संपादक के चलते असमय बंद हो गया पूर्वांचलदीप अखबार

बनारस से प्रकाशित होना वाला साप्‍ताहिक अखबार पूर्वांचलदीप 44 सप्‍ताह की अल्‍पायु में ही काल के गाल में समा गया.  29 मई से 4 जून के अंक के बीच इस अखबार ने आखिरी सांस ली. अपने अंत के साथ यह अखबार तीन लोगों को बेरोजगार कर गया. इस अखबार के बंद होने का कारण बने इसके अपने ही संपादक आशीष बागची. आइए बताते हैं असमय इस अखबार के बंद हो जाने का कारण.

श्‍मशान से दारूखाने पहुंचेगा सहारा!

राष्ट्रीय सहारा, वाराणसी का सिटी आफिस रामकटोरा में शिफ्ट होगा। इसका मासिक किराया 21 हजार तय किया गया है। सहारा का फिलहाल जो कार्यालय है वह हरिश्चंद्र श्मशान घाट के मोड़ पर है और सहारा कर्मियों का कहना है कि यह कार्यालय शहर से दूर है, इसलिए विज्ञप्ति आदि नहीं पहुंच पा रही है। इसलिए सहारा का सिटी आफिस रामकटोरा शिफ्ट होगा। मजे की बात यह कि जिस बिल्डिंग में सहारा का सिटी आफिस शिफ्ट हो रहा है उसके ठीक नीचे विदेशी दारु की दुकान है। इसे लेकर पूरे शहर में नयी नयी चर्चाओं का बाजार गर्म है।

जागरण, सिलीगुड़ी की अनोखी पहल!

: बनारस में गिफ्ट के लिए एक दूसरे से भिड़ते और गरियाते दिखे पत्रकार : अधिकांश शहरों में प्रेस कान्फ्रेंस के बाद गिफ्ट लेने के लिए पत्रकारों में होड़ मची रहती है। मगर, जागरण सिलीगुड़ी ने एक नायाब पहल की है। उसने इस गिफ्ट लेने की परंपरा पर खबर छापने की हिम्मत की है। उसने एक कालम शुरु किया है- नाम दिया है कही अनकही। दिनांक 8 फरवरी के अंक में ऐसा ही एक कालम पेज नंबर 6 पर छपा है। खबर इस प्रकार है-

तुलसी के खिलाफ खबर छपी तो पेमेंट रूक जाएगा!

राष्ट्रीय सहारा में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। एक हैं बाबू तुलसी सिंह राजपूत। पहले के कांग्रेसी अब पार्टी से निष्कासित। बनारस के सभी अखबारों में बड़े-बड़े विज्ञापन देते हैं। चंदौली में कांग्रेसी पर्यपेक्षक भाई जगताप को पीटने में कांग्रेस से शुक्रवार को बहरिया दिए गए। उनके खिलाफ एफआईआर तक हुआ है। यह तो महज एक घटना है। पर, असली खेल सहारा में हुआ है। यह खबर सहारा वाराणसी संस्करण में छोड़ दी गयी जबकि बनारस के बाकी अखबारों ने इसे पहले पेज पर स्थान दिया और इसके फालोअप की भी अनेक खबरें छापीं।