उन्होंने पाकिस्तान के खूंखार जनरल जिया उल हक से पंगा लेने की तमीज सिखाई थी

[caption id="attachment_18322" align="alignleft" width="103"]भाई मंसूरभाई मंसूर[/caption]: भाई मंसूर की याद : इस साल भी उनका जन्मदिन मनेगा लेकिन वो न होंगे : कई लोगों ने कई वर्षों तक नहीं माना कि जवाहर लाल नेहरू भी पाखाने जाते होंगे : भाई मंसूर को विदा हुए धीरे धीरे छः महीने हो गए. इतने महीनों में कई बार उनका जिक्र हुआ लेकिन कोई यह मानने को तैयार नहीं है कि भाई मंसूर को जाना चाहिए था. बताते हैं कि भाई मंसूर आख़िरी वक़्त तक अपनी आदत से बाज़ नहीं आये थे. वे अपने चाहने वालों को खुश रखने के लिए कुछ भी कर सकते थे. यहाँ तक कि झूठ भी बोल सकते थे. मैं ऐसे दसियों लोगों को जानता हूँ जो इस बात की गवाही दे देंगे कि भाई मंसूर ने उनकी खुशी के लिए झूठ बोला था. जिस आदमी में कभी किसी फायदे के लिए झूठ बोला ही न हो उसके लिए यह बहुत बड़ी बात है. लेकिन कभी कोई उनके झूठ को पकड़ नहीं पाया. अपने भाई सुहेल हाशमी के लिए ही उन्होंने सुहेल के टीचर से झूठ बोला था लेकिन टीचर मियाँ को पता नहीं चला. मैं ऐसे कई लोगों को जानता हूँ जो आजकल 55 से 60 साल की उम्र हासिल कर चुके हैं और माशा अल्ला बड़े दानिश्वर हैं या कम से कम दानिश्वरी की एक्टिंग तो करते ही हैं और अपने बचपन में भाई मंसूर के चेलों में शामिल थे.