‘शूद्रों का प्राचीनतम इतिहास’ और ‘गदर जारी रहेगा’ का 26 को लोकार्पण

: शूद्रों का प्राचीनतम इतिहास : एसके पंजम की पुस्तक ‘शूद्रों का प्राचीनतम इतिहास’ में वैज्ञानिक व तर्कसंगत तरीके से इस सवाल का जवाब खोजा गया है कि शूद्र वर्ग कौन है, इसकी उत्पति कैसे हुई ? इसी क्रम में सृष्टि, पृथ्वी व जीव की उत्पति से होते हुए भारत में नस्लों की उत्पति तथा शूद्र वर्ण एवं जाति नहीं, बल्कि नस्ल हैं, इसका विशद अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। वैदिक काल में शिक्षा, सभ्यता और संस्कृति की क्या स्थिति रही है, बौद्ध काल में शिक्षा, आर्थिक व सामाजिक व्यवस्था कैसी रही है, भारतीय समाज में दास प्रथा और वर्ण व्यवस्था व उसकी संस्कृति व संस्कार किस रूप में रहे हैं आदि का वृहत वर्णन है।

अजित वडनेरकर की किताब ‘सफ़र’ का विमोचन

आख़िरकार किताब आ ही गई। शब्दों का सफ़र नाम के ब्लॉग का परिष्कृत रूपान्तर पुस्तक की शक्ल में आए यह साध सफ़र के सभी साथियों समेत हमारे मन में भी अर्से से थी। शुक्रवार शाम भोपाल के हिन्दी भवन में चल रही राजकमल प्रकाशन की पुस्तक प्रदर्शनी में ही शब्दों का सफ़र का विमोचन हिन्दी के सुप्रसिद्ध उपन्यासकार मंज़ूर एहतेशाम ने किया।

”…शायरी ख़ुदकशी का धंधा है…”

[caption id="attachment_15556" align="alignnone"]लोकार्पण समारोहलोकार्पण समारोह : बाएं से दाएं- श्रीमती ख़ुशनुम राव, श्रीमती राजश्री बिरला, ललित डागा, डॉ.कर्ण सिंह, प्रो.नंदलाल पाठक और श्री विश्वनाथ सचदेव[/caption]

संगीत कला केंद्र द्वारा आयोजित एक भव्य समारोह में मुम्बई के वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. नंदलाल पाठक के काव्य संकलन ‘फिर हरी होगी धरा’ का लोकार्पण डॉ. कर्ण सिंह ने किया।