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भ्रष्टाचार में लिपटी है पत्रकारिता की ‘क्रीम’

हरियाणा के रेवाड़ी जिले में अभी-अभी अखबार के ब्यूरो चीफ नरेंद्र वत्स ने अपने पत्रकार साथियों की पोल खोलनी शुरू कर दी है। अपने जिले की पत्रकारीय गंदगी की सफाई का बीड़ा उठाए नरेंद्र और उनके अखबार को इस साहस के लिए बधाई देना चाहिए। नरेंद्र वत्स ने पत्रकारिता से संबंधित जितनी भी खबरें ‘अभी-अभी’ में लिखी हैं, उनका प्रकाशन बी4एम पर किया जाएगा ताकि यही अलख दूसरों जिलों में दूसरे पत्रकार साथी भी जगा सकें। -एडिटर, बी4एम

हरियाणा के रेवाड़ी जिले में अभी-अभी अखबार के ब्यूरो चीफ नरेंद्र वत्स ने अपने पत्रकार साथियों की पोल खोलनी शुरू कर दी है। अपने जिले की पत्रकारीय गंदगी की सफाई का बीड़ा उठाए नरेंद्र और उनके अखबार को इस साहस के लिए बधाई देना चाहिए। नरेंद्र वत्स ने पत्रकारिता से संबंधित जितनी भी खबरें ‘अभी-अभी’ में लिखी हैं, उनका प्रकाशन बी4एम पर किया जाएगा ताकि यही अलख दूसरों जिलों में दूसरे पत्रकार साथी भी जगा सकें। -एडिटर, बी4एम


 भ्रष्टाचार में लिपटी है पत्रकारिता की ‘क्रीम’

 पत्रकारिता की आड़ में धंधा चमकाने वालों ने की पहचान पत्र बनाने की मांग

अभी-अभी : खास खबर

नरेंद्र वत्स

रेवाड़ी, 5 जून। पत्रकारिता की आड़ में लाखों रुपये की संपत्ति बनाने वाले लोगों के खिलाफ ‘अभी-अभी’ की मुहिम रंग दिखाने लगी है। लीक से हटकर अब ऐसे पत्रकारों ने एसपी से गुहार लगाई है कि वे उनके पहचान पत्र तैयार कराएं ताकि इन पहचान पत्रों की बदौलत वे अपने धंधे को निर्बाध रूप से चला सकें। इस गुहार में वे लोग ही शामिल हैं, जिन्होंने एसपी राजेंद्र सिंह गहलोत के खिलाफ आंदोलन छेड़कर फैसला करने की रणनीति को अंजाम दिया था। अगर एसपी इन लोगों के काले कारनामे उजागर करने की हिम्मत जुटा पाए, तो उन्हें खुद-ब-खुद हकीकत का पता चल जाएगा।

