भोगवादी जीवन से उबे आदमी की आवारगी (भाग तीन)

: अलास्का के आवारा रास्तों पर : रेगिस्तान, समंदर और शहर-दर-शहर आवारगी : ”रेगिस्तान कभी भी सुखदायी जगह नहीं रहा, मगर इसका रूप हमेशा से जोगियों की तरह संवेदनशील साधारणता ओढे हुए, रहस्यों को उजागर करनेवाला और अभीभूत कर देने वाले सौंदर्य का अजनबी सा चेहरा लिए रहता है, जिसे देखने पर ही यह महसूस होता है कि यह जगह धरती पे नहीं, कहीं और है।

कहीं कुछ यहां छिपा नहीं रहता, सब उजागर दिखता है। चारों तरफ फैला उजाला और आकाशीय विस्तार, सूखा-सूखा सा गतिमय माहौल, अधिक तापमान और हवाएं दिलो-दिमाग को झकझोरती रहती हैं। रेगिस्तान का घुमावदार आकाश विशाल होने के साथ-साथ डरावना होता है।  अन्य जगहों पर आकाश का घेरा क्षितिज के बाद धुंधला होने लगता है लेकिन रेगिस्तान में यह अनन्त विस्तार लिए होता है। इतना विस्तार जंगल के ऊपर के आकाश का भी नहीं होता। बिना किसी रुकावट के दिखता बादलो से भरा खुला आकाश इतना विशाल कि कभी-कभी दूर पृथ्वी की सतह की गोलाई घूमती हुई नीचे की तरफ जाती महसूस होती है। रेगिस्तान का यह पैराबोलिक सौंदर्य यहां की जमीन के साथ बादलों को प्राचीन इमारत सा सुंदर रूप देता है। इसी रेगिस्तान से होकर कितने पैगम्बर और सन्यासी अपने-अपने मंजिल की ओर गए। धर्मों को स्थापित करने वाले नेताओं ने दुनिया छोड़कर यहां आने के अध्यात्मिक महत्व के बारे में बताया, दुनिया से पलायन करने के लिए नहीं बल्कि सत्य की खोज के लिए।” -पॉल शेफर्ड की पुस्तक मेन इन दी लैंडस्केपः ए हिस्टोरिक व्यू ऑफ दी एस्थेटिक्स ऑफ नेचर से उद्धृत

माजेव रेगिस्तान के अलग-थलग कोने में एक जंगली फूल, आर्कटॉमेकॉन केलिफोमिका, खिलता है जो दुनिया में और कहीं नहीं मिलता। बसंत के आखिर में कोमल और सुनहले रंग का यह आकर्षक फूल इस रेगिस्तान में खिलता है, लेकिन बाकी मौसम की सूखी जमीन पर यह फूलों से रहित घनी झाड़ियों के रूप में किसी की नजर को आकर्षित नहीं करता। कैलिफोमिका का यह फूल इतना दुर्लभ है कि इसे खत्म होती पौधे की प्रजाति के रुप में चिह्नित किया गया है।

मैकेंडलेस के अटलांटा छोड़ने के लगभग तीन महीने से ऊपर हो चुके थे। अक्टूबर 1990 को संघीय सरकार ने  नेशनल पार्क सर्विस के एक रेंजर बुड वॉल्श को ‘लेकमीड नेशनल रिक्रिएशन एरिया’ के देहाती इलाके में इसी कैलिफोमिका को खोजने भेजा गया ताकि यह जाना जा सके कि यह फूल कितना दुर्लभ है। कैलिफोमिका जिप्सम वाली मिट्टी मे उगता है जो लेक मीड के दक्षिणी किनारे पर प्रचुर मात्रा में मिलता है। इसलिए वाल्श अपनी टीम को लेकर उधर ही गया। टेम्पल बार रोड से होते हुए डेट्रिटल वाश की तरफ दो मील आगे जाने पर वाल्श और उसकी टीम ने झील के किनारे अपनी गाड़ियां खड़ी की और आगे उजले जिप्सम वाले पूर्वी किनारे के ढलान की ओर सब धीरे-धीरे संभलकर उतरने लगे। कुछ मिनट बाद जैसे ही वे किनारे को नजदीक गए, एक रेंजर की नजर किसी चीज पर पड़ी, जिसे देखकर उसकी सांसे थम सी गई। वह चिल्लाया, “ यहां देखो, नीचे देखो, यह कौन सी चीज है??”

घनी झाड़ियों के बीच सूखी नदी के किनारे पर एक बड़ा सा सामान गहरे भूरे रंग के प्लास्टिक के नीचे छिपाया हुआ था। जैसे ही रेंजरों ने प्लास्टिक हटाया, वहां एक पुरानी सी पीले रंग की बिना लाईसेंस प्लेट की डॉटसन कार खड़ी थी। उस कार पर एक कागज चिपका था, जिसपर लिखा थाः ‘यह बेकार चीज यहां छोड़ दिया गया है। जिसे भी यह मिले वह इसे शौक से ले जा सकता है।‘

कार का दरवाजे का ताला खुला था। उसकी नीचले सतह पर कीचड़ भर चुका था। अंदर झांकने पर वाल्श को एक गिटार, एक सॉसपेन में रखा 4.93 डालर खुदरा, एक फुटबॉल, पुराने कपड़े से भरा एक बैग, एक फिशिंग रॉड, एक इलेक्ट्रिक रेजर, एक हार्मोनिका, पच्चीस पौंड चावल और गाड़ी की चाबी मिली।

रेंजरों ने और किसी संदिग्ध चीज की खोज में आसपास छान मारा और वहां से सब चले गए। कुछ दिनों बाद एक रेंजर आकर कार को बिना किसी परेशानी के स्टार्ट कर टेम्पल बार के नेशनल पार्क सर्विस मैंटेनेंस यार्ड तक ले आया। बुड वाल्श ने उस वाकये को याद करते हुए कहा कि गाड़ी को साठ मील प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ाता हुआ वह रेंजर ले आया और बोला ‘यह गाड़ी तो चैंपियन की तरह चलती है’।

यह जानने के लिए कि यह कार किसकी है, रेंजरों ने सभी कानूनी एजेंसियों को सूचना भेज दिया और साउथवेस्ट के सभी कम्प्यूटर रेकार्डों को खंगाल डाला, यह देखने के लिए कि यह डॉटसन कार किसी अपराध से तो नहीं जुड़ा था। लेकिन कुछ पता नहीं चला।

कार के सीरियल नंबर से इसके असली मालिक हर्ट्ज तक रेंजर पहुंच गए लेकिन हर्ट्ज ने कहा कि बहुत बार इस्तेमाल हो चुकी इस कार को बहुत साल पहले उसने किसी को बेच दिया था और अब उसमें उन्हें कोई रुचि नहीं है। वाल्श ने गर्व से इस कार को याद करते हुए कहा, “इस बेहतरीन कार का उपयोग हमलोग अगले तीन साल तक ड्रग तस्करों को पकड़ने के लिए अंडरकवर के रुप में करते रहे और इसने गजब का काम किया। इस डॉटसन कार की मदद से पार्क सर्विस कई ड्रग तस्करों को पकड़ने में कामयाब रही। यह कार आज भी अच्छा माईलेज देती है। थोड़े से इंधन में दिन भर चलती है। और इतनी अच्छी कार का मालिक होने का दावा करने कोई नहीं आया तो मुझे आश्चर्य हुआ।“

वह डॉटसन कार क्रिस मैकेंडलेस की थी। अटलांटा से पश्चिम की ओर निकलने के बाद, ऑफरोड ड्राईविंग ना करने की चेतावनी वाले होर्डिंग को नजरअंदाज करते हुए इमर्शन हाई की चढाई पर कार चलाते हुए 6 जुलाई 1990 को वह लेक मीड नेशनल रिक्रिएशन एरिया में पहुंचा था। मैकेंडलेस अपनी कार को रास्ते पर से उतार कर अंदर दो मील तक रेतीले रिवरबेड पर चलाते हुए लेक के दक्षिणी किनारे तक ले गया। दूर तक फैला किनारे का य़ह खाली रेगिस्तान 120 डिग्री फारेनहाईट तापमान में तपकर गर्म था। इधर-उधर किधर से भी निकल जाने वाली गिरगिटों से भरे उस रेगिस्तान में मैकेंडलेस अपना छोटा टेंट टेमेरिस्क पेड़ की छांव में लगाकर इस नयी आजादी का मजा लेने लगा।

डेट्रिटल वाश का रेगिस्तान, लेक मीड से पचास मील के दायरे में किंगमेन के पहाड़ों तक फैला है और साल मे अधिकांश दिन सूखा पड़ा रहता है। गरमी के मौसम में फटी धरती से तपती हवाएं ऊपर की तरफ केतली से उबलते हुए भाप की तरह तेजी से उठती है। यही हवाएं ऊपर उठकर गठीले, हथौड़े की तरह सख्त दिखने वाले गहरे भूरे बादल बनकर मोजेव के आसमान में तीस हजार फीट से ऊपर उठ जाते हैं। मैकेंडलेस के लेक मीड में आने के दो दिन बाद, दोपहरी में घने काले बादल पूरे डेट्रिटल घाटी में घनघोर पानी बरसाने लगे। मैकेंडलेस का कैंप कुछ फीट ऊंचाई पर था इसलिए जब तक भूरे पानी की तेज और ऊंची धारा उसके टैंट को बहा ले जाती, वह अपना सामान समेट चुका था। कार को चलाने के लिए अब कोई जगह नहीं बची थी क्योंकि अब सिर्फ एक ही रास्ता दिख रहा था, वह था पानी से लबालब बहती हुई नदी। पानी की बाढ में इतनी ताकत नहीं थी कि वह कार को बहा ले जाती या कोई नुकसान पहुंचाती। लेकिन ईंजन को यह गीला कर चुकी थी। मैकेंडलेस ने इसे स्टार्ट करने की बहुत कोशिश की लेकिन बैटरी खत्म हो गई, ईंजन ने साथ नहीं दिया। बैटरी के खत्म होते ही अब कोई संभावना नहीं थी कि डॉटसन आगे जा सके। अगर उसे कार को वापस सड़क तक लाना होता तो उसे पैदल चलकर पहले अधिकारियों से सूचित करना पड़ता। लेकिन रेंजरों के पास अगर वह जाता तो उसे सवालों का सामना करना पड़ता, जैसे कि वह नियम को तोड़कर उस दिशा में क्यों गया, जिधर न जाने की हिदायत रास्ते किनारे लिखी हुई थी। उसके कार का रजिस्ट्रेशन दो साल पहले एक्सपायर हो चुका था। रेंजर पूछ सकते थे कि रजिस्ट्रेशन का रिन्यूअल उसने क्यों नहीं कराया। उसका ड्राईविंग लाईसेंस भी एक्सपायर हो चुका था और गाड़ी का इंश्योरेंस भी नहीं था। अगर वह रेंजरों को सही जबाब देता तो परेशानी में पड़ सकता था। मैकेंडलेस अगर उन्हें समझाने की कोशिश करता कि उसने किसी बड़े नैतिक शक्ति द्वारा निर्धारित नियमों का पालन करते हुए सरकार द्वारा बनाए गए कानूनों को तोड़ा है जैसा कि उसने थोरो के निबंध ‘ऑन दी ड्यूटी ऑफ सिविल डिसऑबिडिएंस’ से सीखा था, तो फेडरल सरकार के अधिकारी शायद ही उसकी बातें समझ पाते और उसे लाल फीतशाही का सामना करते हुए दंड भुगतना पड़ता। उसके माता-पिता से भी संपर्क किया जाता। और इन सबसे बचने के लिए मैकेंडलेस के पास एक ही रास्ता था कि डॉटसन को वहीं छोड़कर वह आगे की आवारगी पैदल ही करे। उसने यही किया।

