‘सिंघम’ देखकर पुलिस अफसर कुछ सीखें तो बात बने

: दुनिया जिन महान बेईमान कारपोरेट घरानों, उनके महाबलशाली लुच्चे प्रतिनिधि नेताओं के जरिए संचालित होती है उनका असली दर्शन तो हर बेईमानी व भ्रष्टाचार के जरिए मुनाफा और माल कमाना है. ये लोग लोकतंत्र, सिस्टम व व्यवस्था को जनविरोधी बना देते हैं. ऐसे सड़े हालात में कुछ एक जनपक्षधर लोग कितना झेलते हैं, इसका तीखा प्रदर्शन फिल्म सिंघम में है :