ओके-टाटा बॉय-बॉय

: कुछ बातें बेमतलब : अब जब बिहार में चुनाव फुनाव खत्म हो गया। सत्य की जीत हुई, असत्य की हार हुई। मुख्यमंत्री ही नहीं, उप मुख्यमंत्री भी बन गए। मंत्री भी बन गए। विभाग भी बंट गए। नीतीश कुमार ये तूने क्या किया। कुछ नहीं ख्याल किया हम कलमघिस्सुओं का। ले दे के इतना ही छोड़ दिया कि कुछ और मंत्री बन सकते हैं। चलो इतना ही काफी है – हमारे टाइम पास के लिए। कर लेंगे। एक आप ही नहीं हो देश में। बहुत सारे लोग हैं टाइम पास के लिए। हम उन लोगों में से नहीं हैं कि बिहार की सड़क से गुजरने वाले ट्रकों से बिहार पुलिस की चौथ वसूली की गिनती करें। ट्रक के गुजर जाने के बाद पढ़ते रहें – ओके-टाटा बॉय-बॉय।

कुछ बातें बेमतलब

जुगनू शारदेयआज अंतरराष्टीय वृद्ध जन दिवस है। रेल में हम 60 साल की उम्र में बुजुर्ग हो जाते हैं। कहते हैं कि साठा तो पाठा। न जाने कितनी लाठियों के सहारे हम साठा तो पाठा लोग चल रहे हैं। एक लाठी अदालत की भी चली साठ साल में। साठ साल लगे अदालत को यह समझने में कि आस्था से लड़ना कितना मुश्किल है। कुछ-कुछ वैसा ही फैसला अदालत ने दिया कि ले भाई तू भी ले ले हमारा फैसला कि तूझे फिर जाना ही है सुप्रीम कोर्ट। हो आ।