यशवंत जी, आपके पोर्टल के माध्यम से मुझे ज्ञात हुआ मेरे और मेरे वेब पोर्टल के बारे में किसी ने समाचार “ये न्यू मीडिया नहीं, नव दलालों के अड्डे हैं, जरा इन्हें ही देखिए” प्रकाशित कराया है. समाचार में चूँकि मेरे बारे में सवाल उठाया गया है और पोर्टल के बारे में आरोप लगाया गया है इसलिए इसका जवाब देना जरुरी हो जाता है, नहीं तो जिन लोगों के बारे में मेरे पोर्टल aapkikhabar.com द्वारा सवाल उठाया गया है उनके हौसले बुलंद हो जायेंगे.
सबसे पहले तो जिन महाशय ने यह कहा है कि राजीव श्रीवास्तव aapkikhabar.com में काम करते हैं, उनको बताना चाहूँगा कि मैं इस पोर्टल का founder editor हूँ और बहुत ही कम समय में पोर्टल की सफलता से पूरी टीम काफी खुश है, जहाँ तक मेरे ऊपर यह आरोप लगाया गया कि मैं पोर्टल को दलाली और ब्लैकमेलिंग के लिए उपयोग करता हूँ तो उसकी जरुरत मुझे नहीं है, क्योंकि पोर्टल से और खुद मैं एक प्रतिष्ठित news agency में स्टेट correpondent हूँ और भगवान की दया से वेतनभोगी हूँ, इसलिए दलाली की जरुरत नहीं है जैसा कि आरोप महाशय का है.
अब मैं आता हूँ उस विद्यालय अमर शहीद राजेंद्र लाहिड़ी विद्यालय, पथवलिया, लखनऊ रोड, गोंडा पर, जो सरकार द्वारा वित्त पोषित है. जिसके बारे में लिखा गया है कि इस विद्यालय के मेरे पिता श्री ओम प्रकाश श्रीवास्तव कई दशक से प्रबंधक हैं. अभी करीब दो साल पहले विद्यालय के प्रधानाध्यापक धरनीधर द्विवेदी सेवानिवृत्त हो गए थे और उस समय चूंकि शासन द्वारा किसी भी नियुक्ति पर रोक लगी थी, इसलिए विद्यालय के ही सहायक अध्यापक अंजनी कुमार को कार्यवाहक प्रधानाध्यापक का चार्ज दे दिया गया था और जब शासन द्वारा रोक हटाई गयी, तब नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की गयी. अंजनी कुमार को अपनी कुर्सी हिलती नजर आई और उन्होंने स्कूल के खिलाफ कई कुचक्र रचकर खुद भी कई जगहों पर शिकायतें की और टीकमदत्त शुक्ल, जो सदस्य भी थे, उनसे भी शिकायत करायी, लेकिन हर बार उन्हें मुंह की खानी पड़ी.
नियुक्ति करना किसी भी मैनेजमेंट का अधिकार है और यह अधिकार उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा नियमावली द्वारा संचालित होता है, जिसमें प्रबंधक को ही यह अधिकार होता है कि वह नियुक्ति करे और सरकारी अधिकारी ऑब्जर्बर की भूमिका में मैनेजमेंट द्वारा बुलाये जाते हैं, लेकिन अंजनी कुमार ने नियुक्ति प्रक्रिया को रोकने की भरपूर कोशिश की और अनर्गल शिकायत पहले भी की थी और बाद में भी किया. जिस पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने जांच के लिए 3 सदस्यीय समिति गठित की. जिसमें शिकायत को तथ्यहीन पाया और एक सदस्य टीकमदत्त शुक्ल, जो बैक डोर से अंजनी कुमार द्वारा बरते जा रहे अनियमितता को अपने लाभ के लिए पोषित कर रहे थे, उनके भी शिकायत को उप निबंधक सोसाइटी, फैजाबाद ने माननीय उच्च न्यायलय के आदेश के क्रम में सुनवाई करते हुए ख़ारिज कर दिया और मैनेजमेंट को पूर्ण कालिक माना और प्रबंधक ओम प्रकाश श्रीवास्तव को पूरी तरह वैध बताया.
चूँकि गोंडा का शिक्षा विभाग कथित रूप से एक दलाल स्वयं प्रकाश शुक्ल के नेटवर्क से संचालित होता है. स्थिति यहाँ तक बदतर है कि माननीय उच्च न्यालय के आदेश के क्रम में पूर्व जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी हिफजुर्रहमान द्वारा स्कूल के एकल खाते के संचालन को खत्म करते हुए इसके लिए अंजनी कुमार को दोषी पाया था और वित्त एवं लेखाधिकारी आरबी वर्मा ने भी अंजनी को वेतन बिल प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था, लेकिन अंजनी कुमार द्वारा ऐसा नहीं किया गया. बाद में शिक्षा विभाग के लिए बदनाम स्वयं प्रकाश की मदद से कोर्ट के आदेश की धज्जियाँ उड़ाते हुए बैंक की मिलीभगत से एकल हस्ताक्षर से वेतन निकाल दिया गया, जिस बारे में प्रबंधक ओम प्रकाश श्रीवास्तव द्वारा इन लोगों को अवमानना की नोटिस दी गयी है.
जिससे भ्रष्ट अधिकारी टीचर के खिलाफ कारवाई करने के बजाय टीचर की मदद कर रहे हैं, जबकि 2 बार विभाग द्वारा उसे दोषी पाए जाने पर मैनेजमेंट द्वारा अंजनी कुमार की सेवा समाप्त करने के लिए अनुमोदन मांगा गया था, लेकिन भ्रष्ट तंत्र ने शिक्षा का स्तर सुधारने की बजाय भ्रष्टाचार को ही पाला पोसा और अब जब नव नियुक्त प्रधानाध्यापक अजय कुमार द्वारा वेतन की मांग की गयी, जिसके हस्ताक्षर को बेसिक शिक्षा अधिकारी ने वेरिफाई दो महीने से भी ज्यादा समय होने के बावजूद नहीं किया और न ही कोई जवाब दिया. जबकि मैनेजमेंट द्वारा कई पत्र लिख कर सहयोग की अपेक्षा की गयी है, इसके उलट बेसिक शिक्षा अधिकारी राघवेन्द्र बाजपेयी द्वारा अनर्गल पत्राचार जरूर किया गया, जिस पर उन्हें मानहानि की नोटिस दी जा चुकी है. जिस पर वह और वित्त एवं लेखाधिकारी आरबी वर्मा तिलमिलाए हुए हैं.
कथित दलाल स्वयं प्रकाश शुक्ल के भ्रष्टाचार के नेटवर्क के खुलासे के साक्ष्य शासन को उपलब्ध कराने के लिए जब प्रमुख सचिव ने मुख्यमंत्री से समय तय किया, तभी से भ्रष्ट अधिकारी और स्वयं प्रकाश शुक्ल, जो कभी लिपिक हुआ करता था, बौखलाए हुए हैं. उसके फर्जी नौकरी का अनुमोदन पूर्व बीएसए डॉ. अमरकांत सिंह द्वारा निरस्त किया जा चुका है. उसी द्वारा आज शिक्षा विभाग में दलाली का नेटवर्क संचालित किया जा रहा है और दलाल टाइप के पत्रकारों से मिलीभगत करके फर्जी आरोप लगाये जा रहे हैं.
राजीव श्रीवास्तव











