एक आईपीएस की नजर में पुलिसिया दबंगई

[caption id="attachment_18293" align="alignleft" width="94"]अमिताभ ठाकुरअमिताभ ठाकुर[/caption]वर्दी; ऐसा शब्द, जो आजकल सुरक्षा भाव कम, खौफ ज्यादा पैदा करता है. रक्षा-सुरक्षा के लिए सृजित वर्दी की अब ज्यादातर चर्चा इसके भक्षक पक्ष पर केंद्रित होने लगी है. वर्दी; जिसे विपक्ष में रहlते हुए हर नेता गरियाता है, लेकिन सत्ता में आते ही इस वर्दी को साथ लिए चलने, उपयोग-दुरुपयोग के लिए बेताब होता है. इसी वर्दी के बारे में भड़ास4मीडिया पर भिलाई के प्रतिभाशाली जर्नलिस्ट आरके गाँधी की रिपोर्ट पढ़ी- “वर्दी वाले इन गुंडों को औकात में कौन लाएगा“. इसमें इन्होंने दो मामलों का जिक्र किया है.

वर्दी वाले इन गुंडों को औकात में कौन लाएगा

आरके गांधी: 15 जवानों ने पत्रकार वैभव और सुरेंद्र पर अपना ‘पौरुष’ दिखाया : सड़क-सड़क पर गिरा-गिरा कर बुरी तरह पीटा : ‘दबंग’ फिल्म देखकर निकल रहे कप्तान ने गार्ड को मरवा दिया :  छत्तीसगढ़ पुलिस की दबंगई बढ़ती जा रही है. एक महीने पहले ही बिलासपुर में एसपी की मौजदूगी में सिनेमाघर के गार्ड पर कहर बरपाने के बाद वर्दी के इन गुंडों ने भिलाई के पत्रकार को अपना निशाना बनाया. ईटीवी के संवाददाता वैभव पांडे और जी24 घंटे के कैमरामैन इस बार पुलिसिया दंबगई के शिकार बने. 15-15 पुलिसवालों ने मिलकर लात-घूसे और लाठी-डंडों से पत्रकारों को पिटा. ईटीवी के संवाददाता पर पुलिसिया कहर इस तरह बरपी की वह इस समय भिलाई के एक निजी अस्पताल में भर्ती है. उसके दोनों हाथ और पैरों में गंभीर चोटें आई हैं. पुलिसवालों की इस दबंगई के बाद भी किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने इस बारे में कुछ खास चिंता नहीं जताई है.