: किशोर उम्र बच्ची की पहचान जाहिर कर उसके बाकी जीवन को संकट में डाला : मेरठ के एक प्रतिष्ठित पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाली एक लड़की बीते दिनों अपने घर से अचानक लापता हो गई. बताया जा रहा है कि वो अपने प्रेमी के साथ कहीं चली गई. इस घटनाक्रम को आज मेरठ के सभी अखबारों ने प्रकाशित किया है. दैनिक जागरण ने जिम्मेदारी का परिचय देते हुए खबर में न सिर्फ लड़की का नाम बदल डाला बल्कि स्कूल का नाम भी प्रकाशित नहीं किया.
अमर उजाला ने भी लड़की व स्कूल का नाम प्रकाशित नहीं किया, सिर्फ घटनाक्रम की जानकारी दी. पर हिंदुस्तान अखबार में जो खबर छपी है उसमें घर से गायब लड़की और जिस स्कूल में वो पढ़ती है, दोनों का नाम प्रकाशित कर दिया है. स्कूल वालों का कहना है कि जब लड़की अपने घर से किसी के साथ चली गई है तो इस प्रकरण में स्कूल का नाम नाहक घसीट कर बदनाम किया जा रहा है. साथ ही ऐसे मामलों में लड़की का नाम प्रकाशित हो जाने से लड़की की समाज में बदनामी होने लगती है. इस मामले में भी ऐसा ही हो रहा है. घर छोड़कर किसी के साथ चले जाने जैसी घटनाएं आजकल आए दिन होती हैं. मीडिया को ऐसे प्रकरणों में एक अभिभावक की तरह जिम्मेदार भूमिका निभानी चाहिए ताकि भावावेश में गलती करने वाले किशोर उम्र बच्चों का बाकी जीवन बर्बाद न हो.
पर हिंदुस्तान, मेरठ ने ऐसा नहीं किया. इस अखबार में लड़की का नाम प्रकाशित हो जाने से उसके परिजन परेशान हैं. इस परिवार से उनके पड़ोसी व परिचित लड़की के भाग जाने के बारे में कई तरह के सवाल करने लगे हैं. इस हालत में परिजन खुद को अपमानित महसूस कर रहे हैं. स्कूल से जुड़े लोगों का कहना है कि हिंदुस्तान अखबार की गैर-जिम्मेदार भूमिका के खिलाफ वे लोग अदालत व प्रेस काउंसिल का सहारा लेने पर विचार कर रहे हैं क्योंकि किसी को बिना किसी कारण बदनाम करना मीडिया का धर्म नहीं है. स्कूल से जुड़े लोगों ने बताया कि यही खबर एचटी ग्रुप के अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स में संतुलित ढंग से प्रकाशित हुई है लेकिन इसी ग्रुप के हिंदी अखबार हिंदुस्तान ने बच्चे व विद्यालय का नाम फोटो सहित छापकर बच्चे के परिवार व स्कूल से जुड़े लोगों की किरकिरी करा दी है.
अगर वो लड़की लौट आती है और स्कूल पढ़ने जाना फिर से शुरू करती तो उसके साथ के बच्चे और उसको जानने वाले परिचित उसकी पहचान कर लेंगे और उससे कई तरह के सवाल पूछेंगे और कुछ लोग उसे हेय नजरों से भी देखेंगे. ऐसे में वह लड़की हीनभावना से ग्रसित होने लगेगी. ये व्यवहार और इससे उपजी नकारात्मक भावना के कारण किशोर बच्चों के कोमल दिमाग पर बुरा प्रभाव पड़ता है. कई बार वे मानसिक रूप से असंयमित होकर गलत कदम उठा लेते हैं. फिर इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा? मनोचिकित्सकों का भी कहना है कि ऐसे मामलों में बच्चों को संरक्षण और दुलार देकर समझाने की जरूरत होती है, न कि सामाजिक रूप से उन्हें अपमानित करके उन्हें अलगाव में डाल देने जैसा घिनौना कदम उठाना चाहिए. फिलहाल हिंदुस्तान, मेरठ के नेतृत्व ने जो काम किया है, उसके कारण एक परिवार बेहद मुश्किल में फंस गया है.
मेरठ से एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित. इस पत्र में उल्लखित तथ्यों में अगर कोई कमी-बेसी नजर आए तो नीचे कमेंट बाक्स के जरिए अपनी बात रख सकते हैं.












sheen khan
February 12, 2011 at 3:31 pm
ladkiyon ke bhagna ya apharan jaisie mamla roz hi akhbaro ki news me shamil hote he pathak heding padhker hi news ki taraf dhyan dete he lekin ye kehna galat na hoga ki hindustan akhbar ki wo news jis ke liye sanwedna parkat ki gayi he agar gor se us news ki head line padhen to istithi saf ho jaye gi jis me ht. ne ladki ka apharan hona darshaya he or jagran wa ujala ne usi news me ladki per bhagne ka arop lagaya he toab aap hi bataye kis ki khabar se ladki ki zayada badnami hogi.
Madhwendra Pandey
February 13, 2011 at 10:11 am
this is not a vital matter of Hindustan.but this is minar for Hindustan.aisi galatiya to Hindustan akhbar me aye din hote rahta hai.
sanjay sharma
February 13, 2011 at 10:16 am
that is right but New paper has appointed without qualification only reporter who has do the work minimum salary . he dont know what’s press law and prees limit
prashant ruhela
February 16, 2011 at 6:30 am
sahi baat h, yaha baat koi fake repoter hi kar skta h,kyuki yeh reporter qualified nhi h. or agr yeh qualified hota,toh yeh aisa kaam nhi krta,I think isko reporter hi galat banaya gya h…
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.media ka kaam h symphathy k sath sach dikhana na ki kisi ko badnaam krna………
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It’s wrong……