‘गांधी को मरा रहने दो, यही सबसे अच्छा होगा’

[caption id="attachment_18569" align="alignleft" width="142"]लक्ष्मी चंद जैनलक्ष्मी चंद जैन[/caption]: लक्ष्मी चन्द जैन : एक साक्षात्कार : भारत वर्ष में आर्थिक नियोजन के पिछले पचास वर्षों पर गौर करते हुए लक्ष्मी चन्द जैन बताते हैं- ”हमारी प्रमुख समस्या नौकरशाही पर निर्भरता है। गांधी यह भली भांति समझते थे कि जनता की भागीदारी के बिना कोई काम नहीं किया जाना चाहिए तथा जनता की भागीदारी के बिना कोई काम सफल भी नहीं हो सकता – हम यह बुनियादी बात भूल गये।” देश के विकास के लिए होने वाले प्रयासों से गत पचास वर्षों से योजनाकार, विश्लेषक तथा बाद में शिक्षक तथा निर्माता के रूप में जुड़े लक्ष्मी चन्द जैन यह शिद्दत से महसूस करते हैं कि गांधी आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितना वे अपने जीवन-काल में थे।

After the third gun shot I saw Gandhi fall

Delhi : Walking down the memory lane, Shri K D Madan, one of the few surviving witnesses to Bapu’s assassination recollected the events that happened on the fateful evening of January 30, 1948 at the very place where the Mahatma was assassinated. Speaking in a programme organized today by Gandhi Smriti and Darshan Samiti in association with Gandhi Peace Foundation, Gandhi Nidhi, AVARD and National Gandhi Museum, in the rear lawns of the erstwhile Birla House now Gandhi Smriti, Shri Madan narrated in details those moments which history can’t forget.