नई दिल्लीः मीडिया दुनिया में कई क्रांतियों का सूत्रधार रहा है और इसके स्वरूप में लगातार बदलाव होते रहे हैं. अखबारों से समाचार चैनल तक और इंटरनेट पर समाचार वेबसाइट से सोशल नेटवर्किंग साइट् और ब्लॉग तक बदलाव हुए हैं. इस बदलते मीडिया के स्वरूप में न्यू मीडिया और इसका उपयोग करने वाले अधिकांशतः युवा वर्ग को ध्यान में रखते हुए एक सेमिनार का आयोजन किया गया.
प्लानमैन मीडिया की 14 भाषाओं में प्रकाशित समाचार पत्रिका द संडे इंडियन ने दिल्ली विश्वविद्यालय के नार्थ कैंपस स्थित श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कालेज के साथ मिल कर शुक्रवार को “न्यू मीडिया- यूथ मीडियाः चुनौतियां एवं सभावनाएं” विषय पर सेमिनार का आयोजन किया. सेमिनार में मीडिया से जुड़े वक्ताओं ने इसके विभिन्न आयाम पर प्रकाश डाला. इसी क्रम में द संडे इंडियन पत्रिका की हिंदी वेबसाइट द संडे इंडियन डाट काम लांच की गई.
प्रसिद्ध ब्लागर एवं एनडीटीवी इंडिया के कार्यकारी संपादक रवीश कुमार ने सेमिनार को संबोधित करते हुए कहा कि भले ही हम वेब पत्रकारिता को नया मान रहे हो या भारत में सोशल नेटवर्किग साइट्स की मांग अब बढ़ी हो, लेकिन वास्तविकता यह है कि पश्चिमी देशों के लिए अब यह “न्यू मीडिया” नहीं रह गया है, हां हमारे लिए जरूर है. उन्होंने कहा कि बदलते जमाने के साथ हर चीज में तकनीकी विकास हो रहे हैं और इंटरनेट के आ जाने से मीडिया के फलक में विस्तार हुआ है. ब्लॉग और सोशल नेटवर्किंग साइट्स ने विचारों की अभिव्यक्ति के लिए एक मंच उपलब्ध कराया है. जिसका हमें स्वागत करते हुए सार्थक उपयोग करना चाहिए.
भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व सांसद अनुराग ठाकुर ने भी न्यू मीडिया को वैकल्पिक व भविष्य का मीडिया बताया. उन्होंने कहा कि न्यू मीडिया की ताकत मिस्र और ट्यूनिशिया में हुई क्रांति ने साबित कर दी है. उन्होंने कहा कि सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर प्रधानमंत्री के साथ-साथ सभी बड़े नेता व प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद है, जहां आप अपनी बात सीधे-सीधे पहुंचा सकते हैं लेकिन युवाओं को इसके लिए आगे आना होगा. क्योंकि युवा वर्ग ही इंटरनेट पर ज्यादा सक्रिय है और यह वर्ग देश को नई दिशा देने के लिए देश के कर्णधारों को बाध्य कर सकता है. भ्रष्टाचार के खिलाफ ब्लॉग, सोशल नेटवर्किंग साइट्स और समाचार वेबसाइटो के माध्यम से जोरदार आंदोलन किया जा सकता हैं.
सिडनी से प्रकाशित द इंडिया के संपादक (भारत) आदित्य राज कौल ने कहा कि उन्होंने प्रियदर्शनी मट्टू हत्याकांड में आए फैसले के खिलाफ आर्कुट पर एक अभियान चलाया था और यह अभियान रंग लाया, लाखों लोग इंटरनेट पर उस अभियान का हिस्सा बने और अंततः प्रियदर्शनी हत्याकांड में उचित फैसला आया. तब उनकी उम्र केवल 16 साल की थी. इसी तरह उन्होंने जातिवार आरक्षण के खिलाफ भी इंटरनेट पर अभियान चलाया. कौल का कहना था कि उनके पास न तो अभियान चलाने के लिए पैसे थे और न ही राजनीतिक समर्थन, ऐसे में इंटरनेट इस अभियान को परवान चढ़ाने में महत्वपूर्ण अस्त्र बना.
