कहिन जी हजूरी करने वाले भूल गए एक पत्रकार और कवि को वैसे भूलने की संस्कृति हमारी पुरानी रही है। कल तक प्रभाष जोशी साथ थे, आलोक तोमर थे। लेकिन कब तक। हम हैं ही वैसे।... bhadas4media.comApril 21, 2011