‘देवा’ ने कल रवीश कुमार की ज़िंदगी बख्श दी!

मैं देवा हूं। यहां का देवा। चल कैमरा दे। टेप निकाल। ऐ आकर घेरे इनको। बाहर मत जाने देना। किससे पूछ कर अंदर आए। किसलिए शूट कर रहे हो। चल निकाल टेप और कैमरा दे। यहां से अब तू बाहर नहीं जाएगा। तू जानता नहीं मैं कौन हूं। मैं देवा हूं। मैंने बसाया है इनलोगों को। उजाड़ा नहीं है किसी। जाकर बाहर बोल देना कि देवा ने कैमरा ले लिया। लंबे कद का लोकल गुंडा। दोनों हथेलियां मरहम पट्टियों से ढंकी थीं। लगा कि पिछली रात उस्तरेबाज़ी में दोनों हाथ ज़ख़्मी हुए हैं। मैंने बोला कि इसमे चिप है,टेप नहीं है। आपके किसी काम का नहीं है। आप एक बार चला कर देख लो। कई लोगों ने मुझे घेर लिया था। देवा बार-बार बोल रहा था कि इनको बाहर मत जाने देना। मीडिया और सरकार ने नहीं मैंने तुम लोगों को बसाया है।