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कृष्ण कल्पित की ”एक शराबी की सूक्तियां”

पिछले दिनों शराब पर कुछ पंक्तियां लिखकर इसी पोर्टल पर प्रकाशित किया तो ढेर सारे पत्रकार साथी उत्साहित हो गए. कइयों ने तो कहा कि इसी टाइप रोज कुछ न कुछ हो जाया करे. उनकी फरमाइश को ध्यान में रखते हुए मैं ‘शराबीश्री’ की रचनाओं को पेश कर रहा हूं. कृष्ण कल्पित को ‘शराबीश्री’ की उपाधि से मैंने खुद नवाजा है, बिना उनसे मिले, बिना उन्हें देखे और बिना उनकी अनुमति लिए. सिर्फ इस नाते कि उन्होंने दुनिया को ‘एक शराबी की सूक्तियां’ देकर उसी तरह बड़ा काम किया है जैसे हरिवंश राय बच्चन ने ‘मधुशाला’ रचकर. ‘मधुशाला’ छायावादियों के दौर की अमर रचना है तो ‘एक शराबी की सूक्तियां’ आधुनिकतावादियों के दौर की, ऐसा मेरा मानना है. पिछले दिनों जयपुर जाना हुआ था तो शराबखोरी के वक्त कृष्ण कल्पित के बारे में विस्तार से बताने के बाद उनसे मोबाइल से बात करा दी थी ईशमधु तलवार और प्रेमचंद गांधी ने. नशे में जाने क्या कहा, कृष्ण कल्पित जी ने जाने क्या सुना, लेकिन सूक्तियां सुनकर-पढ़कर इतना मैं प्रसन्न हुआ था कि अकबक अकबक करते हुए उनकी जय जयकार किए जा रहा था. कृष्ण कल्पित की इन रचनाओं को जिनने अभी तक नहीं पढ़ा है, वे शायद ‘गरीब’ किस्म के आदमी हैं. उम्मीद है, पढ़कर वे जरूर ‘धनी’ बन जाएंगे. कृष्ण कल्पित के बारे में बता दें, वे सन 1957 में 30 अक्टूबर को राजस्थान के फतेहपुर शेखावटी इलाके में पैदा हुए. वे शानदार कवि हैं. कई डाक्यूमेंट्रीज के निर्माता-निर्देशक हैं. कविता पर उनकी तीन और मीडिया पर एक किताब प्रकाशित हो चुकी है. सबसे ज्यादा चर्चित हुए ‘एक शराबी की सूक्तियों’ के कारण. कृष्ण कल्पित दिल्ली में रहते हैं. उनकी अनुमति लेकर हम यहां ‘एक शराबी की सूक्तियां’ का प्रकाशन कर रहे हैं.

-यशवंत, एडिटर, भड़ास4मीडिया


पिछले दिनों शराब पर कुछ पंक्तियां लिखकर इसी पोर्टल पर प्रकाशित किया तो ढेर सारे पत्रकार साथी उत्साहित हो गए. कइयों ने तो कहा कि इसी टाइप रोज कुछ न कुछ हो जाया करे. उनकी फरमाइश को ध्यान में रखते हुए मैं ‘शराबीश्री’ की रचनाओं को पेश कर रहा हूं. कृष्ण कल्पित को ‘शराबीश्री’ की उपाधि से मैंने खुद नवाजा है, बिना उनसे मिले, बिना उन्हें देखे और बिना उनकी अनुमति लिए. सिर्फ इस नाते कि उन्होंने दुनिया को ‘एक शराबी की सूक्तियां’ देकर उसी तरह बड़ा काम किया है जैसे हरिवंश राय बच्चन ने ‘मधुशाला’ रचकर. ‘मधुशाला’ छायावादियों के दौर की अमर रचना है तो ‘एक शराबी की सूक्तियां’ आधुनिकतावादियों के दौर की, ऐसा मेरा मानना है. पिछले दिनों जयपुर जाना हुआ था तो शराबखोरी के वक्त कृष्ण कल्पित के बारे में विस्तार से बताने के बाद उनसे मोबाइल से बात करा दी थी ईशमधु तलवार और प्रेमचंद गांधी ने. नशे में जाने क्या कहा, कृष्ण कल्पित जी ने जाने क्या सुना, लेकिन सूक्तियां सुनकर-पढ़कर इतना मैं प्रसन्न हुआ था कि अकबक अकबक करते हुए उनकी जय जयकार किए जा रहा था. कृष्ण कल्पित की इन रचनाओं को जिनने अभी तक नहीं पढ़ा है, वे शायद ‘गरीब’ किस्म के आदमी हैं. उम्मीद है, पढ़कर वे जरूर ‘धनी’ बन जाएंगे. कृष्ण कल्पित के बारे में बता दें, वे सन 1957 में 30 अक्टूबर को राजस्थान के फतेहपुर शेखावटी इलाके में पैदा हुए. वे शानदार कवि हैं. कई डाक्यूमेंट्रीज के निर्माता-निर्देशक हैं. कविता पर उनकी तीन और मीडिया पर एक किताब प्रकाशित हो चुकी है. सबसे ज्यादा चर्चित हुए ‘एक शराबी की सूक्तियों’ के कारण. कृष्ण कल्पित दिल्ली में रहते हैं. उनकी अनुमति लेकर हम यहां ‘एक शराबी की सूक्तियां’ का प्रकाशन कर रहे हैं.

