छह साल से बीमार मंगलजी चले गए

दीवाली का दिन। त्योहार की व्यस्तता के बीच, दिन भर के कई मिस कॉल अनदेखे रह गये। रात को देख रहा था, तो यशवंत सिंह के मिस कॉल पर नजर पड़ी। शायद दीवाली की शुभकामना के लिए कॉल किया होगा। यह सोचकर मैंने उनका नंबर मिला दिया। राम-राम और दीवाली की शुभकामना के बाद वे अचानक बोले, ‘सर, मंगलजी नहीं रहे!’ मैं अवाक रह गया।  पूछा, कब हुआ ये? ‘पिछले महीने। किसी ने मेरठ से फोन करके बताया। 15 दिन से ज्यादा हो गये।’