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रिसेप्शनिस्ट से एकाउंट हेड ने की छेड़छाड़

: इस चैनल के संपादक के भी इश्क के चर्चे आजकल हैं आम : एक न्यूज चैनल के अंदरखाने की ये खबर है. वहां एक नई नई रिसेप्शनिस्ट ने ज्वाइन किया. महीने भर हुए थे उसके आए. उस पर बाकियों की तो नजर थी ही, एकाउंट हेड महोदय कुछ ज्यादा सक्रिय हो गए थे उसको लेकर. कई दिनों तक सिगनल देने के बाद भी जब वो रिसेप्शनिस्ट संकेत न समझ पाई तो एकाउंटेंट महोदय ने ब्रह्मास्त्र चला दिया. वे लड़की से छेड़खानी कर बैठे. लड़की वैसी नहीं थी जैसा एकाउंट हेड महोदय सोच रखे थे. सो वो भड़क गई और एकाउंट हेड महोदय की ऐसी-तैसी करते हुए नौकरी छोड़कर घर चली गई.

: इस चैनल के संपादक के भी इश्क के चर्चे आजकल हैं आम : एक न्यूज चैनल के अंदरखाने की ये खबर है. वहां एक नई नई रिसेप्शनिस्ट ने ज्वाइन किया. महीने भर हुए थे उसके आए. उस पर बाकियों की तो नजर थी ही, एकाउंट हेड महोदय कुछ ज्यादा सक्रिय हो गए थे उसको लेकर. कई दिनों तक सिगनल देने के बाद भी जब वो रिसेप्शनिस्ट संकेत न समझ पाई तो एकाउंटेंट महोदय ने ब्रह्मास्त्र चला दिया. वे लड़की से छेड़खानी कर बैठे. लड़की वैसी नहीं थी जैसा एकाउंट हेड महोदय सोच रखे थे. सो वो भड़क गई और एकाउंट हेड महोदय की ऐसी-तैसी करते हुए नौकरी छोड़कर घर चली गई.

साथ में प्रबंधन के लोगों से शिकायत भी कर गई. लेकिन मैनेजमेंट के लिए नई आई रिसेप्शनिस्ट से ज्यादा महत्वपूर्ण हैं एकाउंट हेड, सो, लड़की को चुप करा दिया गया और मामले को रफा दफा कर दिया गया. इस चैनल में जो संपादक महोदय हैं, उनके भी इश्क के चर्चे आजकल आम हैं. वहां काम करने वाली लड़कियों को वो मस्त-मस्त एसएमएस भेजते रहते हैं. एक लड़की ने चैनल के डायरेक्टर को एक दिन संपादक महोदय का भेजा एक एसएमएस दिखा दिया. फिर भी संपादक महोदय का आचरण नहीं बदला है. वे आए दिन लड़कियों को काफी पिलाने के लिए रेस्टोरेंट में ले जाते रहते हैं, किसी लड़के बेचारे को नहीं पूछते. इसीलिए तो चैनल वाले लड़के सब कहते हैं कि काश वो लड़की होते ताकि संपादक के प्रिय बनकर तरक्की पाते रहते.

चेतावनी : कानाफूसी कैटगरी की खबरें चर्चाओं, अफवाहों, कयासों पर आधारित होती हैं, जिसमें सच्चाई संभव है और नहीं भी. इसलिए इन खबरों को प्रामाणिक मानकर न पढ़ें. अगर कोई इसे प्रामाणिक मानकर पढ़ता है तो वो उसकी मर्जी व समझ पर निर्भर करता है और वह उसके लिए खुद जिम्मेदार है.

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0 Comments

  1. Mraj

    February 18, 2011 at 4:09 pm

    खुलेआम सड़कों पर लड़कियां छेड़ने की ख़बरों के बाद अब ऑफिस के भी चर्चे होने लगे हैं, वैसे लड़कियां कितनी सही हैं इसका सबूत bike पर चिपककर पीछे बैठी लड़कियों को देखकर आसानी से लगाया जा सकता है

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