जंतर मंतर डायरी – पांच

: अन्ना, जेएस वर्मा की यही ईमानदारी है! : पिछले पांच अप्रैल से दिल्ली के जंतर-मंतर पर आमरण अनशन कर रहे अन्ना हजारे की ओर से जन लोकपाल बिल को लेकर कुछ सुझाव आये हैं। उन सुझावों को कल शाम मीडिया से साझा करते हुए आंदोलन के मुख्य सहयोगी अरविंद केजरिवाल ने बताया कि ‘अन्ना चाहते हैं, जन लोकपाल के मसौदा समिति का अध्यक्ष सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायधीश जेएस वर्मा या सर्वोच्च न्यायालय के न्यायधीश रह चुके संतोष  हेगड़े को बनाया जाये।’

जंतर मंतर डायरी – चार

किशन बाबूराव ऊर्फ अण्णा हजारे के आमरण अनशन का गुरुवार को तीसरा दिन था. उन्हें समर्थन देने वालों का जमावड़ा लगा रहा. इनमें चलचित्र जगत के कई नाम शामिल थे. जंतर-मंतर पर पिछले तीन दिन से मोमबत्ती ब्रिगेड सक्रिय है. जगह-जगह मोमबत्तियां जलाई जा रही हैं. इस दृश्य को अपने कैमरे में कैद करने के लिए टीवी वाले सक्रिय हैं. शॉट को और सजीव और जीवंत बनाने के लिए वे मोमबत्तियां और झंडे बांटते नजर आए. एक अदद बेहतर विजुअल का सवाल था.

जंतर मंतर डायरी – तीन

दिल्ली में एक जगह है जंतर-मंतर। वहां तीन दिन से अन्ना हजारे धरना दे रहे हैं। उनके धरने को देखने बहुत लोग लगातार जा रहे हैं। वहां से लौट रहे लोग बता रहे हैं कि अन्ना हजारे के जज्बात देखने लायक हैं। 78 वर्ष की उम्र में उन्होंने महाराष्ट्र से दिल्ली आकर जो काम कर दिखाया है, वह कोई नहीं कर सका है। लोग यह भी कह रहे हैं कि उन्होंने एक ऐसा अनशन किया है जो देश में भ्रष्टाचार खत्म करने के बाद ही खत्म होगा। जोशीले  लोग इसी बात को ‘दूसरे गांधी का दूसरा स्वतंत्रता आंदोलन’ के रूप में समझाने की कोशिश कर रहे हैं।

जंतर मंतर डायरी – दो

किशन बाबूराव हजारे ऊर्फ अण्णा हजारे मंगलवार से दिल्ली के जंतर-मंतर पर बैठे हैं. वे कुछ खा -पी नहीं रहे हैं. उनकी मांग है कि सरकार जन लोकपाल विधेयक को पास करे. उन्होंने घोषणा की है कि अगर सरकार जन लोकपाल विधेयक को पास नहीं करेगी तो वे यहीं बैठे-बैठे जान दे देंगे. उनके समर्थन में वहाँ 169 अन्य लोगों ने भी आमरण  अनशन  कर लिया है. मीडिया में लगातार खबरे आ रहीं हैं कि अण्णा के समर्थन में देश के अन्य शहरों में भी बड़ी संख्या में लोगों ने खाना-पीना छोड़ दिया है.

जंतर मंतर डायरी – एक

अजय प्रकाश: भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्नावतार : ये अन्ना के आमरण अनशन की पहली सुबह थी. कल से लगातार खट रहे कैमरे खामोश थे और मीडिया वाले ऊंघ रहे थे. कुछ चाय की चुस्कियों से अपनी थकान मिटाने की कोशिश कर रहे थे. तो कुछ चहलकदमी करके पैरो में सिमट आई एकरसता तोड़ रहे थे. सूरज आसमान में चढ़ रहा था और जिंदगी फुटपाथ पर उतरने लगी थी. अन्ना के समर्थन में लगे नारों -पोस्टरों को देख लोगबाग पूछे जा रहे थे, जन लोकपाल बिल क्या होता है.

सभ्य मोहल्ला और एक बदचलन की मौत

अजय प्रकाश: वह तो मुसलमान ही था जो इन बच्चों का पेट पाल रहा था, इससे पहले पंजाबी से भी इसीलिए शादी की क्योंकि बिहारी कुछ करता ही नहीं था, सिवाय बच्चा पैदा करने के… : परसों की बात है। दिन के करीब दस बज रहे थे। दुबारा लौट आयी ठंड के बाद मेरी हिम्मत ठंडे पानी से नहाने की नहीं हुई तो सोचा क्यों न धूप में खड़े होकर थोड़ा गरम हो लिया जाये। धूप की गरमी से अगर हिम्मत बंध गयी तो नहा लूंगा, नहीं तो कंपनियों ने महकने का इंतजाम तो कर ही रखा है।

आंदोलन के ‘प्याज’ और जनयुद्ध की शुरुआत

अजयमहात्मा गांधी के पुण्यतिथि 30 जनवरी को देश के तमाम हिस्सों में भ्रष्टाचार विरोधी रैली का आयोजन किया गया। इसी अवसर पर दिल्ली के लालकिला से शहीद भगत सिंह पार्क तक माओवादियों के सहयोगी होने के आरोप में बंद डॉक्टर बिनायक सेन के रिहाई के समर्थन में एक संक्षिप्त रैली भी निकाली गयी। भ्रष्टाचार के विरोधियों की रैली में भ्रष्टाचार के खिलाफ जनयुद्ध के शुरुआत की घोषणा हुई, तो वहीं बिनायक समर्थकों ने सरकारी हिंसा के मुकाबले अहिंसा की ताकत के पक्ष में क्रांतिकारी गीतों और भाषणों का आयोजन किया।

‘एडिटोरियल पेज’ के प्रभारी के लिए यूं हुआ इंटरव्यू

अख़बार के दफ्तर से फ़ोन आया कि आपके भेजे गए आवेदन को स्वीकार कर लिया गया है. सुनकर प्रसन्नता हुई और मैं अगले दिन दफ्तर पहुंच गया. पहुंचते ही मुझे एक बंद कमरे में भेज दिया गया जहां तीन लोग विराजमान थे. सेकंडों  की नमस्कार-बंदगी के बाद सवालों का दौर शुरू हुआ.