इन सब घटनाओं को देखकर मैकेंडलेस परेशान होने के बदले और खुश हुआ क्योंकि यह अच्छा अवसर था कि वह सारे गैरजरुरी चीजों को वहीं रेगिस्तान में छोड़ दे। उसने कार को अच्छी तरह से भूरे प्लास्टिक से ढंक दिया और उसका नंबर प्लेट खोलकर छिपा दिया। उसने अपनी विंचेस्टर रायफल और कुछ चीजों के जमीन के नीचे दबा दिया ताकि बाद में उसे निकाल सके। उसके बाद उसने ऐसा काम किया जिससे थोरो और टॉल्सटॉय दोनों खुश होते। उसने अपने सारे पैसे में आग लगा दिया और कुछ ही पल में 123 डॉलर का कागज राख हो चुका था।

ये सभी बातें उस डायरी से पता चली जिसमें मैकेंडलेस सारी घटनाओं को लिखा करता था और जिसे उसने अलास्का जाने से पहले वायन वेस्टरबर्ग के पास कार्थेज में सुरक्षित रखने के लिए छोड़ दिया था। सुबूत से ये साबित होता है कि डायरी में उसने बिल्कुल सच लिखा था औऱ सच को मैकेंडलेस काफी गंभीरता से लेता था।

बचे हुए सामान को बैग में डालकर मैकेंडलेस 10 जुलाई 1990 को लेक मीड की तरफ चल पड़ा। मैकेंडलेस ने अपनी डायरी में लिखा कि यह उसने बहुत बड़ी गलती की क्योंकि गर्मी अपने चरम पर थी और उसे लू लग गई। फिर भी उसने कुछ नाविकों को रोकने में सफलता पायी, जिन्होंने उसे कालविले की खाड़ी तक लिफ्ट दिया। उसके बाद वह अपना अंगूठा उठाकर सड़क पर फिर निकल पड़ा। मैकेंडलेस दो महीनों तक पश्चिम की तरफ आवारगी करता रहा। उधर के लैंडस्केप के सौंदर्य पर वह काफी मुग्ध था। जगह-जगह उसे अपनी तरह के आवारे मिलते रहे और उनके साथ वह आनंद उठाता रहा। लेक ताहो तक वह लिफ्ट लेकर गया। आगे सियरा नेवाडा तक पैदल चलते हुए उत्तर की ओर पैसिफिक क्रेस्ट सेंट्रल तक के पहाड़ों में वह घूमता रहा, उसके बाद फिर से सड़क पर आ गया। जुलाई के अंत में वह एक आदमी की गाड़ी से सफर कर रहा था जो खुद को क्रेजी ईर्नी कहता था। उसने मैंकेडलेस को उत्तरी कैलिफोर्निया के एक रैंच में नौकरी का प्रस्ताव दिया। वहां एक खंडहरनुमा मकान था जिसके इर्द-गिर्द बकरियां और मुर्गे, गद्दे, टूटे टेलीविजन, पुराने सामान और कचरों का अंबार दिखता था। छह और आवारों के साथ मैकेंडलेस वहां ग्यारह दिन तक काम करता रहा लेकिन जल्द ही उसे लग गया कि क्रेजी ईर्नी उसे ये काम करने के एक पैसे नहीं देगा तो उसने वहां से एक लाल साईकिल चुराई और चलता बना। चिको तक वह साईकिल से आया और एक मॉल की पार्किंग मे साईकिल को छोड़कर फिर से उसने आगे की आवारगी, उसी तरह लिफ्ट मांगने के लिए अंगूठा खड़ा करते हुए लगातार करता रहा। उत्तर और पश्चिम से होते हुए वह रेड ब्लफ, वीवरले और विलो क्रीक से गुजरा। कैलिफोर्निया के आर्कटा और पैसिफिक क्षेत्र के किनारे से होते हुए मैकेंडलेस यूएस हाईवे 101 तक आया और समुद्री किनारे की ओर चलता रहा।

ओरेगॉन लाईन के साठ मील दक्षिण में ओरिक शहर के पास एक पुराने वैन में घूमते रबरट्रैंप आवारे जोड़े की नजर सड़क किनारे झाड़ियों में बैठकर कुछ खोजते एक लड़के पर पड़ी। जेन अपने ब्वाय फ्रेंड बॉब के साथ वैन में बैठी थी।

“उसने एक लॉंग शर्ट और बेकार सी टोपी पहन रखी थी। उसके हाथ में पौधों के बारे में लिखी गई एक किताब थी जिसमें देख-देखकर वह एक गैलन में खाने लायक बेरी के फल जमा कर रहा था। वह बहुत परेशान दिख रहा था इसलिए मैने उसे पुकारकर पूछा कि वह उनके साथ कहीं जाना चाहेगा गाड़ी में। हमने सोचा कि उसे हम कुछ खाने को दे सकते हैं।“ चालीस पार कर चुकी रबरट्रैंप जेन ये बातें बता रही थी। “उसने हमसे बात करनी शुरु की। वह बहुत अच्छा था। उसने अपना नाम एलेक्स बताया। वह बहुत समय से भूखा था लेकिन उसके चेहरे से सच्ची खुशी छलक रही थी। उसने बड़े गर्व से बताया कि वह किताब से खोज-खोजकर खाने लायक फलों के खाकर जी रहा  है। वह सच में इस बात पर काफी खुश था। उसने बताया कि वह देश में एक साहसिक यात्रा करने के लिए आवारगी कर रहा है। उसने अपने कार को छोड़ने से लेकर पैसे जलाने तक की सारी दास्तां हमसे कही। मैने जब उससे पूछा कि तुम ऐसा क्यों कर रहे हो तो उसका जबाब था कि उसे पैसे की जरुरत नहीं है।“

जेन ने बताया कि एलेक्स की उम्र का ही उसका एक बड़ा लड़का था जो अब उससे अलग रहता है I इसलिए उसने बॉब से कहा, “इस बच्चे को वह अपने साथ रखेंगे, तुमको इसे कुछ सिखाना पड़ेगा, जीवन जीना।“

“एलेक्स हमारे साथ ओरिक बीच तक आया और हमारे साथ कैंप मे एक सप्ताह तक रुका। वह सच में बहुत अच्छा था। हमने उसके लिए सपने बुने थे। जब हम अलग हो रहे थे तो हमें आशा नहीं थी वह हमसे फिर कभी मिलेगा लेकिन उसने संपर्क में रहने का वादा किया। अगले दो साल तक एलेक्स हमें एक-दो महीने पर पोस्टकार्ड लिखता रहा।“

ओरिक से मैकेंडलेस समुद्री किनारे की तरफ आगे बढता रहा। पिस्टल नदी पारकर, कूस बे, सील रॉक, मंजानिटा, एस्टोरिया; होकियम, हम्पट्युलिप्स; क्वीट्स, फार्क्स, पोर्ट एंजेल्स, पोर्ट टाउनसेंड से गुजरते हुए सिएटल में उसने आवारगी की। जेम्स जॉयस के उपन्यास ‘आर्टिस्ट एज ए यंग मैन’ के कैरेक्टर स्टीफन डेडलस की तरह मैकेंडलेस अकेला था। जॉयस लिखते हैं, “वह अकेला था। उसपर कोई ध्यान नहीं देता था लेकिन वह खुश था और दिल से आवारा। वह बिल्कुल अकेला था। जवान और दृढ ईच्छाशक्ति वाला। समुद्री किनारे के नमकीन लहरें, आवारा हवाओं, सीपों और भूरे रंग के सूरज के रौशनी के बीच तन्हा।“

जेन और बॉब से मिलने से ठीक पहले दस अगस्त को विलो क्रीक के पास यूरेका के पूर्व की तरफ, लिफ्ट लेकर चलने के जुर्म में मैकेंडलेस को एक अधिकारी ने पकड़ लिया। जब अधिकारी ने उससे स्थाई पता के बारे में पूछा तो उसने घर का असली पता दे दिया। अगस्त के अंत तक वाल्ट और बिली के मेलबॉक्स में दंड का पैसा भुगतान करने की चिट्ठी पड़ी थी।

वाल्ट और बिली क्रिस के गायब हो जाने के बाद बहुत चिंतित थे। उन्होंने अन्नाडेल पुलिस को सूचित किया था लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। जब कैलिफोर्निया से दंड वाली चिट्ठी आई तो उनको अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रहा। वाल्ट का एक पड़ौसी यूएस डिफेन्स इंटेलीजेंस एजेंसी में निदेशक था। वाल्ट उस आर्मी जेनरल से सलाह लेने के लिए गया। जेनरल ने उसे एक प्राईवेट इन्वेस्टीगेटर पीटर कालित्का से मिलाया, जो डिफेंस एजेंसी और सीआईए दोनों के लिए काम करता था। जेनरल ने वाल्ट को भरोसा दिलाया कि अगर क्रिस वहां होगा तो पीटर उसे खोज निकालेगा।

उस चिट्ठी के सहारे पीटर ने मैकेंडलेस को वीलो क्रीक से खोजना शुरु किया लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा। दिसम्बर में पीटर को टैक्स रेकार्ड से पता चला कि क्रिस ने अपना सारा पैसा ऑक्सफैम को दे दिया है।

वाल्ट ने बताया, “इस बात ने हमें डरा दिया कि उस वक्त तक क्रिस के बारे में हमें कुछ भी पता नहीं चला। उसको डॉटसन कार से इतना प्यार था कि मुझे यकीन नहीं हो रहा कि वह उसे कहीं पर छोड़कर पैदल चल देगा। लेकिन मुझे आश्चर्य नहीं होना चाहिये था क्योंकि पीठ पर जितना लादकर चल सकें, उतना ही सामान क्रिस हमेशा अपने पास रखना चाहता था।“

पीटर क्रिस को कैलिफोर्निया में खोज रहा था लेकिन वह तो वहां से काफी दूर कास्केड रेंज से होते हुए पूरब की तरफ कोलम्बिया के नदी बेसिन के लावा भरी सतहों और झाड़ियों भरे उच्च भूमि होते हुए मोन्टाना पहुंच चुका था। वहीं कटबैंक के पास उसे वायन वेस्टरबर्ग मिला था और सितम्बर तक कार्थेज में उसके साथ काम कर रहा था। जब वेस्टरबर्ग को जेल हुई तो वहां का काम रुक गया। जाड़े की दस्तक हो चुकी थी इसलिए मैकेंडलेस अब गर्म जलवायु वाले जगह की ओर चल पड़ा।

28 अक्टूबर 1990 को एक ट्रक से वह कैलिफोर्निया के नीडल्स पहुंचा। वहां कोलोराडो नदी के पास पहुंचकर मैकेंडलेस बेहद खुश था। यह बात मैकेंडलेस ने अपने डायरी में नोट किया। उसके बाद वह हाईवे पकड़कर दक्षिण मे रेगिस्तान की तरफ चलना शुरु किया। बारह मील धूल भरे रास्ते से चलने के बाद क्रिस एरिजोना के टोपोक पहुंचा। टोपोक शहर में सेकेंडहेंड डोंगी(छोटी नाव) को बिकते देखकर उसने अचानक भावावेग से उसे खरीदने की सोची, जिससे उसने कोलारोडो नदी से चार सौ मील दक्षिण मैक्सिको के बार्डर से होते हुए कैलिफोर्निया की खाड़ी तक जाने की योजना बनाई।

नदी के नीचले फैलाव में हूवर डैम से खाड़ी तक के रास्ते में टोपोक से 250 मील बाद ग्रैंड कैनयन से तेज और अनियंत्रित लहर फूटती थी। नहरों और बांधो से कमजोर हो चुकी कोलोराडो नदी इस महाद्वीप के कुछ बेहद गर्म और दिखने में साधारण प्रदेशों से होकर धीरे-धीरे गुजरती थी। मैकैंडलेस इस लैंडस्केप की सादगी भरे सौंदर्य से बहुत आह्लादित था। रेगिस्तान के सूखी वादी और क्षितिज से आती साफ रौशनी में उसकी आवारगी ने उसके अंदर जीवन के उस आनंद भरे दर्द को बढा दिया था, जो उसे आगे का रास्ता दिखा रहा था।