-यशवंत, एडिटर, भड़ास4मीडिया


कृष्ण कल्पित

1

शराबी के लिए

हर रात

आखिरी रात होती है.


शराबी की सुबह

हर रोज

एक नयी सुबह.

2

हर शराबी कहता है

दूसरे शराबी से

कम पिया करो.

शराबी शराबी के

गले मिलकर रोता है.

शराबी शराबी के

गले मिलकर हंसता है.

3

शराबी कहता है

बात सुनो

ऐसी बात

फिर कहीं नहीं सुनोगे.

4

शराब होगी जहां

वहां आसपास ही होगा

चना चबैना.

5

शराबी कवि ने कहा

इस बार पुरस्कृत होगा

वह कवि

जो शराब नहीं पीता.

6

समकालीन कवियों में

सबसे अच्छा शराबी कौन है?

समकालीन शराबियों में

सबसे अच्छा कवि कौन है?

7

भिखारी को भीख मिल ही जाती है

शराबी को शराब.

8

मैं तुमसे प्यार करता हूं

शराबी कहता है

रास्ते में हर मिलने वाले से.

9

शराबी कहता है

मैं शराबी नहीं हूं


शराबी कहता है

मुझसे बेहतर कौन गा सकता है?

10

शराबी की बात का विश्वास मत करना.

शराबी की बात का विश्वास करना.

शराबी से बुरा कौन है?

शराबी से अच्छा कौन है?

11

शराबी

अपनी प्रिय किताब के पीछे

छिपाता है शराब.

12

एक शराबी पहचान लेता है

दूसरे शराबी को

जैसे एक भिखारी दूसरे को.

13

थोडा सा पानी

थोडा सा पानी


सारे संसार के शराबियों के बीच

यह गाना प्रचलित है.

14

स्त्रियां शराबी नहीं हो सकतीं

शराबी को ही

होना पडता है स्त्री.

15

सिर्फ शराब पीने से

कोई शराबी नहीं हो जाता.

16

कौन सी शराब

शराबी कभी नहीं पूछता

17

आजकल मिलते हैं

सजे-धजे शराबी


कम दिखाई पडते हैं सच्चे शराबी.

18

शराबी से कुछ कहना बेकार.

शराबी को कुछ समझाना बेकार.

19

सभी सरहदों से परे

धर्म, मजहब, रंग, भेद और भाषाओं के पार

शराबी एक विश्व नागरिक है.

20

कभी सुना है

किसी शराबी को अगवा किया गया?

कभी सुना है

किसी शराबी को छुडवाया गया फिरौती देकर?

21

सबने लिक्खा – वली दक्कनी

सबने लिक्खे – मृतकों के बयान

किसी ने नहीं लिखा

वहां पर थी शराब पीने पर पाबंदी

शराबियों से वहां

अपराधियों का सा सलूक किया जाता था.

