फोर्स लीव से वापस लौटे अजीज बर्नी

सहारा मीडिया में अजीज बर्नी की वापसी हो गई है. वे काफी दिनों से फोर्स लीव पर चल रहे थे. सहारा उर्दू के ग्रुप एडिटर अजीज बर्नी अपनी किताब के कारण विवादों में आए. फोर्स लीव के दौरान ही उन्होंने अपनी गलती का एहसास करते हुए माफी मांगी और उनका माफीनामा राष्ट्रीय सहारा अखबार के पहले पन्ने पर दो कालम में प्रकाशित हुआ. बावजूद इसके, कुछ लोग यह कयास लगा रहे थे कि अजीज बर्नी की सहारा में अब वापसी संभव नहीं है लेकिन आज इस वक्त अजीज बर्नी सहारा मीडिया के नोएडा स्थित कैंपस में अपने सहयोगियों के साथ बैठक कर रहे हैं.

मैंने किसी जोशी-पोशी को पत्र नहीं लिखा : बर्नी

यशवंत भाई, आई हैव नाट रिटेन लेटर टू एनी जोशी-पोशी. इट इज ए पार्ट आफ साइबर वार अगेंस्ट मी. नो मैटर. दे मस्ट नो मैं वो पत्रकार हूं जिसकी एक किताब ने देश की राजनीति का एजेंडा बदल दिया. मैंने लिखा इराक पर, बुश को माफी मांगनी पड़ी. मैंने लिखा कल्याण पर, उन्हें सपा से जाना पड़ा. मैंने लिखा आतंक पर, आतंक का छुपा चेहरा सामने आ गया. असीमानंद का कनफेस, उपाध्याय पर मिलिट्री इंटेलीजेंस की रिपोर्ट, इशरत जहां केस पर सतीश वर्मा का बयान…

अजीज बर्नी का एक और माफीनामा

: फिर भी कोई गारंटी नहीं कि नौकरी बच ही जाएगी : अजीज बर्नी इन दिनों खबर में हैं. आज जनसत्ता अखबार में भी फ्रंट पेज पर अजीज बर्नी से संबंधित दो कालम की स्टोरी छपी है. इसके पहले कई जगहों पर अजीज बर्नी के खिलाफ खबरें छपती रही हैं. खासकर अपनी किताब को लेकर अजीज बर्नी बुरी तरह फंसे हैं जिसमें उन्होंने मुंबई पर आतंकी हमले में आरएसएस का हाथ होने का शक जताया था. उधर कहने वाले खुद अजीज बर्नी की आतंकी हमले में मिलीभगत बता रहे हैं क्योंकि आतंकी हमले के दिन बर्नी पाकिस्तान में थे.

अजीज बर्नी ने देशवासियों से माफी मांगी

:‘आरएसएस की साजिश 26/11’ पुस्तक के संदर्भ में : ‘26/11 भारत के इतिहास का सबसे बड़ा हमला’ किस्तवार लेखों में मैंने अपने जिस लेख का हवाला दिया है, वह पुस्तक की रिलीज के बाद लिखा गया था। जिसका शीर्षक था-‘हाफिज सईद हमारा अपराधी है, उसे हमारे हवाले करो’। 17 दिसंबर 2010 के रोजनामा राष्ट्रीय सहारा में प्रकाशित इस लेख से ना तो मैं 26/11 के आंतकवादी हमले को आरएसएस से जोड़ रहा हूं, ना भारत का पक्ष कमजोर कर रहा हूं।

लंबी छुट्टी से लौटकर आफिस आ सकेंगे बर्नी साहब?

: क्या कभी लौट पाएंगे अजीज बर्नी के अच्छे दिन : सहारा मीडिया में एक बड़ी तेज चर्चा है. वो ये कि अजीज बर्नी के दिन गए. अब उनके नीके दिन, अच्छे दिन न लौटेंगे. सहारा मीडिया के उर्दू अखबारों-मैग्जीनों के ग्रुप एडिटर के रूप में कार्यरत अजीज बर्नी के बुरे दिन उपेंद्र राय के न्यूज डायरेक्टर बनने के बाद शुरू हुए. ताजी सूचना है कि उन्हें लंबी छुट्टी पर जाने को कह दिया गया है.

अजीज बर्नी ने ब्लागर को भेजा लीगल नोटिस

अजीज बोले- जांच में अधिक संपत्ति मिले तो दान में ले जाएं : सहारा मीडिया के उर्दू वेंचर के ग्रुप एडिटर अजीज बर्नी के पीछे कुछ लोग हाथ धोकर पड़े हैं. ताजा मामला ये है कि अजीज बर्नी को आय से अधिक संपत्ति में कुछ अज्ञात लोग बिना आधार, बिना प्रमाण घसीट रहे हैं. मुंबई के कोई जीवन वाधवानी हैं जो खुद को इंडिया सेकुलर फाउंडेशन का कनवीनर बताते हैं. इन्होंने अपने ब्लाग मीडिया मानीटर पर प्रकाशित एक पोस्ट में दावा किया है कि भारत विरोधी व पाक समर्थक लेख लिखने से कोर्ट केस झेल रहे अजीज बर्नी के पास अथाह संपत्ति है.