टोपोक से दक्षिण हावासू झील के साफ, विशाल और सूने आकाश के गुंबद के नीचे वह अपनी डोंगी में चला और रास्ते में कोलोराडो की एक सहायक नदी बिल विलियम्स में थोड़ी दूर आवारगी की। उसके बाद कोलोराडो रीवर इंडियन रिजर्वेशन, किबोला नेशनल वाईल्डलाईफ रिफ्यूज, इंपेरियस नेशनल वाईल्डलाईफ रिफ्यूज होते हुए वह कैक्टस भरे रेगिस्तान और क्षारीय प्लेन को पीछे छोड़ते हुए, एक बहुत पुराने पत्थर के नीचे अपना कैंप जमाया। दूर नुकीली चोटियों वाले भूरे रंग के पहाड़ों की कतार पानी की सतह पर तैरता महसूस हो रहा था। एक दिन नदी से दूर जंगली घोड़ों के साथ रेस लगाते हुए मैकेंडलेस को यूएस आर्मी द्वारा प्रतिबंधित क्षेत्र यूमा प्रोविंग ग्राउंड का साईनबोर्ड दिखा। चेतावनी की बिल्कुल परवाह न करते हुए वह नवंबर के अंत में यूमा को डोंगी से पारकर रुका और वायन वेस्टरबर्ग को ग्लोरी हाउस, सिऔक्स फाल्स के पते पर एक पोस्टकार्ड लिखा जहां वेस्टरबर्ग अपना समय बिता रहा था।

कार्ड में लिखा थाः- ‘ हे! वेस्टरबर्ग! कैसे हो। आशा करता हूं कि तूम पहले से अच्छे होगे। मैं एरीजोना में एक महीने से आवारगी करता रहा। बहुत सुंदर जगह है। बहुत बढिया जलवायु और सुंदर प्राकृतिक दृश्यों से भरा। इस चिट्ठी का उद्देश्य तुम्हें आभार कहना है, तुम्हारे अच्छे व्यवहार के लिए। तुम्हारे जैसे अच्छे स्वभाव का उदार आदमी मिलना मुश्किल है। कभी-कभी लगता है कि तुमसे ना मिलता तो अच्छा रहता क्योंकि तुम्हारे पास रहके कमाए गए इतने पैसे के साथ आवारगी करने में बड़ी आसानी सी महसूस होती है। जबकि मुझे वो दिन ज्यादा मजेदार लगते थे जब मेरे पास एक भी पैसा नहीं था और मुझे एक वक्त के भोजन के लिए संघर्ष करना पड़ता था। लेकिन एरीजोना में बिना पैसे के खाना मिलना मुश्किल था क्योंकि यहां फलों की खेती बहुत कम है आजकल। केविन को धन्यवाद देना उसके दिए गर्म कपड़ों के लिए जिसके बगैर मैं सर्दी में जमकर मर जाता। मुझे लगता है कि केविन ने तुमको वार एंड पीस किताब दी होगी। जरुर पढना, ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूं क्योंकि तुम उच्च नैतिक चरित्र वाले आदमी हो। वार एंड पीस प्रतीकों से भरी काव्यात्मक किताब है। इसमें ऐसी बातें लिखी हैं, जिसे तुम समझोगे। ऐसी बातें जिसे सामान्यतः लोग समझ नहीं पाते। मैं कुछ दिन और इस तरह की आवारगी भरी जिंदगी जीउंगा। इस तरह की आजादी और सादगी भरा जीवन मैं छोड़ नहीं सकता। एक दिन मैं तुम्हारे पास लौटूंगा वायन और तुम्हारे दयालुता के बदले कुछ तुम्हारे लिए भी करना चाहूंगा। तब तक तुम हमेशा मेरे दोस्त रहोगे। गॉड ब्लेस यू।‘

2 दिसम्बर 1990 को वह मैक्सिकन बार्डर के पास मोरेलोस डैम तक पहुंचा। कोई परिचय पत्र ना होने के कारण उसे भय था कि उसे आगे जाने नहीं दिया जाएगा, इसलिए डैम के खुले फ्लडगेट से होते हुए वह निकल गया। एलेक्स ने तेजी से चारों तरफ देखा कि किसी ने उसे देख तो नहीं लिया। लेकिन “मेक्सिको में यह गैरकानूनी प्रवेश किसी की नजर में नहीं आया। एलेक्जेंडर बहुत खुश था“, एलेक्स ने डायरी में लिखा।

यह खुशी ज्यादा देर टिक नहीं सकी। मोरेलोस डैम के बाद नदी से सिंचाई की कई नहरें फूटती थी और मैकेंडलेस उसमें रास्ता भटक गया। नहरें कई तरफ जाती थी और एलेक्स यह देखकर हतप्रभ था। उसे कुछ सूझ नहीं रहा था। तभी उसका सामना कुछ कैनाल अधिकारियों से हुआ जिसने बताया कि वह दक्षिण में कैलिफोर्निया की तरफ नहीं बल्कि पश्चिम में बेजा पेनिनसिला की तरफ जा रहा था। एलेक्स हताश हो गया। उसने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि कैलिफोर्निया की खाड़ी की तरफ जाने के लिए कोई ना कोई रास्ता जरुर होना चाहिए। अधिकारी एलेक्स को इस तरह देख रहे थे जैसे वह पागल हो। लेकिन तभी मैप के ऊपर पेंसिल के साथ सभी ये जानने के लिए जुटे कि क्या सच में ऐसा कोई रास्ता हो सकता था। दस मिनट के बाद उन्होंने एलेक्स को एक रास्ता सुझाया जो उसे कैलिफोर्निया के समंदर की तरफ ले जा सकता था। आशा जगते ही एलेक्स के अंदर वापस आनंद फूट पड़ा।

मैप के अनुसार नहर में वह कुछ पीछे लौटा और कैनाल डे इंडिपेंडेसिया पकड़कर पूर्व की ओर गया। मैप में वह कैनाल,  वैल्टेको कैनाल से जा मिलता था जहां से दक्षिण की तरफ जाने वाला हर रास्ता समंदर तक ले जाता था। लेकिन, उसकी सारी आशा मिट्टी में तब मिल गई जब नहर जाकर दलदली झाड़ियों से भरे क्षेत्र के बीच में जाकर खत्म हो गई। एलेक्स ने पाया कि वह जगह कोलोराडो नदी का सूख रहा रिवरबेड है। मैप में उस क्षेत्र में आधा मील आगे एक और नहर था जहां तक जाने में मैकेंडलेस को तीन दिन लग गए।

एलेक्स ने अपनी डायरी में लिखाः- “आखिर में एलेक्स ने वाल्टेको कैनाल को खोज ही लिया। उसमें अपनी डोंगी उतार वह दक्षिण की तरफ चल पड़ा। उसकी डर और चिंता और बढने लगी जब आगे नहर छोटी होती जा रही थी। मेक्सिको के स्थानीय लोगों ने एलेक्स को वहां के बैरियर से आगे जाने में मदद की और एलेक्स ने मेक्सिकन्स को अमेरिकन से ज्यादा दोस्ताना और सेवाभाव वाला पाया।“

लेकिन 9 दिसम्बर 1990 को फिर उसने लिखा- ‘सारी आशाएं समाप्त हो चुकी हैं। यह नहर भी समंदर में न जाकर एक दलदल से भरे जंगली झाड़ियों वाले जगह में खत्म हो गई। एलेक्स संकट से घिर चुका है। उसने तय किया कि समंदर तक जाने का रास्ता तो खोजना ही है। एलेक्स दिन भर डोंगी को झाड़ियों और दलदल के बीच खींचता रहा लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ। उसे थोड़ी सी सूखी जमीन मिली जहां उसने अपना कैंप लगाया। अगले दिन, 10 दिसंबर 1990 को एलेक्स फिर से समंदर को खोजने में लगा लेकिन भ्रमित होकर दिन भर एक गोले में चक्कर लगाता रहा। पूरी तरह निराश और हताश एलेक्स दिन के खत्म होने पर डोंगी के बगल में बैठा रोने लगा।  लेकिन तभी मेक्सिकन डक(बत्तख) शिकारी उधर से गुजरे। एलेक्स ने उनसे अपनी कहानी कही और समंदर तक पहुंचने की बात भी कही। शिकारियों ने कहा कि उधर से समंदर की तरफ जाने का कोई रास्ता नहीं था। फिर उनमें से एक शिकारी, एलेक्स को अपने बेसकैंप से समंदर तक पहुंचाने को राजी हो गया। यह चमत्कार से कम नहीं था।‘

डक शिकारियों ने एलेक्स को मछुआरों के एक गांव एल गोल्फो डे सांता क्लारा पहुंचा दिया जो कैलिफोर्निया की खाड़ी के तट पर बसा था। वहां से मैकेंडलेस समंदर में फिर उतर गया और दक्षिण की तरफ जाते हुए खाड़ी के पूर्वी छोड़ तक पहुंच गया। वहां जाने के साथ ही वह और चिंतनशील हो गया। उसने हवाओं में उड़ते रेतों के गुंबद के चित्र, डूबते सूरज, समुद्री किनारे के घुमावदार अर्द्धवृताकार चित्र उसने खींचे। एलेक्स अब डायरी में विस्तार से नहीं, बल्कि छोटे-छोटे नोट लिखने लगा। अगले एक महीने के अंदर उसने सौ से भी कम शब्द लिखे।

डोंगी चलाते-चलाते थकने के बाद 14 दिसम्बर को वह समंदर के किनारे डोंगी को घसीटते हुए उसे ऊंचे चट्टान की तरफ ले गया और उसने वहीं ऊपर के समतल और एकांत वाले हिस्से में अपना कैंप लगा दिया। वह दस दिन तक वहीं रहा। तेज हवाओं ने उसे उसी चट्टान के दूसरी तरफ के गुफानुमा जगह में जाने को मजबूर कर दिया और अगले दस दिनों तक वह वहीं जमा रहा। उसने ऩए साल को उत्तरी अमेरिका के 17000 वर्गमील में फैले रेतीले गुंबदों वाले विशाल दी ग्रेट डेजर्ट के ऊपर चमकते हुए पूर्णिमा के चांद को देखते हुए मनाया। एक दिन बाद वह फिर से समंदर में उतर पड़ा।

11 जनवरी 1991 को उसने अपनी डायरी में लिखा- “यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण दिन था।“ उस दिन कुछ दूर दक्षिण में जाने के बाद डोंगी को रेत के टीले से लगाकर दूर से आते ज्वारभाटा को देख ही रहा था कि एक घंटे बाद रेगिस्तान की तरफ से आती तेज हवाएं और समंदर में उठती तेज और ऊंची लहरों ने उसे फिर से समंदर में ला पटका। लहरें इतनी ऊंची और तेज थी कि ऐसा लगता था उसके छोटे डोंगी को निगल जाएगी। हवाएं और तेज हो चुकी थीं। गुस्से में आकर एलेक्स डोंगी को पतवार से पीटने लगा। एक पतवार टूटने के बाद उसे होश आया तो उसने खुद को शांत किया क्योंकि दूसरा पतवार भी अगर टूट जाता तो एलेक्स की कहानी वहीं खत्म हो जाती। बहुत जोर लगाने के बाद एलेक्स डोंगी को किनारे लगाने में कामयाब रहा और रेत पर गिर पड़ा। तब तक शाम ढल चुकी थी। एलेक्स ने सोचा कि अब डोंगी से किसी तरह मुक्ति पाकर वह उत्तर की तरफ जाएगा।