22

शराबी के पास

नहीं पायी जाती शराब

हत्यारे के पास जैसे

नहीं पाया जाता हथियार.

23

शराबी पैदाइशी होता है

उसे बनाया नहीं जा सकता.

24

एक महफिल में

कभी नहीं होते

दो शराबी.

25

शराबी नहीं पूछता किसी से

रास्ता शराबघर का.

26

महाकवि की तरह

महाशराबी कुछ नहीं होता.

27

पुरस्कृत शराबियों के पास

बचे हैं सिर्फ पीतल के तमगे

उपेक्षित शराबियों के पास

अभी भी बची है

थोडी सी शराब.

28

दिल्ली के शराबी को

कौतुक से देखता है

पूरब का शराबी

पूरब के शराबी को

कुछ नहीं समझता

धुर पूरब का शराबी.

29

शराबी से नहीं लिया जा सकता

बच्चों को डराने का काम.

30

कविता का भी बन चला है अब

छोटा मोटा बाजार

सिर्फ शराब पीना ही बचा है अब

स्वांतः सुखय कर्म.

31

बाजार कुछ नही बिगाड़ पाया

शराबियों का


हलांकि कई बार पेश किये गये

प्लास्टिक के शराबी.

32

आजकल कवि भी होने लगे हैं सफल

आज तक नहीं सुना गया

कभी हुआ है कोई सफल शराबी.

33

कवियों की छोडिए

कुत्ते भी जहां पा जाते हैं पदक

कभी नहीं सुना गया

किसि शराबी को पुरस्कृत किया गया.

34

पटना का शराबी कहना ठीक नहीं

कंकडबाग के शराबी से

कितना अलग और अलबेला है

इनकमटैक्स गोलंबर का शराबी.

35

कभी प्रकाश में नहीं आता शराबी


अंधेरे में धीरे धीरे

विलीन हो जाता है.

36

शराबी के बच्चे

अक्सर शराब नहीं पीते.

37

स्त्रियां सुलाती हैं

डगमगाते शराबियों को


स्त्रियों ने बचा रखी है

शराबियों की कौम

38

स्त्रियों के आंसुओं से जो बनती है

उस शराब का

कोई जवाब नहीं.

39

कभी नहीं देखा गया

किसी शराबी को

भूख से मरते हुए.

40

यात्राएं टालता रहता है शराबी

पता नही वहां पर

कैसी शराब मिले

कैसे शराबी!

41

धर्म अगर अफीम है

तो विधर्म है शराब

42

समरसता कहां होगी

शराबघर के अलावा?

शराबी के अलावा

कौन होगा सच्चा धर्मनिरपेक्ष

43

शराब ने मिटा दिये

राजशाही, रजवाडे़ और सामंत


शराब चाहती है दुनिया में

सच्चा लोकतंत्र

44

कुछ जी रहे हैं पीकर

कुछ बगैर पिये.

कुछ मर गये पीकर

कुछ बगैर पिये.

45

नहीं पीने में जो मजा है

वह पीने में नहीं

यह जाना हमने पीकर.

46

इंतजार में ही

पी गये चार प्याले

तुम आ जाते

तो क्या होता?

47

तुम नहीं आये

मैं डूब रहा हूं शराब में


तुम आ गये तो

शराब में रोशनी आ गयी.

48

तुम कहां हो

मैं शराब पीता हूं

तुम आ जाओ

मैं शराब पीता हूं.

49

तुम्हारे आने पर

मुझे बताया गया प्रेमी


तुम्हारे जाने के बाद

मुझे शराबी कहा गया.

50

देवताओ, जाओ

मुझे शराब पीने दो

अप्सराओ, जाओ

मुझे करने दो प्रेम.

51

प्रेम की तरह

शराब पीने का

नहीं होता कोई समय


यह समयातीत है.

52

शराब सेतु है

मनुष्य और कविता के बीच.

सेतु है शराब

श्रमिक और कुदाल के बीच.

53

सोचता है जुलाहा

काश!

करघे पर बुनी जा सकती शराब.

54

कुम्हार सोचता है

काश!

चाक पर रची जा सकती शराब.

55

सोचता है बढई

काश!

