Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

साहित्य

आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री की हालत गंभीर

[caption id="attachment_19659" align="alignleft" width="134"]शास्त्री जी की एक पुरानी तस्वीरशास्त्री जी की एक पुरानी तस्वीर[/caption]: जिसने साहित्यकारों की कई पीढ़ियों को आश्रय दिया, उन्हें आज कोई नहीं पूछने वाला : इस बाजारू जमाने में लाली-लिपिस्टिक लगाए लायजनरों, दलालों, बौनों, भ्रष्टाचारियों के अलावा बाकी किसी और को कौन पूछता है. कभी एके हंगल के तिल-तिल कर बिना इलाज मरने की खबर आती है तो अब नई सूचना हिन्दी के मूर्धन्य साहित्यकार महाकवि आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री के बारे में आ रही है.

शास्त्री जी की एक पुरानी तस्वीर

शास्त्री जी की एक पुरानी तस्वीर

: जिसने साहित्यकारों की कई पीढ़ियों को आश्रय दिया, उन्हें आज कोई नहीं पूछने वाला : इस बाजारू जमाने में लाली-लिपिस्टिक लगाए लायजनरों, दलालों, बौनों, भ्रष्टाचारियों के अलावा बाकी किसी और को कौन पूछता है. कभी एके हंगल के तिल-तिल कर बिना इलाज मरने की खबर आती है तो अब नई सूचना हिन्दी के मूर्धन्य साहित्यकार महाकवि आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री के बारे में आ रही है.

96 वर्षीय यह वयोवृद्ध साहित्यकार आज जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है. दवा और उचित चिकित्सा का अभाव झेल रहा यह महान शख्सियत आर्थिक संकट से भी गुजर रहा है. इनका इलाज बिहार के मुजफ्‌फरपुर मेडिकल अस्पताल में चल रहा है. सप्ताह भर से वे यहीं भरती हैं. शास्त्री जी पेट और ह्रदय के रोग से पीड़ित हैं. सरकार की कौन कहे, खुद साहित्य बिरादरी के लोग भी आज शास्त्री जी का हालचाल जानने की जहमत नहीं उठा रहे.

वर्ष 1916 में गया जिले के मैगरा गांव में जन्मे आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री ने अपने सृजनकाल में राधा, रूप-अरूप, तीर-तरंग, मेघगीत, कालिदास, कानन, अवंतिका, धूपतरी आदि जैसी कालजयी कृतियों का सृजन किया. सूर्यकांत त्रिपाठी निराला और नन्द दुलारे वाजपेयी के काफी करीब और उनके प्रिय कवियों में शामिल रहे शास्त्री जी का हिंदी साहित्य में महती योगदान है. आचार्य जी के निर्देशन में 100 से अधिक लोगों ने पीएचडी किया पर अधिकांश लोग उन्हें आज भूल चुके हैं.

संस्कृत और हिंदी के प्रकांड विद्वान शास्त्री जी के आंगन में साहित्यकारों की कई पीढि़यों ने आश्रय पाया. उनके कई कनिष्ठों को उनसे बड़ा पुरस्कार-सम्मान मिल चुका है. दुर्भाग्य यह कि पद्मश्री, राजेंद्र शिखर सम्मान, भारत-भारती सम्मान और शिवपूजन सहाय जैसे प्रतिष्ठित सम्मान और पुरस्कारों से नवाजे गए इस साहित्यकार की अमर रचनाओं, उपन्यासों और ग्रंथों को सहेजने वाला तक कोई नहीं है. शास्त्री जो खुद तो बीमार ही हैं, उनकी पत्नी भी बीमार चल रही हैं.

अखिलेश्वर पांडेय के ब्लाग अ-शब्द से साभार

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

0 Comments

  1. Sandeep Dwivedi

    February 26, 2011 at 7:12 am

    Sun kar Bahut Dhukh Hua…

  2. ashok anurag

    March 2, 2011 at 7:24 am

    jo kal they o aaj nahi hai………
    jo aaj hai kal nahi hongey…….
    hone na hone ka kram u hi chalta rahega……..
    hum hai hum rahenge ye bharam bhi palta rahega………
    janki vallahav shashtri g se milne ka saubhagya mila hai mujhey,aaj sirf itna hi kahunga….bharam me jeeney walo kal jab janki vallahav shashtri g nahi rahenge tab ghariyali aanso bahaney se achha hai ki aao aagey badho aur jivan ke kuchh pal de do,yakin mano tumhara kad thora aur bara ho jayega.
    –ASHOK ANURAG.
    writer,poet and media person.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास तक खबर सूचनाएं जानकारियां मेल करें : [email protected]

भड़ास के वाट्सअप चैनल से जुड़ें और नवीनतम खबरें पाएं : Bhadas Whatsapp

भड़ास लीगल टीम : किसी किस्म की लीगल हेल्प के लिए संपर्क करें- Bhadas Legal Team

You May Also Like

Uncategorized

भड़ास4मीडिया डॉट कॉम तक अगर मीडिया जगत की कोई हलचल, सूचना, जानकारी पहुंचाना चाहते हैं तो आपका स्वागत है. इस पोर्टल के लिए भेजी...

Uncategorized

भड़ास4मीडिया का मकसद किसी भी मीडियाकर्मी या मीडिया संस्थान को नुकसान पहुंचाना कतई नहीं है। हम मीडिया के अंदर की गतिविधियों और हलचल-हालचाल को...

हलचल

[caption id="attachment_15260" align="alignleft"]बी4एम की मोबाइल सेवा की शुरुआत करते पत्रकार जरनैल सिंह.[/caption]मीडिया की खबरों का पर्याय बन चुका भड़ास4मीडिया (बी4एम) अब नए चरण में...

Uncategorized

मीडिया से जुड़ी सूचनाओं, खबरों, विश्लेषण, बहस के लिए मीडिया जगत में सबसे विश्वसनीय और चर्चित नाम है भड़ास4मीडिया. कम अवधि में इस पोर्टल...