होटल में आओगी तो चैनल में नौकरी पाओगी

[caption id="attachment_19451" align="alignleft" width="74"]अमर आनंदअमर आनंद[/caption]उसके लिए वो दिन बेहद सदमे वाला था। प्रिंट और टेलीविजन मीडिया को 10 साल दे चुकी उस महिला पत्रकार को ऑफर किया गया- तुम्हारे लिए किसी भी चैनल में 45,000 की नौकरी दिला सकता हूं… बस एक रात तुमको फलाने होटल के कमरे में आना होगा। टेलीफोन पर ये घिनौना प्रस्ताव सुना रहा वो शख्स जो पत्रकारिता के नाम पर धब्बा था, कहता जा रहा था….

हिंदुस्तान, आगरा के युवा एनई पर युवती ने लगाए आरोप

हिंदुस्तान के आगरा आफिस में इन दिनों काम कम, बातें खूब हो रही हैं. और बातें करने का मौका उपलब्ध कराया है युवा न्यूज एडिटर ने. दरअसल उनके अधीन काम करने वाली एक युवती ने भरे आफिस में आरोप लगा दिया कि न्यूज एडिटर साहब उसको प्रमोट करने के बदले ओबलाइज करने की मांग करते हैं और ओबलाइज करने का उनका आशय शारीरिक संबंध बनाने से होता है.

‘मिशन’ पर हैं भास्कर की ये 18 महिला पत्रकार

दैनिक भास्कर में प्रकाशित विज्ञापन का एक अंशभोपाल में डेरा : कल्पेश  ‘बेरोजगार’ : भास्कर समूह कंटेंट प्लानिंग में लगातार बाजी मार रहा है. महिला दिवस के मौके पर यह समूह जो कुछ कर-करा रहा है, वह बेमिसाल है. आज दैनिक भास्कर में लगभग आधे पेज का विज्ञापन निकला है. इसे देखकर पता चलता है कि महिला दिवस के दिन जो अखबार मार्केट में आने वाला है, वह ‘महिलाओं के लिए, महिलाओं के द्वारा और महिलाओं का’ अखबार होगा. इसके लिए दैनिक भास्कर से जुड़ी कई महिला पत्रकार पिछले कई हफ्तों से जी-जान से जुटी हुई हैं. ये महिला पत्रकार भास्कर समूह के अलग-अलग एडिशनों में कार्यरत हैं और कई हफ्तों से भोपाल आकर सिर्फ एक ही मिशन में लगी हुई हैं. वह मिशन है महिला दिवस के दिन दैनिक भास्कर को सिर्फ अपना अखबार बनाना. यानि आधी दुनिया के हाथों तैयार, आधी दुनिया के लिए और आधी दुनिया का अखबार बनाना.

पत्रकारिता के पापियों का खुलासा करेंगी एक जर्नलिस्ट

पत्रकारिता के पापी” – एक महिला पत्रकार के संस्मरण

एक सुंदर लड़की। एंकर बनने का सपना। थोड़े से संपर्क और ढेर सारा उत्साह। निकल पड़ी। एक प्रदेश की राजधानी पहुंची। वहां उसकी एंकर सहेली वेट कर रही थी। गले मिली। आगे बढ़ी………. और अगले एक हफ्ते में ही वो सुंदर लड़की पत्रकारिता की काली कोठरी में कैद हो गई। वहशी संपादकों, रिपोर्टरों, कैमरामैनों के जाल में फंस गई। इन लोगों को चाहिए दारू और देह। इसी को पाने के लिए पत्रकारिता की दुकान सजा रखी थी।