यशवंत जी, छत्तीसगढ़ के पहले इलेक्ट्रानिक मीडिया संघ का गठन हो गया और राज्य के इलेक्ट्रानिक मीडिया में वर्षों से काम कर रहे लोगों को कानो-कान तक खबर नहीं लगी। राजधानी में बैठे पत्रकारों की बात छोड़ भी दें तो इस तथाकथित संघ का जहां मुख्यालय है, वहां भी इलेक्ट्रानिक मीडिया में काम करनेवाले लोगों को इस संघ के बारे में कोई जानकारी नहीं है। वो तो भला हो आपका जो आपने इलेक्ट्रानिक मीडिया के इन दो नामों से न केवल हमें अवगत कराया बल्कि उनका नंबर देकर उनसे बात करने का अवसर भी प्रदान किया।
आप मंच प्रदान करते हैं, जनसंचारकर्मी होने के नाते यह आपका पहला दायित्व भी है लेकिन कई बार मंच का दुरुपयोग भी हो जाता है। राज्य के प्रमुख टेलीविजन चैनलों के साथ समाचार प्रमुख की जिम्मेदारी निभाते हुए मैंने करीब आठ साल इलेक्ट्रानिक मीडिया में खर्च किए हैं। लिहाजा राज्य के इलेक्ट्रानिक मीडियाकर्मियों के साथ मेरा व्यक्तिगत और प्रोफेशनल रिश्ता है। बहुत हद तक मैं उनके सुख-दुख के साथ भी अपने आप को जुड़ा महसूस करता हूं। मुझे दुख हुआ जब मैंने इलेक्ट्रानिक मीडिया संघ के लोगों के बारे में जानकारी ली और मुझे यह पता चला कि संघ के एक प्रमुख व्यक्ति पर कुछ साल पूर्व एसपी बनकर कुछ लोगों को ठगने का आरोप है और बकायदा यह मामला पुलिस थाने में भी दर्ज है। आरोप में कितनी सच्चाई है यह पुलिस के जांच का विषय है और पुलिस ने इसकी जांच भी की होगी, लेकिन इलेक्ट्रानिक मीडियाकर्मियों के हितो की रक्षा करनेवाले प्रमुख लोगों को मैंने कभी भी इलेक्ट्रानिक मीडिया में काम करते नही देखा।
मुझे इस बात की शंका है कि उन्हें इलेक्ट्रानिक मीडियाकर्मियों को फील्ड में आनेवाली दिक्कतों की भी पूरी जानकारी होगी। संघ के साथियों से मेरा विनम्र आग्रह है कि संघ को छत्तीसगढ़ की इलेक्ट्रानिक मीडिया बिरादरी का अगुआ बताने से पहले इलेक्ट्रानिक मीडिया कर्मियों और उनकी समस्याओं को जानने, समझने और लोगों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश करें। अच्छा होता यदि संघ पहले कुछ अच्छा काम करता, बजाए, छत्तीसगढ़ के इलेक्ट्रानिक मीडिया बिरादरी के अगुआ बनने के। बेहतर होगा कि संघ के लोग यह भी सुनिश्चित कर दें कि इलेक्ट्रानिक मीडिया संगठन के नाम पर कोई वसूली नही होगी और ना ही संघ का कोई पदाधिकारी संघ का धौंस देकर किसी को धमकाएगा, क्योंकि इससे पहले बने इलेक्ट्रानिक मीडिया संगठन ने कुछ ऐसा ही करके इलेक्ट्रानिक मीडियाकर्मियों को दुखी किया है। वैसे भी मैंने महसूस किया है कि छत्तीसगढ़ की माटी कुछ ऐसी है जिसमें विपदा आने पर सभी लोग एकजुटता के साथ खड़े दिखाई पड़ते है। बिना किसी संगठन के भी मजबूत संगठनात्मक क्षमता ज्यादा मजबूती के साथ।











