कवियों ने कविता के बनते-बिगड़ते स्‍वरूपों पर सवाल उठाया

: कविता समय -2011′ आयोजित : ‘कविता समय’ 2011 से आयोजन की जिस श्रृंखला की शुरुआत हुई, उसे आमतौर पर भागीदारी कर रहे मित्रों ने ऐतिहासिक कहा। हांलाकि अशोक वाजपेयी ने हिन्दी में अधीरतापूर्वक ऐतिहासिकता लाद दिये जाने की प्रवृति से इसे जोड़ा, लेकिन इस रूप में तो यह उन्हें भी ऐतिहासिक लगा कि लंबे समय बाद इतने कवि सहभागिता के आधार पर साथ बैठकर ‘कविता के संकटों’ पर बात कर रहे हैं।

पोथी, पतरा, ज्ञान कपट से बहुत बड़ा है मानव

[caption id="attachment_18496" align="alignright" width="151"]कविता पाठ करते वीरेन डंगवालकविता पाठ करते वीरेन डंगवाल[/caption]: कानपुर में वीरेन डंगवाल का एकल काव्यपाठ : प्रख्यात कवि वीरेन डंगवाल ने कल दोपहर बाद कानपुर में कविता पाठ किया. एकल कविता पाठ. उसी कानपुर में जहां वे कुछ वर्षों पहले कुछ वर्ष तक रहे, अमर उजाला अखबार के संपादक के बतौर. जहां उन्होंने संपादक रहते हुए दर्जनों पत्रकारों को संपादकीय, मानवीयता, सरोकार और पत्रकारिता का पाठ पढ़ाया.

दर्द-ए-स्ट्रिंगर

एक दुखी स्ट्रिंगर का कविता पाठ : कहने को है वह पत्रकार, पर है बिलकुल बेकार / एक जूनून, एक सपना था, लगता देश ये अपना था  / कुछ करने की ख्वाहिश थी मन में, सच की आग धधकती तन में / बढ़ गया अनजान पथ पर करने को सपना साकार  / कहने को है वह पत्रकार, पर है बिलकुल बेकार