16 जनवरी को मैकेंडलेस ने उस मोटे चदरे से बनी डोंगी को एल गोल्फो डे सांटा क्लारा गांव के दक्षिण-पश्चिम में घास के ऊंचे टीले पर छोड़कर उत्तर की तरफ समंदर के रेगिस्तानी किनारे में पैदल निकल पड़ा। छत्तीस दिनों से उसने किसी से बात नहीं की थी। वह इतने दिन तक सिर्फ पांच पौंड चावल के सहारे और समंदर से मिले कुछ चीजों को खाते हुए जी गया। इसी बात ने क्रिस को आगे अलास्का की यात्रा पर बहुत कम राशन ले जाने की प्रेरणा दी। वह 18 जनवरी 1991 तक यूनाईटेड स्टेट्स के बार्डर पर था। वहां उसे सीमा अधिकारियों ने पकड़ लिया और बिना परिचय पत्र के चलने के जुर्म में जेल में डाल दिया। वहां उसने एक झूठी कहानी गढी और उस आधार पर एक दिन बाद छूट गया लेकिन उसका .38 कैलिबर रिवाल्वर वहीं ले लिया गया, जिससे एलेक्स को बहुत लगाव था।

मैकेंडलेस अगले छह हफ्तों तक दक्षिण-पश्चिम की तरफ घूमता रहा। पूर्वी दिशा की ओर ह्वेस्टन तक, पश्चिम की तरफ प्रशांत सागर के किनारे तक। किसी  शहर में घुसने से पहले उसने पैसे को जमीन में दबा देता था क्योंकि वहां घूमने और सोने के दौरान उसे चोर-बदमाशों से खतरा था। लौटते वक्त मैकेंडलेस पैसे वापस निकाल लेता था। तीन फरवरी को वह लास एंजेल्स पहुंच गया। वहां वह परिचय पत्र बनवाने और एक नौकरी की खोज में गया था। लेकिन वहां समाज में उसे जीने में बहुत परेशानी होने लगी और वह सड़क की जिंदगी में वापस लौट आया।

छह दिन बाद वह ग्रैंड कैनयन घाटी में नीचे एक जर्मन जोड़े थामस और कैरीन के साथ रुका जिन्होंने उसे लिफ्ट दिया था। एलेक्स ने लिखा, “ क्या यह वही एलेक्स है जो जुलाई 1990 को आवारगी पर निकला था। रोड की जिंदगी और पौष्टिक खाने के अभाव में उसका वजन 25 पौंड कम हो गया। लेकिन आत्मा से वह बहुत ऊंचा उठ चुका था।”

24 फरवरी को, साढे सात महीने बाद मैकेंडलेस फिर से वहीं लौटा, जहां उसने अपना डॉटसन कार छोड़ा था। कार तो रेंजर ले जा चुके थे लेकिन नंबर प्लेट के साथ-साथ कुछ सामान खोज निकाला जिसे उसने वहां जमीन में दबाया था। उसके बाद उसने लास वेगास की ओर रुख किया और वहां एक इटालियन रेस्टूरेंट में उसे काम मिल गया।

उसने डायरी में लिखा, “एलेक्जेंडर ने अपना सारा सामान रेगिस्तान में दबा दिया और बिना पैसे और परिचय पत्र के 27 फरवरी को लास वेगास में घुस गया। वह लास वेगास की गलियों में आवारों, बम्पों और शराबियों के साथ कई सप्ताह रहा। लेकिन, लास वेगास उसकी मंजिल नहीं थी। 10 मई को वह नौकरी छोड़कर उल्टे पांव लौटा और रेत में दबे अपना बैग निकालकर फिर सड़क पर आ गया। उसने पाया कि बैग में रखा कैमरा जमीन के नीचे दबा रहके खराब हो चुका था। इसलिए, 10 मई 1991 से 7 जनवरी 1992 के बीच की कोई तस्वीर एलेक्स की कहानी फोटोफाईल में नहीं है। लेकिन यह महत्वपूर्ण नहीं है।  अब तक एलेक्स ने काफी अनुभव पाये, उसके पास यादों का खजाना है। उसने आवारगी में अपने जीवन का असली अर्थ और आनंद पाया है। हे ईश्वर! शुक्रिया! तुमने हमें जिन्दा रखा।“

अमेरिका के भोगवादी जीवन से ऊबे क्रिस्टोफर ने खुद को जानने के लिए आवारगी का रास्ता चुना। सारे पैसे दानकर, परिचय-पत्र फेंककर और परिवार को बिना कुछ बताए उसने गुमनामी-घुमक्कड़ी राजीव कुमार सिंहका जीवन जीना शुरू किया। दो साल बाद वह अलास्का के निर्जन इलाके में जाकर रहना शुरू कर दिया। वहां जीवन की विपरीत परिस्थितियों से लड़ते हुए जीवन की खोज जारी रखी। वह ऐसा क्यों बना… अलास्का में उसके साथ क्या हुआ.. यह सब-कुछ जॉन क्राउकर नाम के पत्रकार ने बहुत शोध के बाद अपने किताब ‘Into the wild’ में लिखा। सीन पेन ने इसी नाम से एक बेहतरीन फिल्म बनाई जो विश्व के सौ महान सिनेमा में गिनी जाती है। Into the wild’ का हिंदी में अनुवाद कर रहे हैं युवा पत्रकार राजीव कुमार सिंह। इसका पहला और दूसरा पार्ट आप लोग पढ़ चुके हैं। ये था तीसरा पार्ट। राजीव ने इस उपन्यास का अनुवाद करके पत्रकारिता क्षेत्र में दस्तक दी है। उनके अनुवाद में कई कमियां-गल्तियां हैं, ऐसा उनका कहना है। पर इसे एक युवा पत्रकार का शुरुआती गंभीर प्रयास मानते हुए कमियों की अनदेखा की जाए, ऐसा वह अनुरोध करते हैं। राजीव की इच्छा है कि उनके परिचय में लिखा जाए- एक बेरोजगार पत्रकार जिसे एक अदद नौकरी की तलाश है। राजीव से संपर्क rajeevsinghemail@gmail.com के जरिए किया जा सकता है। -एडिटर, भड़ास4मीडिया

भोगवादी जीवन से उबे आदमी की आवारगी (भाग दो)

अमेरिका के भोगवादी जीवन से ऊबे क्रिस्टोफर ने खुद को जानने के लिए आवारगी का रास्ता चुना। सारे पैसे दानकर, परिचय-पत्र फेंककर और परिवार को बिना कुछ बताए उसने गुमनामी-घुमक्कड़ी का जीवन जीना शुरू किया। दो साल बाद वह अलास्का के निर्जन इलाके में जाकर रहना शुरू कर दिया। वहां जीवन की विपरीत परिस्थितियों से लड़ते हुए जीवन की खोज जारी रखी।

वह ऐसा क्यों बना… अलास्का में उसके साथ क्या हुआ.. यह सब-कुछ जॉन क्राउकर नाम के पत्रकार ने बहुत शोध के बाद अपने किताब ‘Into the wild’ में लिखा। सीन पेन ने इसी नाम से एक बेहतरीन फिल्म बनाई जो विश्व के सौ महान सिनेमा में गिनी जाती है। राजीव कुमार सिंह‘Into the wild’ का हिंदी में अनुवाद कर रहे हैं युवा पत्रकार राजीव कुमार सिंह।

इसका पहला पार्ट आप लोग पढ़ चुके हैं। पेश है दूसरा पार्ट। राजीव की इच्छा है कि उनके परिचय में लिखा जाए- एक बेरोजगार पत्रकार जिसे एक अदद नौकरी की तलाश है। राजीव से संपर्क rajeevsinghemail@gmail.com के जरिए किया जा सकता है। राजीव ने इस उपन्यास का अनुवाद करके पत्रकारिता क्षेत्र में दस्तक दी है। उनके अनुवाद में कई कमियां-गल्तियां हैं, ऐसा उनका कहना है। पर इसे एक युवा पत्रकार का शुरुआती गंभीर प्रयास मानते हुए कमियों की अनदेखा की जाए, ऐसा वह अनुरोध करते हैं। -एडिटर, भड़ास4मीडिया

अलास्का के आवारा रास्तों पर

क्रिस्टोफर मैकेंडलेस की जीवनी

बियाबान की ओर, आवारा कदमों का पहला निशान

”मैंने हमेशा आवारा होना चाहा। शांत और एक जगह स्थिर अस्तित्व मुझे नहीं चाहिए थी.. मैंने उत्साह और साहस के साथ खतरों से जूझते हुए अपने प्यार के लिेए जान कुर्बान कर देना चाहा… मैने अपने अंदर इतनी उर्जा महसूस की जो मुझे बाहरी शांत जिंदगी में कभी नहीं मिल पाती.”

-क्रिस्टोफर के पास मिली लियो टाल्सटॉय की किताब ‘फैमिली हैप्पीनेस’ के एक पृष्ठ पर छपी पंक्तियां, जिसे क्रिस ने कलम से हाईलाइट किया था.

”इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि आवारा होने की कल्पना हमें असीम आनंद से भर देता है… यह चाहत हमारे मन की उस आजादी से जुड़ी है जो इतिहास, क्रूर शोषण, कानून और प्रताड़ित करने वाले सामाजिक दायित्वों से मुक्त होकर पूर्ण स्वतंत्र हो जाना चाहती है.”

-वालेस स्टेगनर की किताब ‘दी अमेरिकन वेस्ट एज ए लिविंग स्पेस’ से उद्धृत.

अमेरिका के साउथ डाकोटा में एक छोटा सी जगह का नाम था कार्थेज। सुव्यवस्थित चहारदीवारियों से घिरे, लकड़ी से ढंके दीवारों के मकानों वाले कार्थेज में रहनेवालों की संख्या महज 274 थी। अमेरिका के उत्तरी मैदानों में बसे इस छोटे से सुस्त शहर में सिर्फ एक राशन का दुकान, एक बैंक, एक गैस स्टेशन और एक शराब का बार – कैबरेट, जहां कॉकटेल पीते हुए और सिगार का मीठा स्वाद लेते हुए वॉयन वेस्टरबर्ग एक अजीब विचारों वाले नौजवान को याद कर रहा था, जिसे वह एलेक्स के नाम से जानता था।

कैबरेट की प्लाईवुड लगी दीवारो पर हिरणों के सिंग, पुराने मिलवॉकी बियर के पोस्टर्स, उड़ान भरते पक्षियों के मंहगे पेंटिंग्स टंगे थे। सिगरेट के धुएं की कई लकीरें,एक साथ वहां बैठे किसानों के बीच से उठ रही थी जिनका धूल से सना चिंतित चेहरा कोयला खदान में काम करनेवालों की याद दिलाता था। वे सब खराब मौसम के कारण दुखी थे क्योंकि सुरजमुखी के खेत इतने सूखे नहीं थे कि उसे काटा जा सके।

क्रिस मैकेंडलेस की लाश मिले दो महीने बीत चुके थे ।

ह्वाईट रसीयन ड्रिंक में बर्फ का टुकड़ा डालते हुए उदासी भरे आवाज में वेस्टरबर्ग ने कहा- ‘एलेक्स यही पीता था। वह बार के उस कोने में बैठा करता था और अपनी आवारगी के अद्भुत किस्से सुनाया करता था। वह घंटो बात कर सकता था। इस शहर के कई लोग एलेक्स को प्यार करने लगे थे। यकीन नहीं हो रहा, उसके साथ ये हादसा कैसे हो गया।’

मजबूत कंधो और सख्त मांसल बदन वाले वेस्टरबर्ग के पास खेती का काम करने के लिए दो ग्रेन एलीवेटर था-एक कार्थेज में और दूसरा कुछ मील दूर एक दूसरे शहर में। पूरी गर्मी वह अपने आदमियों के साथ टेक्सास से लेकर कनाडा के बार्डर तक के खेतों में अपनी एलीवेटर लेकर काम करता था। 1990 के पतझड़ में वह नार्थ सेंट्रल मोंटाना से अपना काम समेटकर वापस लौटने की तैयारी कर रहा था। कट बैंक से अपने एलीवेटर के कुछ पार्ट खरीदकर वापस लौट रहा था कि रास्ते में एक नौजवान को उसने लिफ्ट दी। नौजवान ने अपना नाम एलेक्स बताया।

