विवाद पैदा करना तथा उसे हवा देना नामवर सिंह की पुरानी आदत : जसम

विवाद पैदा करना और उन विवादों को हवा देना प्रसिद्ध आलोचक और प्रगतिशील लेखक संघ के अध्यक्ष नामवर सिंह की पुरानी आदत है। लखनऊ में आयोजित प्रगतिशील आंदोलन की 75वीं सालगिरह के मौके पर भी उन्होंने यही किया। देश के विभिन्न हिस्सों से आये लेखकों को सुनना उन्हें मंजूर नहीं था।

इस सिस्टम में रांग फान्ट की तरह थे अनिल सिन्हा

: अनिल सिन्हा मेमोरियल फाउंडेशन का पहला आयोजन संपन्न : जनसांस्कृतिक मूल्यों के लिए काम करेगा अनिल सिन्हा मेमोरियल फाउंडेशन- वीरेन डंगवाल : भूमंडलीकरण के खिलाफ संघर्ष करने वालों का संबल बनेगा अनिल सिन्हा मेमोरियल फाउंडेशन : हर साल दिया जाएगा अनिल सिन्हा स्मृति सम्मान : अनिल के व्यक्तित्व में  संघर्ष की अदम्य इच्छाशक्ति थी- आनंद स्वरूप वर्मा :

डा. सेन की सजा के खिलाफ लखनऊ में कई संगठनों का प्रदर्शन

जसमछत्‍तीसगढ़ की निचली अदालत द्वारा विख्यात मानवाधिकारवादी व जनचिकित्सक डॉ. बिनायक सेन को दिये उम्रकैद की सजा के खिलाफ तथा उनकी रिहाई की माँग को लेकर जन संस्कृति मंच (जसम) की ओर से 2 जनवरी 2011 को लखनऊ के शहीद स्मारक पर विरोध प्रदर्शन व सभा का आयोजन किया गया। इसके माध्यम से लखनऊ के लेखकों, संस्कृतिकर्मियों, नागरिक अधिकार व जन आंदोलनों से जुड़े कार्यकर्ताओं ने विनायक सेन की सजा पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि इस तरह का फैसला हमारे बचे-खुचे जनतंत्र का गला घोटना है। यह नागरिक आजादी और लोकतंत्र पर हमला है। इसलिए बिनायक सेन की रिहाई का आंदोलन लोकतंत्र को बचाने का संघर्ष है।

‘शूद्रों का प्राचीनतम इतिहास’ और ‘गदर जारी रहेगा’ का 26 को लोकार्पण

: शूद्रों का प्राचीनतम इतिहास : एसके पंजम की पुस्तक ‘शूद्रों का प्राचीनतम इतिहास’ में वैज्ञानिक व तर्कसंगत तरीके से इस सवाल का जवाब खोजा गया है कि शूद्र वर्ग कौन है, इसकी उत्पति कैसे हुई ? इसी क्रम में सृष्टि, पृथ्वी व जीव की उत्पति से होते हुए भारत में नस्लों की उत्पति तथा शूद्र वर्ण एवं जाति नहीं, बल्कि नस्ल हैं, इसका विशद अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। वैदिक काल में शिक्षा, सभ्यता और संस्कृति की क्या स्थिति रही है, बौद्ध काल में शिक्षा, आर्थिक व सामाजिक व्यवस्था कैसी रही है, भारतीय समाज में दास प्रथा और वर्ण व्यवस्था व उसकी संस्कृति व संस्कार किस रूप में रहे हैं आदि का वृहत वर्णन है।

तीसरा लखनऊ फिल्म उत्सव 8 अक्तूबर से

: प्रतिरोध का सिनेमा :  8, 9 व 10 अक्तूबर 2010 : वाल्मीकि रंगशाला (उ0 प्र0 संगीत नाटक अकादमी), गोमती नगर, लखनऊ : मित्रों, कला माध्यमों से यह उम्मीद की जाती है कि वे हमारे समाज और जीवन की सच्चाइयों को अभिव्यक्त करें। सिनेमा आधुनिक कला का सबसे सशक्त और लोकप्रिय कला माध्यम है। लेकिन इस कला माध्यम पर बाजारवाद की शक्तियाँ हावी हैं। मुम्बइया व्यवसायिक सिनेमा द्वारा जिस संस्कृति का प्रदर्शन हो रहा है, वह जनचेतना को विकृत करने वाला है। सेक्स, हिंसा, मारधाड़ इन फिल्मों की मुख्य थीम है।