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जेपीसी लिए बगैर संसद नहीं चलने देंगे : अरुण जेटली

: सिब्बल के अलावा पूरे देश को 2जी घोटाले की जानकारी : संसद न चलने दी होती तो राजा बने रहते : भाजपा नेता अरुण जेटली ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी तब तक संसद को चलने नहीं देगी जब तक सरकार 2जी घोटाले की जांच के लिए जेपीसी का गठन नहीं करती। अनुराधा प्रसाद के साथ न्यूज24 के लिए साप्ताहिक कार्यक्रम आमने-सामने में साक्षात्कार के दौरान उन्होंने कहा कि हम जेपीसी की मांग सिर्फ 2 जी घोटाले की जांच के लिए ही नहीं कर रहे हैं। हम इसकी मांग कर रहे हैं ताकि देश को मालूम चल सके कि आखिर ए.राजा को टेलीकॉम मंत्रालय क्यों दिया गया और यह मंत्रालय डीएमके लिए क्यों रखा गया?

: सिब्बल के अलावा पूरे देश को 2जी घोटाले की जानकारी : संसद न चलने दी होती तो राजा बने रहते : भाजपा नेता अरुण जेटली ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी तब तक संसद को चलने नहीं देगी जब तक सरकार 2जी घोटाले की जांच के लिए जेपीसी का गठन नहीं करती। अनुराधा प्रसाद के साथ न्यूज24 के लिए साप्ताहिक कार्यक्रम आमने-सामने में साक्षात्कार के दौरान उन्होंने कहा कि हम जेपीसी की मांग सिर्फ 2 जी घोटाले की जांच के लिए ही नहीं कर रहे हैं। हम इसकी मांग कर रहे हैं ताकि देश को मालूम चल सके कि आखिर ए.राजा को टेलीकॉम मंत्रालय क्यों दिया गया और यह मंत्रालय डीएमके लिए क्यों रखा गया?

आमने-सामने का प्रसारण शनिवार को रात 8 बजे और रविवार को रात दस बजे होगा। ‘क्या राजा के केन्द्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफे के बाद भी संसद को चलने नहीं देने का कोई औचित्य है?’ पर जेटली ने सरकार पर 2जी घोटाले की लीपापोती करने का आरोप लगाते हुए कहा, “प्रधानमंत्री कह रहे थे कि राजा वही कर रहे हैं जो उनके पूर्ववर्ती करते रहे हैं। कपिल सिब्बल 15 दिन पहले तक कह रहे थे कि 2जी स्पेक्ट्रम के आवंटन में एक भी पैसे का नुकसान नहीं हुआ है।” अपने उत्तर को आगे बढ़ाते हुए उनका कहना था कि लगता तो यह है कि 2जी घोटाले के बारे में सिब्बल के अलावा पूरे देश को मालूम है। एक अन्य सवाल के उत्तर में अरुण जेटली ने कहा कि अगर विपक्ष ने संसद को चलने नहीं दिया होता तो राजा अभी यहां पर ही होते और उनके खिलाफ सीबीआई ने भी कोई कार्रवाई नहीं की होती।

‘तो क्या अब आप संसद को चलने देंगे?’ जेटली ने स्पष्ट किया किया कि विपक्ष से ज्यादा सरकार का यह दायित्व है कि वो संसद की कार्यवाही को बिना किसी अवरोध के चलने देने का माहौल बनाए। हमें मालूम है कि बजट सत्र महत्वपूर्ण है पर जेपीसी की मांग से पीछे हटने का सवाल ही नहीं पैदा होता। इसके साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि जेपीसी जांच के दौरान अगर एनडीए के किसी नेता के ऊपर छींटे पड़ते हैं तो उन्हें कोई दिक्कत नहीं होगी। क्या एनडीए में जेपीसी जांच के सवाल पर विरोध के स्वर उभर रहे हैं? “बिल्कुल नहीं । यह कांग्रेस की उम्मीद हो सकती है”, जेटली ने व्यंग्य भरे लहजे में जवाब दिया।