आरी से चीरी जा सकती शराब.

56

स्वप्न है शराब!

जहालत के विरुद्ध

गरीबी के विरुद्ध

शोषण के विरुद्ध

अन्याय के विरुद्ध

मुक्ति का स्वप्न है शराब!

57

कहीं भी पी जा सकती है शराब


खेतों में खलिहानों मे

क्षछार में या उपांत में

छत पर या सीढियों के झुटपुटे में

रेल के डिब्बे में

या फिर किसी लैंपपोस्ट की

झरती हुई रोशनी में


कहीं भी पी जा सकती है शराब.

58

कलवारी में पीने के बाद

मृत्यु और जीवन से परे

वह अविस्मरणीय नृत्य

‘ठगिनी क्यों नैना झमकावै’

कफन बेच कर अगर

घीसू और माधो नहीं पीते शराब

तो यह मनुष्यता वंचित रह जाती

एक कालजयी कृति से.

59

देवदास कैसे बनता देवदास

अगर शराब न होती.


तब पारो का क्या होता

क्या होता चंद्रमुखी का

क्या होता

रेलगाडी की तरह

थरथराती आत्मा का?

60

उन नीमबाज आंखों में

सारी मस्ती

किसकी सी होती

अगर शराब न होती!

आंखों में दम

किसके लिए होता

अगर न होता सागर-ओ-मीना?

61

अगर न होती शराब

वाइज का क्या होता

क्या होता शेख सहब का


किस कामा लगते धर्मोपदेशक?

62

पीने दे पीने दे

मस्जिद में बैठ कर

कलवारियां

और नालियां तो

खुदाओं से अटी पडी हैं.

63

‘न उनसे मिले न मय पी है’


‘ऐसे भी दिन आएंगे’


काल पडेगा मुल्क में

किसान करेंगे आत्महत्याएं

और खेत सूख जाएंगे.

64

‘घन घमंड नभ गरजत घोरा

प्रियाहीन मन डरपत मोरा’

ऐसी भयानक रात

पीता हूं शराब

पीता हूं शराब!

65

‘हमन को होशियारी क्या

हमन हैं इश्क मस्ताना’


डगमगाता है श़राबी

डगमगाती है कायनात!

66

‘अपनी सी कर दीनी रे

तो से नैना मिलाय के’

तोसे तोसे तोसे

नैना मिलाय के

‘चल खुसरो घर आपने

रैन भई चहुं देस’

67

‘गोरी सोई सेज पर

मुख पर डारे केस’


‘उदासी बाल खोले सो रही है’


अब बारह का बजर पडा है

मेरा दिल तो कांप उठा है.


जैसे तैसे जिंदा हूं

सच बतलाना तू कैसा है.


सबने लिक्खे माफीनामे.

हमने तेरा नाम लिखा है.

68

‘वो हाथ सो गये हैं

सिरहाने धरे धरे’

अरे उठ अरे चल

शराबी थामता है दूसरे शराबी को.

69

‘आये थे हंसते खेलते’


‘यह अंतिम बेहोशी

अंतिम साकी

अंतिम प्याला है’


मार्च के फुटपाथों पर

पत्ते फडफडा रहे हैं

पेडों से झड रही है

एक स्त्री के सुबकने की आवाज.

70

‘दो अंखियां मत खाइयो

पिया मिलन की आस’

आस उजडती नहीं है

उजडती नहीं है आस

बडबडाता है शराबी.

71

कितना पानी बह गया

नदियों में

‘तो फिर लहू क्या है?’


लहू में घुलती है शराब

जैसे शराब घुलती है शराब में.

72

‘धिक् जीवन

सहता ही आया विरोध’

‘कन्ये मैं पिता निरर्थक था’

तरल गरल बाबा ने कहा

‘कई दिनों तक चूल्हा रोया

चक्की रही उदास’

शराबी को याद आयी कविता

कई दिनों के बाद

73

राजकमल बढ़ाते हैं चिलम

उग्र थाम लेते हैं.


मणिकर्णिका घाट पर

रात के तीसरे पहर

भुवनेश्वर गुफ्तगू करते हैं मजाज से.