जी न्यूज (उत्तर प्रदेश) की प्राइम टाइम एंकर व इंटपुट एडिटर शीतल राजपूत ने कहा कि न्यूमीडिया ने पत्रकारिता के मिजाज को बदल दिया है. न केवल समाचार वेबसाइट ने बल्कि अन्य सोशल साइट्स ने विचार के संप्रेषणीयता को एक नया फलक दिया है. जहां संपादन के नाम पर चलने वाली कैंची का डर नहीं होता.
न्यूज 24 की प्राइम टाइम न्यूज एंकर अंजना कश्यप ने कहा कि लोगों के दिलों में अराजक व्यवस्था के खिलाफ आग तो है, वह धधक भी रही है लेकिन भीतर ही भीतर. सरकार या जनप्रतिनिधि इस व्यवस्था के खिलाफ युवाओं का आह्वान तो करते हैं लेकिन उनके लिए मंच या विकल्प मुहैया नहीं कराते. हालांकि न्यू मीडिया ने जनता की आंकाक्षाओं व विचारों को अभिव्यक्त करने के लिए एक सशक्त माध्यम उपलब्ध कराया है.
श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कालेज से वेब पत्रकारिता में कोर्स पूरा कर चुके छात्रों को प्लानमैन मीडिया के समूह संपादक ए. संदीप ने प्रमाणपत्र प्रदान कर उनसे न्यू मीडिया के जरिये एक सभ्य समाज और देश के पुनर्निमार्ण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया. श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कालेज के प्राचार्य डॉ. जसविंदर सिंह, दिल्ली सिख गुरुद्वारा कमेटी के पूर्व अध्यक्ष सरदार एच एस सरना और कालेज प्रबंधन कमेटी के चेयरमैन सरदार जोगिंदर सिंह वालिया ने अतिथियों को पुष्पगुच्छ व स्मृतिचिन्ह दे कर सम्मानित किया. सेमिनार में अतिथियों का स्वागत व विषय पर्वतन करते हुए द संडे इंडियन के कार्यकारी संपादक (हिंदी व भोजपुरी) ओंकारेश्वर पांडेय ने कहा कि भविष्य इंटरनेट का अर्थात न्यूमीडिया का है. धन्यवाद ज्ञापन द संडे इंडियन के एसोसिएट एडिटर अनिल पांडेय ने किया. प्रेस विज्ञप्ति












Harinath Kumar BHU
March 4, 2011 at 3:16 pm
new media ne LOKTANTRA ke mayane hi badal di hai. jahan ‘freedom of speech’ ka matlab keval apni bat ko maukhik rup se kahan hi jana, mana aur kaha jata tha, vahin aj bahra, gunga vyakti bhi new media ke madhyam se apni bat ko rakhne ka bharpur avasar pata hai. kisi bhi vyakti ke kuntha ko public karne me new media ka aham role raha hai. chahe cancer pidit vyakti ke liye chanda mangna ho ya fir Vinayak Sen ki rihayi ke liye ek muhim chhednin ho, new media ne isko sambhav kiya hai.
Harinath Kumar BHU
March 4, 2011 at 3:17 pm
new media ne LOKTANTRA ke mayane hi badal di hai. jahan ‘freedom of speech’ ka matlab keval apni bat ko maukhik rup se kahan hi jana, mana aur kaha jata tha, vahin aj bahra, gunga vyakti bhi new media ke madhyam se apni bat ko rakhne ka bharpur avasar pata hai. kisi bhi vyakti ke kuntha ko public karne me new media ka aham role raha hai. chahe cancer pidit vyakti ke liye chanda mangna ho ya fir Vinayak Sen ki rihayi ke liye ek muhim chhednin ho, new media ne isko sambhav kiya hai.