रामोजी राव का नाम बदनाम कर रहे मैनेजर

भड़ास4मीडिया पर पिछले वर्ष एक खबर प्रकाशित की गई थी, जिसका शीर्षक था- नौकरी छोड़ा तो अब 75 हजार रुपये जुर्माना भरो! खबर में बताया गया था कि ईटीवी में जो पत्रकार नौकरी शुरू करते हैं तो उनसे किस तरह ढेर-सारे नियम-कानूनों से युक्त एक बांड भरवाया जाता है और तय समयावधि से पहले नौकरी छोड़ने के बाद बांड के नियम-शर्तों के आधार पर ईटीवी प्रबंधन पत्रकार से 75000 रुपये जुर्माना मांगता है। ईटीवी की यह अमानवीय पालिसी अब भी नहीं बदली है। इन अलोकतांत्रिक सेवा-शर्तों के एक भुक्तभोगी ने अपनी पीड़ा का बयान भड़ास ब्लाग पर किया है। क्या कोई बंधुआ मजदूरी की इस प्रथा को रोक सकता है? शीर्षक से प्रकाशित पोस्ट में भुक्तभोगी पत्रकार ने ईटीवी प्रबंधन द्वारा नौकरी छोड़ने के बाद वसूली के लिए भेजे गए धमकी भरे मेल और नौकरी ज्वाइन करते समय भरवाए गए बांड की शर्तों को उजागर किया है।

नौकरी छोड़ा तो अब 75 हजार रुपये जुर्माना भरो !!

ईटीवी में काम करने वाले मीडियाकर्मी हर कदम पर हैरान-परेशान रहते हैं। दूसरों के दुख-दर्द को दुनिया के सामने लाने-बताने-दिखाने वाले ये पत्रकार अपने प्रबंधन के पीड़ित बन जाते हैं। चतुर प्रबंधन इन्हें इस कदर जालिम नियम-कानूनों में कैद रखता है कि ये अपना हक तक मांगने की जुर्रत नहीं कर पाते। कुछ लोगों ने भड़ास4मीडिया को जब इस बारे में जानकारी दी तो एक टीम ने पूरे मामले की छानबीन की। इसके बाद जो कहानी सामने आई वो इस बड़े मीडिया हाउस पर बड़े काले धब्बे की तरह है। कुछ दस्तावेज भड़ास4मीडिया टीम के हाथ लगे हैं। इनमें से एक को प्रकाशित किया जा रहा है। यह दस्तावेज शोषण की पूरी कहानी बयान करता है। इससे पता चलता है कि ईटीवी मैनेजमेंट दास प्रथा के जमाने के नियम-कानूनों में अपने कर्मचारियों को जकड़े रहता है।