मैकेंडलेस कद का छोटा था लेकिन उसका बदन मेहनतकश मजदूरों की तरह कठोर और उभरी हुई नसों वाला दिखता था। इस नौजवान की आंखों में कुछ था जो लोगों को अपनी तरफ खींचता था। गहरी काली और भावुक आंखे- जो संकेत करती थी कि उसके अंदर किसी बाहरी प्रजाति का खून बह रहा है-शायद यूनानियों का। कुछ था उसकी आंखों में जिसने वेस्टरबर्ग को उसे अपने पास रखने को मजबूर कर दिया। ऐसा संवेदनशील चेहरा जिसे देखकर स्त्रियां ममत्व से भर उठती हैं, एलेक्स के पास था।

वेस्टरबर्ग एलेक्स का चेहरा याद कर बयां कर रहा था। एलेक्स के चेहरे में गजब का लचीलापन थाः एक क्षण में वह भावनाहीन दिखता था और दूसरे ही पल अचानक जब भावप्रण होकर मुंह खोलता था तब उसके बड़े-बड़े दांतों की दीवारे हंसने के दौरान बाहर छलक पड़ती थी। उसको दूर की चीजें साफ नहीं दिखाई पड़ती था इसलिए स्टील-फ्रेम वाला चश्मा वह पहनता था।

वेस्टरबर्ग को लगा कि एलेक्स को भूख लगी है। एलेक्स को लिफ्ट देने के दस मिनट बाद वेस्टरबर्ग एथरिज शहर में अपने दोस्त के पास एक पैकेज देने के लिए रुका। दोस्त ने दोनों को बीयर पीने के लिए दिया और एलेक्स से पूछा कि वह कितने दिनों से भूखा है। एलेक्स ने स्वीकार किया कि पैसे खत्म हो जाने के कारण उसे दो दिन हो चुके थे फाकाकशी किये हुए। यह सुनकर दोस्त की बीबी ने जल्दी से उसके लिए ढेर सारा खाना बनाया जिसे एलेक्स जल्दी-जल्दी पेट में डालकर वहीं टेबल पर सो गया।

मैकेंडलेस ने वेस्टरबर्ग से कहा कि वह आगे साको के गर्म झरने तक जाएगा, जो यूएस हाईवे 2 से 240 मील दूर था और जिसके बारे में उसने रबर ट्रैंपो से सुन रखा था। रबरट्रैंप, जो गाड़ी से आवारगी करते हैं और लेदरट्रैंप जो पैदल या लिफ्ट लेकर घुमक्कड़ी का मजा उठाते हैं। मैकेंडलेस लेदरट्रैंप था। वेस्टरबर्ग ने उसे बताया कि वह सिर्फ दस मील आगे तक जाएगा, उसके बाद उसे उत्तर की तरफ सनबर्स्ट शहर जाना है जहां खेतों की कटाई के लिए उसका ट्रेलर पड़ा है।  जब सड़क किनारे मैकेंडलेस को उतारने के लिए वेस्टरबर्ग ने गाड़ी रोकी तब तक रात के साढे दस बज चुके थे और घनघोर बारिश हो रही थी। वेस्टरबर्ग ने मैकेंडलेस से कहा कि इस शैतानी बारिश में उसे छोड़ना अच्छा नहीं लगेगा। “तुम्हारे पास तो स्लीपींग बैग है। तुम क्यों नहीं आज की रात सनबर्स्ट के ट्रेलर में गुजार लेते हो?” अगले तीन दिनों तक मैकेंडलेस वेस्टरबर्ग के कामगारों के साथ सुबह से ही, पके सुनहले गेंहू के खेतों के समंदर में कटाई का काम करता रहा। विदा लेते समय मैकेंडलेस से वेस्टरबर्ग ने कहा कि अगर उसे नौकरी की जरुरत हो तो कार्थेज में वह उससे आकर मिले। और, दो हफ्ते बाद मैकेंडलेस कार्थेज शहर में दिख गया।

वेस्टरबर्ग उस क्षण को याद करते हुए कह रहा था। उसने मैकेंडलेस को ग्रेन एलीवेटर को खेत में चलाने की ट्रेनिंग देकर काम पर रख लिया और कम किराए पर रहने के लिए अपने दो मकानों में से एक में कमरा भी दिया।

वेस्टरबर्ग बताता जा रहा था। “मैं कई आवारगी करने वालों को सालों से नौकरी पर रखता रहा हूं। उनमें से अधिकांश काम नहीं करना चाहते थे। लेकिन एलेक्स का रवैया कुछ अलग था। मेरे पास काम करने वाले लोगों में वह अब तक का सबसे ज्यादा मेहनती कामगार था। वह जो करता था, मेहनत से करता था। जिस काम को एलेक्स शुरु करता था उसे पूरा करके ही दम लेता था, बीच में नहीं छोड़ता था। इसे वह नैतिक नियम मानकर चलता था। वह बहुत ज्यादा नैतिक था। उसने अपने लिए काफी बड़े सिद्धांत बना रखे थे।

अपनी तीसरी ड्रिंक पीते हुए वेस्टरबर्ग बोलता जा रहा था। “एलेक्स का दिमाग बेहद तेज था। वह बहुत पढता था। बातचीत में बड़े भारी-भरकम शब्दों का इस्तेमाल करता था। मुझे लगता है जिस चीज ने उसे मुसीबत में डाला था वह था उसका बहुत ज्यादा सोचना। वह बहुत ज्यादा दुनिया के इस रुप को समझने की कोशिश करता था कि आखिर लोग एक दूसरे के प्रति इतने बुरे क्यों होते हैं। मैंने दो-तीन बार उसे समझाने की कोशिश की कि इतनी गहराई से जीवन के बारे में सोचकर वह बहुत बड़ी गलती कर रहा है लेकिन एलेक्स कहां समझने वाला था। एलेक्स तो हमेशा किसी प्रश्न का आखिरी उत्तर जानने की कोशिश में लगा रहता है। उसके बाद ही कुछ और सोच-समझ सकता था।“

वेस्टरबर्ग के हाथ एक बार मैकेंडलेस का कागज लगा, जिसमें उसका नाम क्रिस लिखा था, ना कि एलेक्स। वेस्टरबर्ग ने बताया, “उसने कभी नहीं बताया कि उसने नाम क्यूं बदला। उसकी बातों से लगता था कि उसके और उसके परिवार बीच का रिश्ता कुछ ठीक नहीं है। लेकिन मैं किसी के व्यक्तिगत जीवन में हस्तक्षेप नहीं करता इसलिए मैंने उससे कभी कुछ नहीं पूछा।“

मैकेंडलेस को अगर अपने परिवार से कोई दुराव था तो उसने वेस्टरबर्ग और उसके कामगारों में नया परिवार पाया था जो कार्थेज के उस मकान में एक साथ रहते थे. मैकेंडलेस को जल्दी ही कार्थेज मोहने लगा। उसे कार्थेज के लोगों की सामान्य और सुगठित जिंदगी, सामान्य रहन-सहन और दोस्ताना व्यवहार पसंद आया। वह जगह दुनिया की मुख्य धारा से कटा हुआ अलग-थलग एक नया जीवन बसाए हुए था, जो मैकेंडलेस को पसंद था। उसने कार्थेज शहर और वायन वेस्टरबर्ग के साथ गहरा जुड़ाव बना लिया था।

तीस से चालीस के बीच की उम्र वाले वेस्टरबर्ग को बचपन में कार्थेज के दंपति ने गोद लिया था। वह किसान के साथ-साथ वेल्डर, बिजनेसमेन, मशीन बनाने वाला, मेकेनिक, कमोडिटी जांचकर्ता, एयर पायलट, कम्प्यूटर प्रोग्रामर, इलेक्ट्रानिक सामान ठीक करनेवाला और वीडियोगेम रिपेयरमेन भी था। वेस्टरबर्ग एक ऐसे ब्लैक बॉक्स को बनाकर बेचने की योजना मे लगा हुआ था जिसके जरिए लोग बिना पैसा चुकाए केबल टीवी के कार्यक्रम देख सकते थे। एबबीआई को इसकी भनक लगी और वेस्टरबर्ग गिरफ्तार हो गया। उसे चार महीने की जेल हुई। वेस्टरबर्ग के चले जाने के बाद ग्रेन एलीवेटर से खेत काटने का काम बंद रहा। 23 अक्टूबर को मैकेंडलेस ने कार्थेज छोड़ दिया और फिर से आवारा जीवन जीना शुरु कर दिया। कार्थेज के साथ मैकेंडलेस का गहरा भावनात्मक लगाव था। जाते-जाते वह वेस्टरबर्ग को लियो टॉल्सटॉय की वार एन्ड पीस किताब देकर गया जिसके अंदर के टायटल पेज पर उसने लिखा –वेस्टरबर्ग के लिए एलेक्स की ओर से। अक्टूबर 1990।

मैकेंडलेस जब तक पश्चिम की ओर घूमता रहा, वेस्टरबर्ग के संपर्क में रहा। हरेक एक-दो महीने पर वह वेस्टरबर्ग से फोन से बात करता था या चिट्ठी लिखा करता था। उसके बाद उसने सारी चिट्टियां वेस्टरबर्ग के पते पर लिखी और जो भी मिला उसे अपना घर दक्षिण डाकोटा बताया।

सच ये था कि मैकेंडलेस वर्जिनिया के अन्नाडेल में एक उच्च मध्यमवर्गीय परिवार में सुख-सुविधा के बीच पला-बढा था। उसके पिता नासा में एयरोस्पेस इंजिनियर थे जिन्होंने स्पेस शटल के लिए एडवांस रडार सिस्टम का डिजाईन तैयार किया था और अन्य बड़े प्रोजेक्ट पर वह काम कर रहे थे। 1978 में वाल्ट ने अपना एक कन्सल्टिंग फर्म शुरु किया जिसका नाम था-यूजर सिस्टम्स। इस बिजनेस में उन्होंने क्रिस की मां बिली को बिजनेस पार्टनर बनाया। क्रिस का अपनी बहन कैरीन के साथ भावनात्मक लगाव बहुत ज्यादा था। मई, 1990 में क्रिस ने अटलांटा के इमोरी विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया जहां वह स्टूडेन्ट न्यूजपेपर का संपादक था और स्तंभ लिखा करता था। उसने वहां इतिहास और मानव विज्ञान की पढाई की थी। वहां उसे एक सम्मान देने का प्रस्ताव हुआ लेकिन यह कहते हुए लेने मना कर दिया कि उपाधि या सम्मान बेहद गैरजरुरी चीजें हैं। वहां से पास करने के बाद क्रिस के पास 24,000 डॉलर बच गए थे, जिससे वह आगे कानून की पढाई करने वाला था।

मैकेंडलेस के पिता ने स्वीकार किया कि वे अपने बेटे को समझ नहीं सके। वाल्ट, बिली और कैरीन जब कॉलेज के डिग्री प्रदान करने वाले सामारोह में क्रिस से मिलने गए थे तब उनको ये मालूम नहीं था कि क्रिस कुछ ही दिन बाद अपना सारा पैसा भूख से लड़ने वाली संस्था ऑक्सफैम अमेरिका नाम के चैरिटी को दान कर देने वाला था।

