ब्लागरों की जुटान में निशंक के मंचासीन होने को नहीं पचा पाए कई पत्रकार और ब्लागर

: गंगा घोटाले को लेकर कुछ लोगों ने आवाज उठाई : पुण्य प्रसून बाजपेयी और खुशदीप सहगल ने किया बहिष्कार : नुक्कड़ समेत कई ब्लाग व ब्लाग एग्रीगेटर चलाने वाले और हिंदी ब्लागिंग को बढ़ावा देने के लिए हमेशा तन मन धन से तत्पर रहने वाले अपने मित्र अविनाश वाचस्पति का जब फोन आया कि 30 अप्रैल को शाम चार बजे दिल्ली के हिंदी भवन (जो गांधी शांति प्रतिष्ठान के बगल में है) में ब्लागरों की एक जुटान है तो मैं खुद को वहां जाने से रोक नहीं पाया.

खबरों का पीछा करता एक संपादक

पुण्य प्रसून बाजपेयीखबर को जब हाशिये पर ढकेलने की जद्दोजहद हो रही हो… खबरों को लेकर सौदेबाजी का माहौल जब संपादकों के कैबिन का हिस्सा बन रहा हो तब कोई संपादक खबर मिलते ही कुर्सी से उछल जाये और ट्रेनी से लेकर ब्यूरो चीफ तक को खबर से जोडऩे का न सिर्फ प्रयास करें बल्कि फोटोग्राफर से लेकर मशीनमैन और चपरासी तक को खबर को चाव से बताकर शानदार ले-आउट के साथ बेहतरीन हैडिंग तक की चर्चा करें तो कहा जा सकता है कि वह संपादक, संपादक नहीं जुनून पाल कर खबरों को जीने का आदी है। और यह जुनुन सरकारी रिटायमेंट की उम्र पार करने के बाद भी हो तब आप क्या कहेंगें. जी, एसएन विनोद ऐसे ही संपादक हैं।