‘आप कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदुरप्पा के भ्रष्टाचार को लेकर शांत क्यों हैं?’ इस सीधे आरोप पर बिना विचलित हुए जेटली का कहना था कि ‘कांग्रेस-जनता दल (एस) जो कहती है वह सत्य वचन नहीं होता। वैसे भी हम यहां पर कांग्रेस को अनुग्रहित करने के लिए तैयार नहीं हैं।’ ‘क्या आपको लगता है कि येदुरप्पा दूध के धुले हैं?’ अपने मुख्यमंत्री का बचाव करते हुए जेटली ने तर्क दिया कि उनके (येदुरप्पा) के खिलाफ यदि कोई प्रथम दृष्टया मामला आता है तो वे जरूर कार्रवाई करेंगे। भाजपा में नेतृत्व से जुड़े एक सवाल के जवाब में जेटली ने कहा कि लालकृष्ण आडवाणी पार्टी के शिखर नेता और मार्ग दर्शक हैं। जब वक्त आएगा तब पार्टी अपने नेता की भी घोषणा कर देगी। और अंत में भाजपा नेता ने माना कि वे अपनी वकालत को मिस करते हैं। पर वकालत से दूर होने के बाद उनके पास अब इतना वक्त रहता है कि वे लिख -पढ़ सकें। दरअसल जब संसद नहीं चल रही होती तब उनका पास लिखने-पढ़ने का बहुत वक्त रहता है। प्रेस विज्ञप्ति

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0 Comments

  1. madan kumar tiwary

    February 6, 2011 at 9:23 am

    मुख्यमंत्री अपने पद का इस्तेमाल अपने बेटे को फ़ायदा पहुंचाने के लिये करे तो उसे क्या कहेंगे । जेटली जी । आप तो वरिष्ठ अधिवक्ता हैं , आपके अध्यक्ष महोदय गडकारी तो स्विकार कर चुके हैं, येदुरपा ने कानूनन नही लेकिन नैतिक रुप से गलत काम किया है । अब आप बतायें , क्या जनता यह मान ले की अनैतिक कार्य की मान्यता आपकी पार्टी ने दे दी है । फ़िर आप क्यों नैतिक रुप से मनमोहन सिंह का स्तीफ़ा मांग रहे हैं ? वैसे २ जी या अन्य घोटालें की तरह येदुरप्पा का काम भी गलत है और कानूनन भी गलत है , यह पद के दुरुपयोग का मामला है ।

  2. s.p.singh

    February 7, 2011 at 10:03 am

    वास्तव में भाजपा ने इस समय यह समझ लिया है की श्री मनमोहन सिंह तो राजनितिक व्यक्ति हैं नहीं और जो पार्टी अध्यक्ष है उनकी भी पृष्ठभूमि राजनितिक नहीं है इस लिए अगर कांग्रेस को विभिन्न मोर्चों पर भटका दिया जाय तो शायद उनकी भी काठ की हांड़ी एक बार फिर से चढ़ जाय और बासी कढी में भी कुछ उबाल आ जाय अन्यथा श्री अडवानी यह नहीं कहते की मैंने भी चार वर्ष पहले उन लोगों के विषय में सरकार को बता दिया था जिनके खाते स्विस बैंक हैं — पर श्री अडवानी जी को वही नाम मीडिया को देने में क्यों परहेज या शर्म महशूस होती है ? दूसरी बात यह हैं की राज्य सभा में विपक्ष के नेता श्री जेटली यह कहते है की हम संसद को चलने नहीं देंगे तो क्या यह उनकी बपौती है — अच्छा तो यह हो या तो संसद में बहस करके सरकार को गिरा दें अगर ऐसा नहीं कर सकते तो जो कार्य बस का नहीं है उसे क्यों करते है भारत में सरकारों को बदलने का कार्य जनता करती है यह काम जनता के लिए ही छोड़ दो तो आपकी कृपा होगी.

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