12 मई, शनिवार को वह सामारोह था। उस सामारोह में मैकेंडलेस की तस्वीर, बिली ने खींची थी जब वह डिग्री लेने जा रहा था। अगले दिन मदर्स डे था और मैकेंडलेस ने अपनी मां को कैंडी, फूल और एक भावप्रण कार्ड दिया था। उसकी मां उस दिन काफी आश्चर्यचकित और खुश हुई थी क्योंकि उसका बेटा उसे दो साल बाद कोई गिफ्ट दे रहा था। मैंकेंडलेस ने अपने घर में यह घोषणा कर रखी थी कि सैद्धांतिक रुप से वह गिफ्ट ना तो देगा और ना ही लेगा।

असल में कुछ दिन पहले वाल्ट और बिली ने क्रिस को नए कार खरीद कर देने की और आगे पढने के लिए खर्च देने की बात कही थी जिसे क्रिस ने मानने से इंकार कर दिया था। मैकेंडलेस का कहना था कि उसके पास पहले से जो कार है, वह अभी बिल्कुल ठीक है। 1982 के डॉटसन B210 मॉडल की वह कार थोड़ी पुरानी दिखने लगी थी लेकिन 128,000 मील चल चुकी इस कार के पार्ट-पुर्जे अभी ठीक से काम कर रहे थे।

उसने कैरीन से बाद में कहा, ‘मुझे विश्वास नहीं हो रहा कि मेरे मां-बाप नई कार लेने को कह रहे हैं। उन्होंने ये भी कैसे सोच लिया कि आगे की पढाई के लिए कोई खर्च लूंगा। मैंने लाखों बार ये बात दुहराई है कि मेरे पास दुनिया की सबसे अच्छी कार है जिसे मैंने मियामी से अलास्का तक खूब बिना किसी परेशानी के दौड़ाया है और अब तक एक भी समस्या सामने नहीं आयी; जिस कार से मैं इतना प्यार करता हूं कि कभी उसे बेचने की नहीं सोच सकता; इसके बावजूद भी वह मेरी भावनाओं को ना समझकर ये सोचते हैं कि मैं नई कार स्वीकार कर लूंगा! मैं आगे से बिल्कुल सावधान रहूंगा कि उनसे कोई भी गिफ्ट ना लूं क्योंकि वह सोचेंगे कि मेरा सम्मान कर उन्होंने मुझे खरीद लिया है।‘

क्रिस की डॉटसन कार सेकेन्डहेंड थी जिसे उसने तब खरीदा था जब हाईस्कूल में था। उसके बाद वह कई बार स्कूल की छुट्टियों में अकेले इस कार को लेकर लम्बे ट्रिप पर निकल जाता था। ग्रेजुएशन के आखिरी सप्ताह में उसने ऐसे ही एक बार मां-बाप से कहा था कि अगली गरमी वह रोड की जिंदगी जीते हुए बिताना चाहता है। उसने कहा था,”मैं सोचता हूं कि कुछ दिन के लिए मैं गायब हो जाउंगा।“

उसके मां-बाप ने उसके घोषणा को उस पल गंभीरता से नहीं लिया। वाल्ट ने प्यार से अपने बेटे से कहा,” जाने से पहले हमसे जरुर मिल लेना”। क्रिस यह सुनकर मुस्कुराकर हां कहने की मुद्रा में सिर को हल्के से ऊपर-नीचे किया था जिससे वाल्ट और बिली ने समझा कि कहीं जाने से पहले मैकेंडलेस उनसे मिलने अन्नाडेल जरुर आएगा।

जून के आखिरी सप्ताह में क्रिस ने अटलांटा से अपने मां-बाप के ग्रेजुएशन फाईनल का ग्रेड रिपोर्ट भेजा जिसके साथ एक चिट्ठी भी थी जिसमे लिखा थाः

‘यह मेरे पढाई के रिपोर्ट की आखिरी कॉपी है। अच्छे ग्रेड से पास हुआ हूं। आपने पेरिस से जो तस्वीरें, शेविंग के सामान और पोस्टकार्ड भेजे हैं उसके लिए धन्यवाद। ऐसा लगता है कि ट्रिप का आपने काफी आनंद लिया है। बहुत मजा आया होगा। अभी कुछ नया नहीं है कहने को। गर्मी और उमस का मौसम शुरू हो चुका है।‘

यह क्रिस का अपने परिवार के साथ हुआ आखिरी संवाद था। ग्रेजुएशन के फाईनल में ही क्रिस ने कॉलेज कैंपस छोड़ दिया था और साधु जैसे कमरे में रहने लगा था जिसमें जमीन पर एक पतला गद्दा बिछा था और टेबल था। वह कमरे को हमेशा इतना साफ और व्यवस्थित रखता था जैसे कि मिलिटरी बैरक हो। उसने कोई फोन नहीं रखा था इसलिए वाल्ट और बिली उसे कॉल नहीं कर पाते थे। अगस्त 1990 के शुरूआत के बाद तक वाल्ट और बिली को जब क्रिस की कोई खबर नहीं मिली तो दोनों अटलांटा चल पड़े। जब वे मैकेंडलेस के कमरे पर पहुंचे तो वह खाली था और उस पर ‘फार रेंट’ लिखा था। मैनेजर ने कहा कि जून के अंत में ही क्रिस ने कमरा छोड़ दिया था। वाल्ट और बिली जब वापस लौटे तो उनके द्वारा क्रिस को लिखी गई सारी चिट्ठियां डाक से वापस लौट चुकी थी।

“क्रिस ने डाकखाने को उन चिट्ठियों को एक अगस्त तक रोककर रखने को कहा था इसलिए हम जान नहीं पाए कि आगे कुछ होने जा रहा है।‘ बिली कह रही थी, “इस बात से हम चिंतित हो गए।“

तब तक क्रिस बहुत दूर जा चुका था। पांच सप्ताह पहले ही अपने कार में सामान लादकर वह पश्चिम की ओर बिना कोई मंजिल तय किए चल पड़ा था। यह ट्रिप ऐतिहासिक साबित होने वाला था, सबकुछ उलट-पलट कर देनेवाला।

क्रिस ने चार साल तक ग्रेजुएशन करते हुए एक निरर्थक ड्यूटी सी लगने वाले काम को अंजाम दिया था। लेकिन अब हर भार से वह मुक्त था; अपने माता-पिता और दोस्तों की घुटन भरी दुनिया से आजाद था; अतिभौतिकता और सुरक्षित दुनिया को छोड़ चुका था,जिसमें जीकर उसे लगता कि अपने अस्तित्व से वह कट गया है।

अटलांटा के पश्चिम दिशा में जाते हुए उसने अपने लिए एक नयी दुनिया खोजनी शुरु की जिसमें वह अपने अनुभवों के साथ पूर्ण रुप से मुक्त रह सके। उस जीवन की शुरुआत करते हुए उसने सबसे पहले अपना नाम बदल लिया।

अब वह क्रिस मैकेंडलेस नहीं था। नया नाम था- एलेक्जेंडर सुपरट्रैंप, जो अब अपना सबकुछ खुद तय कर रहा था।

….जारी…

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भोगवादी जीवन से उबे आदमी की आवारगी (भाग एक)

अमेरिका के भोगवादी जीवन से ऊबकर क्रिस्टोफर ने वापस खुद को जानने के लिए आवारगी का रास्ता चुना। अपने सारे पैसे दानकर और अपने सारे परिचय-पत्र फेंककर अपने परिवार को बिना कुछ बताए उसने गुमनामी और घुमक्कड़ी जीवन जीना शुरू किया। दो साल बाद वह अलास्का के निर्जन इलाके में जाकर रहना शुरू कर दिया।

वहां जीवन की सारी विपरीत परिस्थितियों से लड़ते हुए उसने जीवन की खोज जारी रखी। वह ऐसा क्यों बना… अलास्का में उसके साथ क्या हुआ.. यह सब-कुछ जॉन क्राउकर नाम के पत्रकार ने बहुत शोध के बाद अपने किताब ‘Into the wild’ में लिखा। सीन पेन ने इसी नाम से एक बेहतरीन फिल्म बनाई जो विश्व के सौ महान सिनेमा में गिनी जाती है। ‘Into the wild’ का हिंदी में अनुवाद कर रहे हैं युवा पत्रकार राजीव कुमार सिंह। राजीव की

राजीव कुमार सिंह
राजीव कुमार सिंह
इच्छा है कि उनके परिचय में लिखा जाए- एक बेरोजगार पत्रकार जिसे एक अदद नौकरी की तलाश है। राजीव से संपर्क rajeevsinghemail@gmail.com के जरिए किया जा सकता है। राजीव ने इस उपन्यास का अनुवाद करके पत्रकारिता क्षेत्र में दस्तक दी है। उनके अनुवाद में कई कमियां संभव है। पर इसे एक युवा पत्रकार का शुरुआती गंभीर प्रयास मानते हुए अनुवाद की कमियों को अनदेखा किया जाना चाहिए। -यशवंत, एडिटर, भड़ास4मीडिया


अलास्का के आवारा रास्तों पर (क्रिस्टोफर मैकेंडलेस की जीवनी)

बियाबान की ओर

अमेरिका के अलास्का सिटी में फेयरबैंक से मीलों आगे बर्फीले निर्जन इलाके में जिम गिलियन की नजर दूर सड़क किनारे खड़े किसी अंजाने पर पड़ी जो ठंड से ठिठुर रहा था औऱ लिफ्ट की गुजारिश में अंगूठा उठाए इशारे कर रहा था। वह अलास्का के उस बर्फीले बियाबान में और आगे जाना चाहता था। अठारह-उन्नीस साल के उस नौजवान के पीठ पर सेमीऑटोमेटिक रायफल टंगा था जिसे देखकर अलास्का के इस फोर्टी-नाइन्थ स्टेट में शायद ही कोई मोटरवाला लिफ्ट देने के लिए रुकता। लेकिन, गिलियन ने उसके दोस्ताना हाव-भाव को देखकर सड़क के किनारे की ओर अपनी ट्रक रोकी और उस बच्चे को अंदर आने को कहा।

नौजवान उछलकर ट्रक में चढा और अपना नाम एलेक्स बताया।

‘एलेक्स’- गिलियन प्रश्न करने की मुद्रा में बोला। वह एलेक्स का पूरा नाम जानना चाहता था।

“सिर्फ एलेक्स’- नौजवान ने उसके जिज्ञासा पर पानी फेर दिया। पांच फीट सात-आठ ईंच का गठीले बदन वाले एलेक्स ने अपनी उम्र 24 साल बताई और अपना घर दक्षिण डाकोटा बताया। उसने बताया कि वह सुदूर अलास्का मे देनाली नेशनल पार्क के अंतिम छोड़ पर उतरेगा और आगे की झाड़ियों वाले रास्ते से पैदल चलकर दुनिया को छोड़कर और लोगों से दूर अकेले में कुछ महीने बिताएगा।

पेशे से इलेक्ट्रिसियन गिलियन देनाली नेशनल पार्क वाले रास्ते पर 240 मील दूर एंकरेज जा रहा था; उसने एलेक्स से कहा कि वह जहां चाहेगा, उसे वह वहां तक छोड़ देगा। गिलियन को एलेक्स के बैग का वजन बमुश्किल 25-30 पौंड लग रहा था। शिकार का शौकीन और जंगलों में समय बिता चुके गिलियन को इस बात ने चौंकाया क्योंकि वह जानता था कि इतने कम सामान के सहारे ऐसे निर्जन इलाके में महीनों नहीं बिताया जा सकता जबकि अभी बसंत आने में देर है और अलास्का में चारों तरफ जमीन पर सिर्फ बर्फ बिछा है। गिलियन याद करने लगा कि इस तरह के ट्रिप पर वह इतने कम सामान के साथ कभी नहीं गया और जाना संभव भी नहीं था।