खुद को पत्रकारिता की क्रीम बताने वाले करीब आधा दर्जन पत्रकार ऐसे हैं, जो सीधे-सीधे पत्रकारिता की आड़ में ब्लैकमेलिंग कर रहे हैं। इसी ब्लैकमेलिंग का खुलासा होने के बाद एक ऐसे ही पत्रकार को राष्ट्रीय समाचार पत्र ने जब निकालकर बाहर फेंक दिया तो उसने एक प्रदेश स्तरीय अखबार का दामन थाम लिया। बावल के एक अधिकारी ने इस पत्रकार पर ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाया था। गैस एजेंसी पर थ्री व्हीलर लगाकर मोहल्ले के लोगों को ब्लैक में सिलेंडर बेचने में माहिर रहा है। इस पत्रकार के बारे में यह जानकारी भी मिली है कि इसने सर्वाधिक दबाव खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों पर बनाया। खबरें प्रकाशित करने की धमकी देने के नाम पर प्रति माह दो सौ रुपये तक की वसूली की। भ्रष्टाचारियों की फौज में दूसरा नाम एक राष्ट्रीय समाचार पत्र के पत्रकार का है जो पत्रकारिता की आड़ में अपनी पत्नी के नाम पर बीमा पालिसी करता रहा है। अगर मामला यहीं तक रहता तो ठीक था, लेकिन मामला यहां तक पहुंचा दिया गया कि इस पत्रकार ने पैसे लेने के बावजूद लोगों को बीमा पालिसी के कागजात उपलब्ध नहीं कराए। बीमा कंपनी ने नोटिस मिलने के बाद इस मामले की जांच शुरू कर दी है। दूसरी ओर, समाचार पत्र के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए उसका पत्ता साफ करने का निर्णय ले लिया है। इस कड़ी में तीसरा नाम एक फर्जी वैद्य और चौथा नाम एक शेयर दलाल का आ रहा है। इन लोगों के भ्रष्टाचार की परतें लगातार खुली जा रही हैं। सरकारी विभागों में सूचना के अधिकार के नाम पर जानकारी मांगने और जानकारी मिलने के बाद कर्मचारियों को ब्लैकमेल करने में माहिर एक पत्रकार का नाम भी इसी कड़ी में शामिल है। ‘अभी-अभी’ ने अब अपनी मुहिम तेज करते हुए सूचना के अधिकार के तहत हुडा के ठेकों और इनलैंड के कंटेनर डिपो में चलने वाली लिफ्टिंग मशीनों के बारे में जानकारी एकत्रित करना शुरू कर दिया है, ताकि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को चंद रुपयों के लिए लालच में बदनाम करने वाले लोगों को जनता के सामने बेनकाब किया जा सके। पूरे प्रमाण एकत्रित करने के साथ ही पत्र इन भ्रष्टाचारियों को उनके नाम और पते के साथ जनता की अदालत में पेश करने की रणनीति तैयार कर चुका है। साथ ही यह भी बताया जाएगा कि जिस समय ऐसे लोगों ने पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रवेश किया तो उनकी आर्थिक स्थिति क्या थी और पत्रकार बनने के बाद उनकी आर्थिक स्थिति क्या है। ऐसे कई भ्रष्ट पत्रकारों की काली करतूतों को हर हाल में उजागर किया जाएगा, ताकि समाजसेवा की आड़ में समाज के लोगों को चूना लगाने वाले ब्लैकमेलरों को जनता भरे बाजार पीटने का साहस जुटा सके। कुछ अधिकारियों ने तो ऐसे भ्रष्ट लोगों की वीडियो रिकार्डिंग तक उपलब्ध कराने की बात कही है। चारों तरफ से बुरी तरह घिर चुके इन लोगों ने एक बार फिर एसपी राजेंद्र सिंह को गुमराह करते हुए फरियाद लगाई है कि वे उन्हें पुलिस विभाग की ओर से परिचय पत्र बनाकर दें, ताकि पुलिस उनके काले कारनामों पर हाथ डालने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। दिलचस्प बात यह है कि इन पत्रकारों को उनके पत्र की ओर से बाकायद परिचय पत्र उपलब्ध कराए गए हैं, लेकिन इन्हें इन परिचय पत्रों पर ज्यादा भरोसा नहीं है। इन लोगों को शायद पुलिस कप्तान के उस लाइसेंस की जरूरत है, जिसके बल पर वे अपनी ठगी की दुकान को लगातार चलाते रहें।

सूत्रों ने बताया कि काले कारनामे दबाए रखने के लिए इन लोगों ने अपने कुछ गुर्गों के फोटो एकत्रित करने का काम भी शुरू कर दिया है, ताकि उन्हें भी भ्रष्टाचार का लाइसेंस दिलाया जा सके। प्रेस विज्ञप्ति छापने के नाम पर सौ से दो सौ रुपये की वसूली करने या फिर धंधा चमकाने के लिए लोगों को पैसा देने पर मजबूर करने वाले इन पत्रकारों की दुकान अब ज्यादा दिन तक चल पाएगी, ऐसा नहीं लग रहा। वास्तविकता तो यह है कि खुद को क्रीम बताकर अधिकारियों के सामने पेश करने वाले ये लोग हमाम में पूरी तरह नंगे हैं। अभी-अभी ने इन लोगों का असली चेहरा जनता के बीच उजागर करने का निर्णय लिया है। लोगों के सामने जल्द ही ये चेहरे पूरी तरह बेनकाब किए जाएंगे, चाहे इसके लिए कोई भी कुर्बानी देनी पड़े।

….तो लोग हमें चाराहौं पर पीटेंगे : ”यह बात अगर आम लोगों के सामने पहुंच गई तो लोग हमें देखकर सरेआम चौराहें पर पीटेंगे। यह बात सही है कि हम हमाम में नंगे हैं, लेकिन आम लोगों को यह सब बताने से पत्रकारिता की गरिमा खत्म हो जाएगी।” यह गुहार है एक ऐसे पत्रकार की जो पत्रकारिता की आड़ में लगातार लोगों को ब्लैकमेलिंग का शिकार बनाता रहा है। अभी-अभी के समक्ष गुहार लगाते हुए इस पत्रकार ने आग्रह किया कि अब इस सिलसिले को रोक दिया जाना चाहिए। हर आदमी को अगर हमारी औकात का पता चला, तो लोग हमें देखकर बीच चौराहे पर पीटना शुरू कर देंगे।


इससे पहले का पार्ट पढ़ने के लिए क्लिक करें- पत्रकारों की करतूत पर अखबार में स्टोरी
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