संजय की गायकी और भड़ास का नया प्रयोग

पत्रकारिता के कंधों पर कितनी बड़ी जिम्मेदारी होती है, पत्रकार की संवेदना कितनी व्यापक व उदात्त होती है, इसे समझने वालों की संख्या दिन ब दिन कम होती जा रही है. अच्छी बात है कि कई पत्रकार अपनी सीमाओं और अपने जीवन संघर्षों के बावजूद वृहद मानवीय सरोकारों को जी रहे हैं, पत्रकारिता के धर्म व पत्रकार के दायित्व के पैमाने पर 24 कैरेट सोने की तरह खरे उतर रहे हैं. उन्हीं में से एक संजय तिवारी हैं. इलाहाबाद के एक गांव के एक गरीब परिवार से निकले संजय इलाहाबाद विश्वविद्यालय की पढ़ाई मुश्किल से कर सके. आर्थिक दिक्कतों ने न तब पीछा छोड़ा था न अब. तब पढ़ने की दिक्कत थी, अब अपनी सोच व समझ के हिसाब से जीवन जीने का संकट है. विस्फोट डाट काम के जरिए हिंदी वेब पत्रकारिता में एक मुकाम हासिल किया है संजय ने.