सोनिया, सिब्बल और मुखौटा मनमोहन

राजीव सिंह राजनीति में मुखौटा और मुखौटों के पीछे छिपे घिनौनी राजनीति का खेल खेलने वाले लोगों की चालें, जनता को हर तरीके से ठगने और उल्लू बनाने की कोशिशों में जुटी रहती हैं. ताज़ा उदहारण के रूप में 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में मनमोहन सिंह की चुप्पी, नए टेलीकाम मंत्री कपिल सिब्बल का निर्लज्ज बयान और सोनिया गांधी के आदर्शवादी पाखंडी बातों को लें.सोनिया गांधी ने एक तरफ कहा कि भारत आर्थिक विकास तो कर रहा है लेकिन नैतिक रूप से मर रहा है. उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि हमारे समाज के लोग लालची और बेईमान होते जा रहे हैं और एक खराब समाज का निर्माण कर रहे हैं.

पत्रकार कहीं क्रांतिकारी हिंसा की ओर न जाने लगे

पत्रकारिता में जिस तरह से पूंजीवादी शक्तियों का शोषण बढ़ता जा रहा है, उसे देखते हुए ऐसी संभावना बन सकती है कि पत्रकार क्रांतिकारी हिंसा का रास्ता अपनाकर चुन-चुन कर उन लोगों को मारे जो इस मानवीय क्षेत्र को पाशविक शोषण का शिकार बनाए हुए हैं. पत्रकारिता में ऐसे लोगों की कोई कमी नहीं, जिनके अंदर खुदी राम बोस, चंद्रशेखर आज़ाद और भगत सिंह वाला ज़ज्बा पलता है, लेकिन इस देश में उस ज़ज्बे की चिंगाड़ी को शोला बनाने वाली विचारधारा का अभाव है.