मुक्तिबोध सुलगाते हैं बीडी

एक शराबी

मांगता है उनसे माचिस.


‘डासत ही गयी बीत निशा सब’.

74

‘मौसे छल

किए जाय हाय रे हाय

हाय रे हाय’

‘चलो सुहाना भरम तो टूटा’

अबे चल

लकडी के बुरादे

घर चल!

सडक का हुस्न है शराबी!

75

‘सब आदमी बराबर हैं

यह बात कही होगी

किसी सस्ते शराबघर में

एक बदसूरत शराबी ने

किसी सुंदर शराबी को देख कर.’


यह कार्ल मार्क्स के जन्म के

बहुत पहले की बात होगी!

76

मगध में होगी

विचारों की कमी

शराबघर तो विचारों से अटे पडे हैं.

77

शराबघर ही होगी शायद

आलोचना की

जन्मभूमि!


पहला आलोचक कोई शराबी रहा होगा!

78

रूप और अंतर्वस्तु

शिल्प और कथ्य

प्याला और शराब

विलग होते ही

बिखर जाएगी कलाकृति!

79

तुझे हम वली समझते

अगर न पीते शराब.


मनुष्य बने रहने के लिए ही

पी जाती है शराब!

80

‘होगा किसी दीवार के

साये के तले मीर’

अभी नहीं गिरेगी यह दीवार

तुम उसकी ओट में जाकर

एक स्त्री को चूम सकते हो

शराबी दीवार को चूम रहा है

चांदनी रात में भीगता हुआ.

81

‘घुटुकन चलत

रेणु तनु मंडित’


रेत पर लोट रहा है रेगिस्तान का शराबी


‘रेत है रेत बिखर जाएगी’


किधर जाएगी

रात की यह आखिरी बस?

82

भंग की बूटी

गांजे की कली

खप्पर की शराब

कासी तीन लोक से न्यारी

और शराबी

तीन लोक का वासी!

83

लैंप पोस्ट से झरती है रोशनी

हारमोनियम से धूल


और शराबी से झरता है

अवसाद.

84

टेलीविजन के परदे पर

बाहुबलियों की खबरें सुनाती हैं

बाहुबलाएं!

टकटकी लगाये देखता है शराबी

विडंबना का यह विलक्षण रूपक

भंते! एक प्याला और.

85

गंगा के किनारे

उल्टी पड़ी नाव पर लेटा शराबी

कौतुक से देखता है

महात्मा गांधी सेतु को


ऐसे भी लोग हैं दुनिया में

‘जो नदी को स्पर्श किये बगैर

करते हैं नदियों को पार’

और उछाल कर सिक्का

नदियों को खरीदने की कोशिश करते हैं!

86

तानाशाह डरता है

शराबियों से

तानाशाह डरता है

कवियों से

वह डरता है बच्चों से नदियों से

एक तिनका भी डराता है उसे

प्यालों की खनखनाहट भर से

कांप जाता है तानाशाह.

87

क्या मैं ईश्वर से

बात कर सकता हूं


शराबी मिलाता है नंबर

अंधेरे में टिमटिमाती है रोशनी


अभी आप कतार में हैं

कृपया थोडी देर बाद डायल करें.

88

‘एहि ठैयां मोतिया

हिरायल हो रामा…’

इसी जगह टपका था लहू

इसी जगह बरसेगी शराब

इसी जगह

सृष्टि का सर्वाधिक उत्तेजक ठुमका

सर्वाधिक मार्मिक कजरी

इसी जगह इसी जगह

89

‘अंतर्राष्ट्रीय सिर्फ

हवाई जहाज होते हैं

कलाकार की जडें होती हैं’


और उन जडों को

सींचना पड़ता है शराब से!

90

जिस पेड़ के नीचे बैठ कर

ऋत्विक घटक

कुरते की जेब से निकालते हैं अद्-धा

वहीं बन जाता है अड्डा

वहीं हो जाता है

बोधिवृक्ष!

91

सबसे बडा अफसानानिगार

सबसे बड़ा शाइर

सबसे बड़ा चित्रकार

औरा सबसे बड़ा सिनेमाकार


अभी भी जुटते हैं

कभी कभी

किसी उजडे़ हुए शराबघर में!