धूप निकल जाने से दिन धीरे-धीरे निखर रहा था। जब ट्रक तनाना नदी के किनारे के उंचे ढलानों से नीचे उतर रही थी तब एलेक्स दूर तक दक्षिण में फैले तेज और सर्द हवाओं में झूमते जंगल और पहाड़ियों से भरे दृश्य को देखने में खो गया। गिलियन अचंभित था। उसने सोचा कि कहीं वह किसी क्रेजी आवारा को तो ट्रक में नहीं बैठा लिया है जो बदनाम जैक लंडन की नेचर फैंटेसी जीने के लिए उत्तर के इस निर्जन में भागता है। अलास्का वैसे भी इस तरह के स्वप्नजीवी और समाज में मिसफिट लोगों का गढ रहा है जो सोचते हैं कि उत्तर के आखिरी छोड़ पर शुद्ध हवाओँ वाला ये सुनसान-विस्तार फलक उसके जीवन के सभी जख्मों को भर देगा।

गिलियन जानता था कि अलास्का से बाहर रहने वाले लोग मैगजीनों में अलास्का के बारे में पढकर फैंटेसी में डूब जाते हैं औऱ अपना बोरिया-बिस्तरा उठाकर यह सोचकर चल देते हैं कि वह दुनिया-समाज से दूर स्वर्ग में जीने जा रहे हैं जहां उन्हें बेहतर जीवन मिलेगा। लेकिन जब वह यहां पहुंचते हैं तब मैगजीन में लिखे झूठ का पता उन्हें चलता। यहां की जंगली झाड़ियां किसी को आशा, आनंद और जीवन नहीं देती। बड़ी-बड़ी नदियों का बहाव बहुत तेज है। यहां के मच्छड़ आदमी को जिंदा खा जाने को तैयार रहते हैं। यहां शिकार के लिए जंगली-जानवर भी बहुत कम हैं। यहां का जीवन पिकनिक नहीं है।

फेयरबैंक से देनाली पार्क के अंतिम छोड़ तक जाने में लगभग दो घंटे लगे। एलेक्स की बातें सुनकर गिलियन को वह पागल सा लगा। फिर भी, गिलियन को उसकी चिंता हुई। एलेक्स ने बताया कि उसके बैग में सिर्फ दस पाउंड चावल है। अप्रील की इतनी भयानक सर्दी को झेलने के लिए एलेक्स ने पर्याप्त कपड़े भी नहीं लिए थे। एलेक्स के सस्ते चमड़े का जूता वाटरप्रूफ और सर्दी से बचाने वाला नहीं था। उसका रायफल भी महज .22 बोर की क्षमता वाला था जिससे बड़े जानवरों का शिकार करना मुश्किल था, जिसे मारकर वह ऐसे बियाबान में ज्यादा दिन तक खाने का इंतजाम कर सकता था। उसके पास और कोई हथियार नहीं था। दिशा का पता लगाने के लिेए कम्पास भी नहीं था। उसके पास सिर्फ एक पुराना मैप था।

फेयरीबैंक से अलास्का पहाड़ियों के बीच के रास्ते में नेनाना नदी पर बने पुल से जब ट्रक गुजर रहा था तो एलेक्स ने नदी के तेज धार को देखकर कहा कि उसे नदी के पानी से डर लगता था। एक साल पहले मैक्सिको में वह समंदर में डोंगी लेकर निकल पड़ा था और वह डूबने ही वाला था कि तेज लहर के तूफान ने उसे किनारे ला पटका। कुछ देर बाद एलेक्स ने मैप निकाला और उस पर लाल निशान के द्वारा चिह्नित किए गए एक रास्ते के बारे में बताया जिसे स्टेम्पेड ट्रेल कहा जाता था। इस रास्ते का निशान अलास्का के रोडमैप पर भी नहीं मिलता था। इस रास्ते पर शायद ही आज तक कोई चला था। एलेक्स ने बताया कि वह रास्ता 40 मील का था और वह रास्ता आगे चलकर धीरे-धीरे गुम हो जाता था। माउंट मैकिनले पहाड़ों के उस दिशाहीन उत्तरी इलाके में एलेक्स जाना चाहता था।

गिलियन को एलेक्स की योजना मूर्खतापूर्ण लगी और उसने एलेक्स को लौट जाने को कहा। गिलियन ने एलेक्स से कहा कि वहां उसे शिकार करने के लिए आसानी से कोई जानवर नहीं मिलेगा। जब उसकी बातों का एलेक्स पर कोई असर नहीं हुआ तो गिलियन ने उसे वहां के खतरनाक भालुओं की कहानी सुनाकर डराने की कोशिश की। एलेक्स बिल्कुल नहीं डरा। उसने कहा कि भालू के आने पर वह पेड़ पर चढ जाएगा। तब गिलियन ने बताया कि उस जगह कोई बड़ा पेड़ नहीं है, जिसे भालू गिरा नहीं सकता। लेकिन एलेक्स अपने इरादे से एक ईंच पीछे नहीं नहीं हटा। उसे गिलियन ने जो-जो कहा, वह उसे उसका जबाब देता गया। गिलियन ने उसे अपने साथ एंकरेज शहर चलने को कहा जहां वह उसे जरूरत के सामान खरीद देगा; उसके बाद वह जहां जाना चाहे, चला जाय। एलेक्स ने यह कहते हुए गिलियन का प्रस्ताव ठुकरा दिया कि उसके पास जितना सामान है, उसे वह अपने लिए काफी समझता है।

‘क्या तुम्हारे पास शिकार करने का लाईसेंस है’ गिलियन के इतना पूछने पर एलेक्स ने व्यंग्यात्मक मुस्कान के साथ कहा, “नहीं, लाईसेंस नहीं है। मैं कैसे अपना पेट भरूंगा, सरकार को इससे कोई लेना-देना नहीं होना चाहिए। मारो, साले उसके नियम-कानुनों को।”

क्या तुम्हारे मां-बाप या दोस्त तुम्हारे इस आवारगी के बारे में जानते हैं- गिलियन के ऐसा पूछने पर एलेक्स ने कहा कि उसकी अपने परिवार से दो साल से बातचीत नहीं हुई थी और उसके इस योजना के बारे में किसी को ऩहीं मालूम। ” मैं अपने उपर आए किसी भी खतरे से अकेले लड़ सकता हूं।” एलेक्स की दृढता देखकर गिलियन को लगा कि वह सच में यह जुनुनी था।

एलेक्स जल्दी से जल्दी स्टेम्पेड ट्रेल को पारकर दिशाहीन रास्ते की ओर बढ जाना चाहता था। स्टेम्पेड ट्रेल के आखिरी छोड़ तक जाने में गिलियन के ट्रक को तीन घंटे लगे। कुछ दूर तक तो सड़क अच्छी थी लेकिन बाद का रास्ता बेहद खराब था। चारों तरफ बर्फ ही बर्फ था। गर्मियों में यह रास्ता चलने लायक रहता है लेकिन जाड़े में नहीं। हाईवे से स्टेम्पेड ट्रेल पर दस मील आगे जाने पर गिलियन को लगा कि आगे जाने पर ट्रक के फंसने का खतरा है। उत्तरी अमेरिका के विशालकाय पहाड़ों की चोटियों क्षितिज को चूमती हुई चमक रही थी।

ट्रक रुका और एलेक्स उतर गया। एलेक्स ने गिलियन को अपने पास बची हुई आखिरी संपत्ति; घड़ी, कंघी और 85 सेंट देने की कोशिश की लेकिन गिलियन ने नहीं लिया।

“अगर तुम नहीं भी लोगे, फिर भी मैं इसे फेंक दूंगा। मैं नहीं जानना चाहता कि कितना समय हुआ है .या आज कौन सा दिन है या मैं अभी किस जगह पर हूं। ये सब बातें जानना निरर्थक है।” एलेक्स हंसते हुए बोला। इससे पहले कि एलेक्स अपने रास्ते पर जाना शुरु करता, गिलियन ने ट्रक के सीट के पीछे रखे रबड़ के मजबूत, पुराने जूते को एलेक्स को देते हुए कहा, “इसे रख लो। ये थोड़े बड़े हैं, तुम इसे अपने जूते को उपर से पहन लो। तुम्हारा पैर गर्म रहेगा।”

“मुझपर कितना एहसान करोगे गिलियन?”

“कोई बात नहीं, एलेक्स”- गिलियन ने उसे अपना फोन नंबर दिया, जिसे एलेक्स ने अपने नाईलॉन के वॉलेट में संभालकर रख लिया।

“एलेक्स अगर तुम जिंदा लौटे तो मुझे फोन करना। मैं तुमको बताउंगा कि ये पुराने जूते तुम मुझे कैसे लौटाओगे।”

गिलियन की पत्नी ने उसे लंच के लिए सैंडविच, पनीर और कॉर्नचिप्स दिया था, उसे भी उसने एलेक्स को दे दिया। एलेक्स ने गिलियन को अपना कैमरा देकर उसे एक तस्वीर लेने को कहा। कैमरा वापस लेकर धीरे-धीरे एलेक्स अपने रास्ते पर चल पड़ा और बर्फीली वादियों में गिलियन की नजर से ओझल हो गया। मंगलवार, 28 अप्रैल 1992 का दिन था वह। गिलियन वापस हाईवे पर लौट गया। एंकरेज के रास्ते पर एक पुलिस चौकी को उसने एलेक्स के बारे में बता दिया। गिलियन ने सोचा कि एलेक्स को भूख लगेगी तो वह वापस लौट आएगा। लेकिन एलेक्स नहीं लौटा।

गुमशुदा पगडंडी पर एक बस की अंजान त्रासदी

स्प्रूस के काले घने जंगल उस बर्फीले रास्ते के दोनों तरफ खड़े थे। हवा के झोंकें पेड़ों के ऊपर जमे बर्फ के सफेदी को उड़ा ले गए थे और कम रौशनी में एक-दूसरे की तरफ झुके हुए ये बेहद डरावने और खतरनाक लग रहे थे। चारों तरफ गहरी शान्ति छाई थी। वह जगह इतनी अकेली, सुनसान, जीवन- विहीन और सर्द थी कि उस माहौल को उदासी भरा भी नहीं कहा जा सकता था। लेकिन ऐसे माहौल के अंदर एक स्याह हंसी छुपी थी, ऐसी हंसी जो उदासी से भी ज्यादा दर्द देनेवाली हो; ऐसी हंसी जिसमें खुशी का नामो-निशान न हो; बर्फ के क्रिस्टल से भी ज्यादा सर्द हंसी, जिसमें हमेशा खुद को सही कहने वाली क्रूरता हो। जीवन की निरर्थकता और जीवन जीने के प्रयासों को देखकर आत्मा की अतल गहराईयों से निकली एक अबूझ हंसी। कुछ ऐसी ही हंसी अपनी नीरवता में छुपाए था यह सर्द दिलवाला, जंगली और खतरों से भरा था उत्तर का ये सुनसान सरजमीं।  (जैक लंडन की किताब ह्वाईट फैंग से उद्दृत)

कांतिष्णा मैदान के ऊपर झुके हुए माउंट मैकिनले के विशाल पहाड़ों की सीमा शुरु होने से ठीक पहले  अलास्का रेंज के पहाड़ों के उत्तरी किनारे पर ऊंचा उठते और नीचे ढलान वाले आऊटर रेंज कहलाने वाली छोटे रिजों की श्रृंखला जमीन पर इस तरह लग रही था जैसे बेतरतीब बिस्तर पर कोई मुड़ा-तुड़ा कम्बल पड़ा हो। पूरब से पश्चिम दिशा तक फैले इस आऊटर रेंज के दोनों छोरों के ऊंची चोटियों के बीच पांच मील के इस लहरदार रिज के ऊपर दलदली सतह थी जिसमें झाड़ियों और स्प्रूस के पत्तों और छालों का मिलावट थी। इसी उतार-चढाव वाले घुमावदार रास्ते के जमीनी हिस्से पर स्टेम्पेड ट्रेल बनाया गया था, जिस पर चलकर क्रिस मैकेंडलेस आगे गया था।

