इस ‘सयाने’ टीवी जर्नलिस्ट से सब हुए परेशान

ये कैसी पत्रकारिता है मेरे भाई : भोपाल से पिछले दिनों एक खबर उड़ी कि स्वाइन फ्लू का एक संधिग्ध मरीज़ सामने आया है. उसे आगे चेकअप के लिए मेडिकल कालेज भेजा गया. बताया गया कि वो सउदी अरब से आया है. उसके कई सारे टेस्ट हुए और बाद में वो कथित रोगी गायब हो गया. आनन-फानन में ये खबर आग की तरह फैल गई. तुरंत सभी रीजनल चैनलों ने खबरें फ्लैश कर दी, फोनो होने लगे. इस बारे में नेशनल चैनलों ने संयम रखा और मामला संदिग्ध दिखने के कारण किसी ने भी अपने ऑफिस में इसकी सूचना तक नहीं दी. दरअसल ये एक नेशनल चैनल के रिपोर्टर का स्टिंग आपरेशन था जो यह तय करने के लिए किया गया था कि अस्पताल में इस बीमारी से निपटने की कितनी तैयारी है.

मीडिया ने क्यों फैलाया स्वाइन फ्लू का डर?

जिसे भी हल्का सा बुख़ार हो, बदन में दर्द हो, एक –दो बार उल्टी हो गई हो, आंखों में जलन हो, खांसी हो रही हो और हो सकता है कि नाक भी बह रही हो- पक्का मानिए स्वाइन फ्लू हो गया है। इन लक्षणों को डॉक्टर बेशक़ स्वाइन फ्लू न मानें लेकिन हमारी मीडिया ने इन लक्षणों को स्वाइन फ्लू मान लिया है। इस देश में कुछ अख़बारों और न्यूज़ चैनलों ने स्वाइन फ्लू का ऐसा हौव्वा खड़ा किया है, मानों पूरे देश में महामारी फैल गई हो। हर आदमी डरा सा नज़र आता है। इन लक्षणों में एक भी लक्षण दिखते ही वो डॉक्टरों के पास भागा-भागा जाता है सिर्फ ये पता लगाने के लिए उसे स्वाइन फ्लू है या नहीं? बीते शुक्रवार को बेटे को बुखार हुआ। पेट में दर्द भी था। एक दो बार उल्टी- दस्त की शिकायत भी हो चुकी थी। इस तरह से वो पहले भी बीमार पड़ता था। मैं उसे चैरीकॉफ और NICE सिरप देता था। वो ठीक हो जाता था। इस बार मैंने इन दवाओं को खुद देने का ज़ोखिम नहीं उठाया। डॉक्टर के पास ले गया । डॉक्टर ने फिर यही दवाएं लिखीं। मैंने डॉक्टर से परेशान होकर पूछा कि लक्षण तो स्वाइन फ्लू से मिलते –जुलते हैं। तो फिर आप टेस्ट क्यों नहीं करते ? डॉक्टर (जो मेरे घनिष्ठ मित्र भी हैं) ने कहा कि ज़रूरत पड़ी तो जांच भी कर लूंगा।