92

हमें भी लटका दिया जाएगा

किसी रोज फांसी के तख्ते पर

धकेल दिया जाएगा

सलाखों के पीछे

हमारी भी फाकामस्ती

रंग लाएगी एक दिन!

93

(मंटो की स्मृति में)


कब्रगाह में सोया है शराबी

सोचता हुआ


वह बड़ा शराबी है

या खुदा!

94

ऐसी ही होती है मृत्यु

जैसे उतरता है नशा

ऐसा ही होता है जीवन

जैसे चढती है शराब.

95

‘हां, मैंने दिया है दिल

इस सारे किस्से में

ये चांद भी है शामिल.’


आंखों में रहे सपना

मैं रात को आऊंगा

दरवाजा खुला रखना.


चांदनी में चिनाब

होठों पर माहिए

हाथों में शराब

और क्या चाहिए!

96

रिक्शों पर प्यार था

गाड़ियों में व्यभिचार

जितनी बड़ी गाडी थी

उतना बड़ा था व्यभिचार

रात में घर लौटता शराबी

खंडित करता है एक विखंडित वाक्य

वलय में खोजता हुआ लय.

97

घर टूट गया

रीत गया प्याला

धूसर गंगा के किनारे

प्रस्फुटित हुआ अग्नि का पुष्प

सांझ के अवसान में हुआ

देह का अवसान


धरती से कम हो गया एक शराबी!

98

निपट भोर में

‘किसी सूतक का वस्त्र पहने’

वह युवा शराबी

कल के दाह संस्कार की

राख कुरेद रहा है

क्या मिलेगा उसे

टूटा हुआ प्याला फेंका हुआ सिक्का

या पहले तोड़ की अजस्र धार!

आखिर जुस्तजू क्या है?

साभार- कृष्ण कल्पित रचित ‘एक शराबी की सूक्तियां’ से
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0 Comments

  1. yogesh kumar

    January 27, 2010 at 1:40 pm

    great sir. really realllly gr888888888. wishes, congrates to mr. Krishna Kalpit.

  2. sankrit mukesh

    January 28, 2010 at 5:58 am

    bat shi hai

  3. M. Krishna

    January 29, 2010 at 7:32 am

    Yashwant ji Krishna kalpit ki jis rachna per aap itne mugdh hai—- Shahityajagat karib do saal pahle uska Raspan kar chuka hai. Likhna Hai to Is per Hui Lambandi aur Rachna ko Kharij karne ke chhadm prayaso par Likho Nai cheej Nikalkar Aayegi. Khair—- Itna to manna hi parega ki Der Aayad Durust Aayad! Mubarak ho Aap Ab sachche Sharabi ban Gaye ho.

  4. govind mathur

    February 5, 2010 at 1:14 pm

    Ek sharabi ki suktiyan main pahle bhi padh chuka hun. suktiyan adbhut hai.

  5. govind mathur

    February 5, 2010 at 1:17 pm

    Ek sharabi ki suktiyan adbhut hai. Main ye suktiyan pahle bhi kai bar padh chuka hun.

  6. chetan anand

    February 9, 2010 at 10:55 am

    achha prayog hai, bvadi doobkar liki hain sharaab suktiyan

  7. अनिता भारती

    December 21, 2010 at 8:46 am

    बहुत ही बढिया

  8. anita bharti

    December 21, 2010 at 8:48 am

    bahut badiya

  9. दलित महिला

    December 31, 2013 at 2:37 am

    अनीता भारती को भी बढ़िया लगा यह. बड़ी मक्कार महिला लगती हैं यह. फेसबुक पर तो दारुविरोधी अभियान चलाये रहती हैं.

  10. radheyshyam singh

    December 31, 2013 at 4:25 pm

    Sharab ke bahane hindi-urdu kavita ki yatra bhi sampann hui.

  11. radheyshyam singh

    December 31, 2013 at 4:33 pm

    Sh.arab ke saath kavita yatra.sundar.

  12. radheyshyam singh

    December 31, 2013 at 4:33 pm

    Sh.arab ke saath kavita yatra.sundar.

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