फेसबुक पर मदिरा महात्म्य… अथ श्री राजू मिश्रा उवाच

वेब-ब्लाग ने बहुत से लोगों को मंच प्रदान किया है. संपादकों से दूर. संपादन से परे. जो दिल में वो जमाने के सामने. इंटरनेट ने पोर्टल, ब्लाग, फेसबुक और ट्विटर जैसे माध्यमों के जरिए इस सदी के मनुष्यों को अभिव्यक्ति की सबसे बड़ी आजादी दी है. इसी कारण इसे न्यू मीडिया और भविष्य का मीडिया कहा जाता है. फेसबुक पर हिंदी समाज के लाखों लोग सक्रिय हैं. पत्रकार से लेकर आम पढ़े लिखे युवक तक फेसबुक के जरिए अपनी फोटो, विचार, भावना आदि को व्यक्त करते हैं.

‘कुत्ते वाली आंटी’ की ठंड से मौत

शीरीन महावीर अपने कुत्तों के साथ : अब यादें ही शेषरह-रहकर गूंजता कुत्तों का रुदन चर्च परिसर में रुकने से रोकता है। ये कुत्‍ते अपनी मां को खोकर अनाथ हो चुके हैं। उस मां को जिसने इन्‍हें जना तो नहीं था अलबत्‍ता पाला-पोसा अपनी औलाद की मानिन्‍द। जाड़ा पड़ा तो शीरीन ने अपने तन की फिक्र नहीं की, कुत्‍तों को बेहतरीन स्‍वेटर पहनाये। भोजन भी एक से बढ़कर एक। कभी गोश्‍त पका तो कभी दूध-ब्रेड से काम चला लिया। कड़ाके की ठंडक ने जब शीरीन महावीर को लीला तो संबंधी इतना नहीं रोये, जितना कि यह कुत्‍ते रोये। कुत्‍ते रोये ही नहीं बल्कि अभी भी चुप लगाने का नाम नहीं ले रहे। लखनऊ के इस्‍लामिया कालेज के बगल रेड चर्च परिसर में रहने वाली शीरीन महावीर को होश संभलते ही सड़क के आवारा कुत्‍तों से ऐसा लगाव हुआ कि पूरी जिन्‍दगानी होम कर डाली उन्‍होंने कुत्‍तों पर। शीरीन ने शादी नहीं की। क्‍यों नहीं की, इस सवाल पर शीरीन कहने लगती- क्‍या बताऊं साहब। अपने लिये तो सब जीते हैं। मैं तो कुछ भी नहीं करती इनके लिए। सब गाड ही करता-कराता है। मैं तो सिर्फ ऊपर वाले की वाचमैन हूं। शीरीन को अपनापे में कुछ लोगों ने खिताब दे डाला- ‘कुत्‍ते वाली आन्‍टी’ और आन्‍टी भी ऐसी कि कभी किसी की बात का बुरा नहीं माना।