राष्ट्रीय दैनिक ‘विराट वैभव’ ने पत्रकारिता के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करते हुए पांच साल पूरे कर लिए हैं। पांच साल के अल्प काल में इस समाचार पत्र ने पाठकों के बीच गहरी पैठ बनाई है, इसलिए इसकी प्रसार संख्या में उल्लेखनीय वृद्घि हुई है। दिल्ली और एनसीआर के साथ-साथ पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के दूर-दराज के क्षेत्रों में भी विराट वैभव अपना नया पाठक परिवार बनाता जा रहा है।
राष्ट्रवादी और सांस्कृतिक विचारधारा के इस समाचार पत्र ने हर वर्ग के पाठकों में अपनी गहरी पैठ बनाकर पत्रकारिता में एक नया मुकाम हासिल किया है। इन पांच सालों में हर किसी के लिए रोचक, उपयोगी एवं मनोरंजनपूर्ण खबरें एक मर्यादा में रहकर पाठकों को परोसने की कोशिश की गई। विराट वैभव को लोकप्रियता के शिखर पर पहुंचाने का श्रेय इसके पाठकों, हॉकरों, पत्रकारों एवं संपादन मंडल को संयुक्त रूप से जाता है।
आज से पांच साल पहले जब राजधानी दिल्ली से इस लोकप्रिय समाचार पत्र का शुभारम्भ किया तो समाचार पत्रों की इस नगरी में लगा था कि शायद हम अकेले ऐसे हैं, जिन्होंने पत्रकारिता के साथ निष्ठापूर्ण न्याय की शुरुआत की है, लेकिन आज पांच साल बाद हम गर्व के साथ कह सकते हैं कि चले थे अकेले, मगर लोग आते गए और कारवां बनता गया। यह कारवां पत्रकारिता में नित नए आयाम स्थापित करता हुआ कई राज्यों की सीमाओं में प्रवेश कर चुका और आगे ही बढ़ता जा रहा है और हमेशा आगे बढ़ता ही रहेगा।
संपादन मंडल से लेकर पाठकों तक आज ‘विराट वैभव’ का एक विशाल परिवार बन चुका है। दूसरी तरफ दिल्ली से अखबार का प्रकाशन शुरू करने की ठानकर उसे पूरा करने वाले प्रधान संपादक विश्व विभूति विदेह का हाल ही में निधन हो जाने से आज उनकी कमी खल रही है, लेकिन उनके आदर्शों और परम्पराओं को जिंदा रखकर समाचार पत्र की गरिमा को कोई ठेस नहीं पहुंचने दिया जाएगा। प्रेस विज्ञप्ति












dipak
February 4, 2011 at 6:49 am
Viraat Vaibhav aur chale aage bade. Iske liye bahut Jaruri hai ki wo apne editorial ki team ka v khyal rakhe.
Salary behtar kare taki ye aur unchi bulandi ko chuye.
panch saal pure hone ki badhai