चाय-पानी के लिए खूब चमके कैमरों के फ्लैश

: पत्रकार एवं फोटोग्राफरों ने पंचायत चुनाव में प्रत्‍याशियों को जमकर नोचा : आजमगढ़ में पंचायत चुनाव के प्रत्याशियों के नामांकन के दौरान फोटोग्राफर्स और तथाकथित पत्रकारों की चांदी हो गई. गांव देहात से आने वाले उम्मीदवारों के नामांकन के लिए जाते समय डीएम कार्यालय पर ही ये प्रेस से जुड़े लोग प्रत्याशियों को घेर लेते थे. बाकायदा उनको माला फूल पहना कर समर्थकों को बगल में खड़ा कर फोटो और विसुअल लिए जाते थे. फिर कमर पर हाथ रख कर किनारे ले जाकर सेटिंग होती थी.

इंटर्नशिप के लिए सीएम, नौकरी के लिए पीएम

आशीष: गांधी की पत्रकारिता आउटडेटेड हो गई है : आदेश ने छह साल पहले गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज में दाखिला लिया था। वह आने वाले दस साल में खुद को प्रभु चावला, आशुतोष, दीपक चौरसिया के आस-पास देख रहा था। गौरतलब है कि इनमें एक भी पत्रकार प्रिंट के नहीं हैं। वैसे आदेश को जल्द ही यह बात समझ आ गई कि यह क्षेत्र उसके लिए नहीं है। तकरीबन दो साल पहले उसने पत्रकारिता को तौबा कर एक आयुर्वेदिक कंपनी के दवा बेचने का काम शुरु किया। इस काम से आदेश बीस-बाइस हजार रुपए हर महीने कमा लेता है।