वे पीटते रहे, थक गये, मैं बेहोश हो गया

: इंटरव्यू (पार्ट-एक) : मुंतज़र अल ज़ैदी (इराकी पत्रकार) : बुश पर जूता फेंकना भी “पीसफुल” था… : वे बम बरसाते हैं, तब भी कुछ नहीं होता, हम हथियार पकड़ते हैं तो अपराधी हो जाते हैं : गांधी ज़िंदा हैं, ज़िंदगी की तरह :