साहित्य वह द्रौपदी शराब भी हो सकती थी, सफलता भी, लड़की भी हो सकती थी, पैसा भी… : उपन्यास - लोक कवि अब गाते नहीं (एक) : ‘तोहरे बर्फी ले मीठ मोर लबाही मितवा!’ गाते-बजाते लोक कवि अपने गांव से एक... bhadas4media.comJanuary 31, 2011
कहिन बिरहा भवन से लौट कर : देख नयन भरि आइल सजनी आज ही बिरहा भवन से लौटा हूं. शोक, कोहरा और धुंध में लिपटा बिरहा भवन छोड़ कर लौटा हूं. शीत में नहाता हुआ. बिरहा... bhadas4media.comJanuary 24, 2011
दुख-दर्द चले गए बालेश्वर [caption id="attachment_19156" align="alignleft" width="107"]स्वर्गीय बालेश्वर[/caption]: स्मृति-शेष : सुधि बिसरवले बा हमार पिया निरमोहिया बनि के : अवधी की धरती पर भोजपुरी में झंडा गाड़... bhadas4media.comJanuary 9, 2011