गाली देने के लिए गाली बकने की जरूरत नहीं होती : कमाल खान

 कमाल खान: इंटरव्यू : कमाल खान (वरिष्ठ पत्रकार, एनडीटीवी) : मुझे पार्टियों में जाना, किसी के आगे-पीछे करना, बिलावजह डिनर पर जाना अच्छा नहीं लगता : पुरस्कार मिलते रहते हैं पर मैं यही मानता हूँ कि हर आदमी को अपना काम चुपचाप लो प्रोफाइल हो कर करते रहना चाहिए : मैंने एक मुख्यमंत्री की कुछ जनविरोधी बातों पर एक बार कहा था-“ तुझसे पहले एक शख्स जो यहाँ तख्तनशीं था, उसको भी अपने खुदा होने का उतना ही यकीं था” :

नंगई और गालियां बनीं चैनलों की जरूरत!

बिग बॉस : बिग बॉस की बिग बहस : हम तो भई ऐसे हैं ऐसे ही रहेंगे, कहते हुए बिग बॉस मुंबई हाई कोर्ट पहुंचे और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को ठेंगा दिखाते हुए, कार्यक्रम को एडल्ट कार्यक्रमों की श्रेणी में रखते हुए रात 11 बजे के बाद दिखाए जाने के फरमान पर स्टे ले लिया। हमारे लोकतंत्र की खूबसूरती है कि ग़लत काम करने वालों को भी मौक़ा मिलता है और इस मौके का भी फायदा उठाते हुए वो और गलत काम कर लेते हैं।