महिलाओं के संघर्ष की दास्‍तान है ‘बोल के लब आजाद हैं तेरे’

: किताब की पात्रों ने किया विमोचन : ज़िंदगी का यह अलग ही रंग था। जिंदगी अपने कई-कई रूप में बाहें पसारे आलिंगन में भरने के लिए मानो तैयार खड़ी थी। उन रंगों में रंजो-ग़म भी था और संघर्ष के बाद पसरी एक बड़ी और विशाल दुनिया का अक्स भी। मर्दों की दुनिया में अपनी पूरी पहचान बनाने की ज़िद भी और अपने हक़ के लिए पूरी शिद्दत के साथ आवाज़ बुलंद करने की छटपटाट भी।

नीतीश लिख रहे हैं पत्रकारिता की नई इबारत

बिहार में पत्रकारिता की नई इबारत अब साफ-साफ़ दिखाई देने लगी है। पत्रकारिता में इस नई इबारत के लिखने की शुरुआत ठीक उसी वक्त हुआ था जिस वक्त बिहार में लालू प्रसाद यादव के पंद्रह साल के साम्राज्य का ख़ात्मा हुआ था और नीतीश कुमार ने बिहार में सत्ता संभाली थी।