‘गांधी को मरा रहने दो, यही सबसे अच्छा होगा’

[caption id="attachment_18569" align="alignleft" width="142"]लक्ष्मी चंद जैनलक्ष्मी चंद जैन[/caption]: लक्ष्मी चन्द जैन : एक साक्षात्कार : भारत वर्ष में आर्थिक नियोजन के पिछले पचास वर्षों पर गौर करते हुए लक्ष्मी चन्द जैन बताते हैं- ”हमारी प्रमुख समस्या नौकरशाही पर निर्भरता है। गांधी यह भली भांति समझते थे कि जनता की भागीदारी के बिना कोई काम नहीं किया जाना चाहिए तथा जनता की भागीदारी के बिना कोई काम सफल भी नहीं हो सकता – हम यह बुनियादी बात भूल गये।” देश के विकास के लिए होने वाले प्रयासों से गत पचास वर्षों से योजनाकार, विश्लेषक तथा बाद में शिक्षक तथा निर्माता के रूप में जुड़े लक्ष्मी चन्द जैन यह शिद्दत से महसूस करते हैं कि गांधी आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितना वे अपने जीवन-काल में थे।

एक गैर जिम्मेदार जिलाधिकारी का बयान

: ‘क्या मेरे निमन्त्रण पर पटरी व्यवसाई  नगर में आए थे?’ : पिछले महीने की 23 तारीख को भुट्टो ने कुछ अधिक राशन इकट्ठा कर रखा था। सौभाग्य से शहर में कर्फ़्यू तो नहीं लगा। लेकिन भुट्टो के परिवार को तब से अब तक उस राशन को खा कर ही गुजारा करना पड़ा है। उसकी तथा उसके जैसे 250 लोगों की दुकानें तब से अब तक नहीं लगी हैं। इनमें से अधिकांश परिवारों में आज से फाकाकशी की शुरुआत होने जा रही है। भुट्टो रजाई-गद्दा बना कर बेचता है।