक्त करते हुए माफ़ी मांगी. इस मौके पर सैकड़ों रिपोर्टर सहित जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मौजूद रहे. जिसके चलते आज होने वाले आन्दोलन स्थगित कर दिया गया है.
गत दिनों गुंडई पर उतरे वकीलों ने अमर उजाला के रमेश चौहान और हिंदुस्तान के कैमरामैन मनीष चौहान की बड़ी बर्बरता से पिटाई की थी और उनके कैमरे व मोबाइल आदि भी लुट लिए गये थे, जबकि दोनों को कई घंटो तक बंधक भी बनाय रखा गया था. इस शर्मनाक मामले को लेकर जनपद ही नहीं पड़ोसी जनपदों के पत्रकार और अन्य सामाजिक, राजनीतिक, शिक्षक संघटन, छात्र संघटन, व्यापारी संघटन एकजुट होकर एक मंच पर आ गये थे. सभी ने रोष प्रकट करने हेतु दो फरवरी को मौन जुलूस निकालने तथा ज़िलाधाकारी कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन कर वकीलों को ललकारने की चेतावनी दी थी.
इतना ही नहीं हर संघटन और दल के तेवर इस मामले को लेकर उग्र थे, लेकिन मंगलवार को जिलाधिकारी आवास पर सुबह कुछ वरिष्ठ पत्रकारों और बार संघ अध्यक्ष के बीच समझौता वार्ता हुई, जिसमें वकीलों की ओर से छायाकारों से लिखित में माफ़ी मांगने, लूटा गया कैमरा वापिस करने और भविष्य में पत्रकारों के साथ वकीलों की ओर से इस तरह की गलती न दोहराए जाने का प्रस्ताव आया. जिस पर महावीर चौक पर नगर के पत्रकारों की बैठक हुई, जिसमें सबने सहमति प्रकट की.
रात्रि करीब नौ बजे के लगभग डीएम संतोष कुमार यादव और एसएसपी प्रवीण कुमार के साथ जिला बार संघ अध्यक्ष प्रमोद त्यागी सहित दर्ज़नों वकील जिला अस्पताल पहुंचे, जहां पर उन्होंने सामूहिक रूप से लिखित में माफ़ी मांगी. इतना ही नहीं एक तथाकथित आरोपी वकील की बार संघ से सदस्यता भी भंग कर दी गयी है, जबकि कचहरी परिसर में आवंटित होने वाले चेम्बर पर भी रोक लगा दी गयी है. बार संघ अध्यक्ष ने आश्वासन दिया है कि आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
अंदर की बात ये है कि जो कैमरा वकीलों द्वारा वापिस किया गया है, उस कैमरे को तथाकथित आरोपी वकील का बेटा चरथावल में एक फोटोग्राफ़र की दुकान पर बेचने गया था, जहां पर वह पकड़ा गया. जिसके चलते वकील अपनी नाक बचने के लिए इस मामले के पटाक्षेप में लग गये, जिसमें पुलिस प्रशासन में भी उनका साथ दिया.
फ़िलहाल दोनों छायाकार अस्पताल में उपचाराधीन है, जिनके खर्चे के वहन करने के वकीलों के प्रस्ताव को पत्रकारों द्वारा ठुकरा दिया गया है. वकीलों की मंशा थी कि छायाकारों के उपचार का सारा खर्च वे खुद करेंगे, मगर इस बात पर किसी ने भी सहमति नही दी, जिसके चलते उनका प्रस्ताव ख़ारिज कर दिया गया.
मुजफ्फरनगर से अमित सैनी की रिपोर्ट.












arshid
February 2, 2011 at 8:18 am
yeh hue na baat
shubham-raghav
February 2, 2011 at 8:54 am
shem for advocates !!!!
kam se kam tuchi harket karney sey pehley kuch to socha hota kher bar ney doshi wakil ki sadsyata rahd kar bata diya hai ki sabi ek jaisey nahi hotey..patrkarno ko ghabrana nahi chayiey
union is strength….keep its….
santosh jain.raipur
February 2, 2011 at 9:08 am
patrakaro ki ekjut ta ke li ye badhai /vakilo ki jamat nebhi der ayad durust ayad ko charitarth kiya/ kul milakar ant bhala to sab bhala /ab bhagwan aour doctor hamare dono mediakarmiyo ko sighra swasth kare yahi kamna/prarthna hain,
amit mishra
February 2, 2011 at 8:11 am
पत्रकारो और अन्य सामाजिक, राजनीतिक, शिक्षक संघटन, छात्र संघटन, व्यापारी संघटनो के प्रयास से इस मामले का अंत हुआ सबके एक जुट हो जाने से कलम के सिपाहिओ का मान सम्मान बना रहा प्लीज इसे बनाये रखे – अमित मिश्रा GEN.secretary अखिल भारतीय पत्रकार मोर्चा -(9810755653 )
gagan
February 2, 2011 at 4:36 pm
vakeloo kay gutnay taknay kay baad ab vo jaichand rupi tuchay paterkar dub marey jenohnay aandolen kay doran phout dalnay hatu manish ramesh ke ghangah hum hotay ghutha smachar lekha tha . satya ke geet hui our dallay bankab hu