स्टेम्पेड ट्रेल को 1930 में अलास्का के अर्ल पिलग्रिम ने बनवाया था। अर्ल पिलग्रिम अलास्का के महान माईनर थे जिन्होंने तालकोट नदी के पास स्टेम्पेड क्रीक पर मौजूद एन्टीमनी धातु के अयस्कों को ढोने के लिए यह रास्ता बनवाया था। 1961 में फेयरबैंक के युतान कंस्ट्रक्शन कम्पनी ने इस रास्ते को बेहतर बनाने का ठेका लिया। इस कम्पनी ने इसे मजबूत सड़क बना दिया ताकि ट्रक के द्वारा अयस्कों को ढोया जा सके। सड़क बनाने वाले मजदूरों को रहने के लिए कम्पनी ने तीन बसों को रखा, जिसमें सोने के लिए एक बेड और रसोई के लिेए स्टोव सहित अन्य सामान रखा था। इस प्रोजेक्ट को 1963 में रोक दिया गया। तब तक लगभग पचास मील सड़क बन चुकी थी लेकिन नदियों पर एक भी पुल नहीं बनाया जा सका था जिसके कारण बरसात मौसम में बाढ वाले इन ऩदियों को पार करना असंभव सा था। प्रोजेक्ट के रुकने के बाद युतान दो बसों को वापस ले आई, लेकिन एक बस उसने शिकारियों के ठहरने के लिए छोड़ दिया। उसके तीन दशक बाद, सड़क का नामो-निशान मिट चला था और उसपर उत्तरी अमेरिकन जंतु बीवरों ने तालाब बना डाले थे और जंगली घनी झाड़ियां उग आयी थी।

युतान द्वारा छोड़ा गया बस वहीं का वहीं था। 1940 में बना जंग खा रहा ये पुराना इंटरनेशनल हार्वेस्टर बस स्टेम्पेड ट्रेल के उस जंगली इलाके में दूर से बड़ी काली मक्खी की तरह लगता था। उसका इंजन नष्ट हो चुका था। खिड़की के शीशे टूट चुके थे और उसके फर्श पर ह्विस्की के पुराने बोतल बिखड़े पड़े थे। उसके ऊपर चढा हरा-उजला पेंट उखड़ रहा था। मौसम इतना खराब रहता था कि साल में छह-सात महीने इस बस को शायद ही किसी आदमी का दर्शन होता होगा।

1980 में देनाली नेशनल पार्क के अंदर कांतिष्णा की पहाड़ियों और उत्तरी पहाड़ी श्रृंखला को शामिल किया गया लेकिन नीचले क्षेत्रों को उसके अंदर नहीं रखा गया जिसमें स्टेम्पेड ट्रेल का आधा हिस्सा आता था। साढे सात मील का यह दायरा तीन ओर से नेशनल पार्क के सुरक्षित क्षेत्र से घिरा था और इसके अंदर भेड़िये, भालू, हिरण, मूज और अन्य जानवर रहते थे। यह रहस्य उन स्थानीय शिकारियों को मालूम था। जैसे ही मूज इस इलाके में निकलने शुरु होते थे, कुछ शिकारी इस बस में आकर अपना डेरा डाल लेते थे।

6 दिसम्बर 1992 में एंकरेज शहर के आटो बॉडी शॉप के मालिक केन थॉम्पसन, उसका एक कर्मचारी गार्डन सेमेल और केन का दोस्त फ्रेडी सॉनसन, अपने-अपने ट्रक में सवार होकर तीनों मूज का शिकार करने के लिेए उस बस की ओर रवाना हुए। वहां तक पहुंचना जोखिम भरा सफर था। स्टेम्पेड ट्रेल सड़क जहां तक ठीक था, वहां से दस मील आगे खराब रास्ते पर चलने के बाद तेक्लानिका हिमनदी मिलता था जिसका बर्फीला पानी पारदर्शी था। एक संकरा रास्ता इस हिमनदी को स्टेमपेड ट्रेल से मिलाता था। उस संकरे रास्ते को पार करने के बाद अचानक सामने तेक्लानिका नदी के तेज बहाव का सामना होता था जो आगे बढने से लोगों को रोक देता था।

थाम्पसन, सेमेल और स्वान्सन भी साहसी अलास्कियन थे। तेक्लानिका नदी के किनारे पहुंचकर तीनों आगे जाने का रास्ता तलाशने लगे। खोजते-खोजते एक ऐसा जगह दिखा जहां नदी की गहराई कम नजर आ रही थी। आगे-आगे थाम्पसन अपना ट्रक लेकर चला। उसके गाड़ी में लगा हुक पीछे से आ रहे गार्डन के ट्रक में लगा था, ताकि गाड़ी के बहने की स्थिति में वह उसे पीछे खींच सके। उसके पीछे सॉनसन की गाड़ी थी। तीनों उस पार सुरक्षित पहुंचने में कामयाब रहे।

उसके आगे ट्रक का जाना मुमकिन नहीं था। तीनों पूरी तैयारी के साथ इधर आते थे। आगे जाने के लिए एक तिपहिया वाहन और एक फोर-व्हीलर ट्रक पर लदा था। दोनों गाडियों को उतारकर तीनों उसे लेकर आगे चल पड़े। तीनों का लक्ष्य उसी खटारे बस तक पहुंचना था, जिसे युतान कम्पनी वहां छोड़ आयी थी। वहां से कुछ सौ गज बाद रास्ते पर वहां रहने वाले एक जल-जंतु वीबर द्वारा बनाए गए कई छोटे-छोटे तालाब थे। डायनामाइट से इन तालाबों का तटबंध तीनों ने उड़ा दिया और पानी बहा दिया। आगे पत्थरों से भरे छोटे-छोटे नाले औऱ घने झाड़ियों को पार करते हुए तीनों दोपहर देर बाद तीनों बस तक पहुंचे। तीनों की नजर बस से करीब पचास फुट की दूरी पर एक युवक औऱ युवती पर पड़ी। दोनों डरे-सहमे से खड़े थे। दोनों एंकरेज शहर से थे।

दोनों मे से कोई बस के अंदर नहीं जा रहा था लेकिन वे बस के इतने करीब खड़े थे कि अंदर से आते दुर्गंध को महसूस कर सकते थे। बस के पिछले हिस्से के दरवाजे के ऊपर लकड़ी से लाल रंग का सिग्नल फ्लैग लगा था, जिसमें फ्लैग के रुप में एक लाल मोजे को बांध दिया गया था। दरवाजा हल्का सा खुला था और इसके ऊपर एक कागज चिपका था जिसपर कुछ लिखा हुआ था। यह सब किसी गड़बड़ की तरफ इशारा कर रहा था।

वह कागज निकोलॉय गोगोल के किताब से फाड़ा गया था और उसके ऊपर अंग्रेजी के बड़े अक्षरों में यह लिखा हूआ थाः-

“एस. ओ. एस. मेरी मदद करो। मैं घायल हूं और मरने वाला हूं। इतना कमजोर हूं कि उठकर चल नहीं सकता। मैं बिल्कुल अकेला हूं। भगवान कसम, मैं मजाक नहीं कर रहा। मेरी जान बचा लो। मैं अपने लिए पास से जंगली बेरी लाने जा रहा हूं। शाम तक लौटूंगा। धन्यवाद, क्रिस मैंकेंडलेस।”

एंकरेज से आया हुआ जोड़ा उस नोट को पढकर और अंदर से आते दुर्गंध के कारण बस के अंदर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। सेमेल हिम्मत जुटाकर आगे बढा। खिड़की के पास से देखने पर अंदर एक रेमिंगटन रायफल, गोलियों का एक डब्बा, आठ या नौ किताबें, कुछ फटे जीन्स, खाना बनाने का सामान और एक मंहगा बैग दिखा। बस के पिछले हिस्से में बेड के ऊपर नीले रंग का एक स्लीपिंग बैग पड़ा था जिसे देखने से लग रहा था कि कुछ उसके अंदर था। लेकिन सेमेल के लिए यह विश्वास करना कठिन था कि अंदर कोई आदमी हो सकता था। गाड़ी के पिछले हिस्से में एक लकड़ी के टुकड़े पर खड़े होकर सेमेल ने उस नीले बैग को हिलाया। उसे अब विश्वास था कि बैग के भीतर कुछ था लेकिन जो भी था, वह ज्यादा वजनी नहीं था। उस बैग के दूसरी तरफ जाकर देखने पर अंदर से एक सिर बाहर निकला हुआ दिखा और तब जाकर सेमेल को पता लगा कि अंदर क्या है। क्रिस्टोफर मैकेंडलेस अलास्का के इस सुनसान में ढाई हफ्ते पहले मर चुका था।

सेमेल ने उस लाश को वहां से निकाल ले जाने की सोची। लेकिन ना तो थाम्पसन के, ऩा ही उसके और ना ही उस जोड़े की गाड़ी में इतनी जगह थी कि इस मरे आदमी को ले जाया जा सके। कुछ देर बाद वहां एक शिकारी पहुंच गया जिसका नाम बुच किलियन था और जो पास के हिली शहर का रहने वाल था।

किलियन के पास आठ चक्केवाली गाड़ी थी। सेमेल ने उसे लाश को गाड़ी से ले जाने को कहा लेकिन किलियन तैयार नहीं हुआ। उसका कहना था कि यह काम अलास्का स्टेट के पुलिस पर छोड़ दिया जाय।

किलियन कोल माईनर था और फायर डिपार्टमेंट में इमर्जेंसी मेडिकल टेक्नीसियन का भी काम करता था। उसके ट्रक पर टू-वे रेडियो था। लेकिन किलियन जब किसी से संपर्क स्थापित कर पाने में असफल रहा तब वह ट्रक लेकर हाईवे की तरफ पीछे लौटा। लगभग पांच मील जाने के बाद उसके रेडियो का संपर्क हिली के रेडियो आपरेटर से हुआ। आपरेटर को उसने पुलिस को यह सूचित करने को कहा कि सुषाना नदी के पास बस में एक आदमी प़ड़ा था जो लगता था कि मर चुका था।

अगली सुबह लगभग साढे आठ बजे एक पुलिस हेलिकॉप्टर तेज गर्जना करता हुआ, धूल और एस्पन की पत्तियों को उड़ाता हुआ बस के करीब उतरा। पुलिस ने बस की बारीकी से जांच की और क्रिस मैकेंडलेस की लाश,उसका कैमरा और डायरी लेकर फिर वापस उड़ चली। उस डायरी में अंतिम दो पन्नों पर क्रिस्टोफर ने अपने आखिरी सप्ताह के बारे में लिखा था। डायरी में कुल 113 प्रविष्टियां लिखी गई थी। हर प्रविष्टि में कुछ रहस्य भरी बातें बहुत कम शब्दों में बयान की गई थी।

क्रिस की लाश को एंकरेज ले जाया गया जहां साईंटिफिक क्राईम डिटेक्शन लेबोरेटरी में उसकी चीड़-फाड़ की गई। शरीर इतने बुरे तरीके से सड़ चुका था कि यह पता लगाना मुश्किल था कि मौत कब हुई थी। जांच करने वाले को किसी प्रकार के अंदरुनी चोट का पता नहीं चला। शरीर में वसा का नामोनिशान नहीं था। मरने से बहुत पहले हड्डियां सूखने लगी थी। क्रिस के मौत का कारण भूखमरी बताया गया।

क्रिस का हस्ताक्षर एस. ओ. एस को लिखे नोट के नीचे लिखा था इसलिए उसके नाम का पता चल गया। उसके कैमरे में खुद अपने द्वारा खींची गई कई तस्वीरें थी जिससे उसके असली हुलिए के बारे में जानकारी हो गई। लेकिन, चूंकि उसके पास कोई पहचान-पत्र नहीं था इसलिेए किसी को यह मालूम नहीं था कि वह कौन था, कहां से आया था और अलास्का में उधर क्या करने गया था?

….जारी…