तो इसलिए अरुण शौरी से खुशवंत सिंह के रिश्ते तल्ख हुए

हिंदुस्तान टाइम्स में आज खुशवंत सिंह ने जो अपना वीकली कालम लिखा है, उसमें अरुण शौरी से लंबे समय से खराब रिश्ते का कारण बताया है. खुशवंत के मुताबिक- सच बोलना मेरे लिए अपराध बन गया. कालम के आखिर में अरुण पर भयंकर टिप्पणी करते हुए खुशवंत कहते हैं- वे ह्वील चेयर पर बैठे अपने अपाहिज बेटे की बेचारगी को दिखाने का कोई मौका नहीं चूकते. खुशवंत की भड़ास इस प्रकार है-

खुशवंत सिंह ने बरखा दत्त की फिर जय जय की

बरखा दत्त के लिए जमाना चाहे जो बोले, प्रख्यात स्तंभकार खुशवंत सिंह पर इसका असर नहीं पड़ता. वे अपनी बानी बोलते हैं. उन्हें बरखा दत्त पसंद हैं तो हैं. बरखा की पत्रकारिता उन्हें अच्छी लगती है तो लगती है. दूसरी दफा खुशवंत सिंह ने अपने कालम में बरखा दत्त की जयगान की है. कल रविवार के दिनों कई अखबारों में छपे खुशवंत सिंह के कालम में बरखा दत्त का जयगान काफी लोगों ने पढ़ा. आप भी पढ़ लीजिए…

कई संपादकों-पत्रकारों को पुरस्कार

सूचना और प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने कल ग्लोबल पंजाबी सोसायटी मीडिया पुरस्कार प्रदान किया. लाइफटाइम पुरस्कार मशहूर उपन्यासकार खुशवंत सिंह के अलावा डेली प्रताप के संपादक के. नरेंद्र और ट्रिब्यून के पूर्व संपादक एचके दुआ को भी दिया गया.