डीजीपी के बयान के बाद आर्थिक भ्रष्‍टाचार में लिप्‍त कारपोरेट मीडिया मालिकों की नींद उड़ी

मुंगेर। बिहार के पुलिस महानिदेशक अभयानंद के मुंगेर मुख्यालय पर 12 अक्‍टूबर को राज्य के आर्थिक अपराधियों के विरुद्ध एक पखवाड़ा में बड़ी मुहिम शुरू करने की घोषणा से पूरे राज्य के बड़े-बड़े मीडिया कारपोरेट सेक्टर के मालिकों और भ्रष्ट सरकारी पदाधिकारियों की गठजोड़ की नींद मानो उड़ सी गई है। इस बयान के बाद से अरबों-खरबों रुपये के सरकारी विज्ञापन प्रकाशन घोटाला में शामिल बिहार के प्रतिष्ठित अखबार दैनिक हिन्दुस्तान के मालिक और घोटाला में संलग्न सूचना एवं जनसम्पर्क निदेशालय के वरिष्ठ अधिकारी परेशान हैं।

विज्ञापन के लिए भीख मांगने को मजबूर हैं पत्रकार

मुंगेर। भारतीय प्रजांतत्र के लिए यह खबर अच्‍छी नहीं है। अब बिहार के प्रायः सभी जिलों में पत्रकारिता का काम और मानक पूरी तरह बदल गया है। दशहरा जैसे पर्व के मौके पर अपने पारिश्रमिक से वंचित राज्य भर के प्रमंडल, जिला, अनुमंडल और प्रखंड स्तर के संवाददाताओं और छायाकारों को अखबारों के प्रबंधकों ने दशहरा पर्व पर समाचार-प्रेषण का काम धीमा कर विज्ञापन जुटाने का काम तत्परतापूर्वक करने का फरमान जारी कर दिया है।

हिंदुस्‍तान के विज्ञापन फर्जीवाड़ा की जांच रिपोर्ट सूचना निदेशालय के लिए गले की हड्डी बनी

मुंगेर। बिना रजिस्‍ट्रेशन के स्वतंत्र प्रकाशन घोषित कर नाजायज और अनियमित ढंग से वित्तीय वर्ष 2002-03 और 2003-04 में एक करोड़ 32 हजार 272 रुपए और 16 पैसे के दैनिक हिन्दुस्तान को भगुतान करने के मामले में वित्त (अंकेक्षण) दल ने ज्यों ही रिपोर्ट सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग को सुपुर्द की, पटना स्थित सूचना एवं जनसम्पर्क निदेशालय में मानो ‘‘तूफान’’ आ गया।

बिहार में गलत तरीके से हिंदुस्‍तान एवं एचटी ने सरकार से वसूले थे 23 लाख से ज्‍यादा की रकम

: सरकार ने की थी वसूली की कार्रवाई, पर दर्ज नहीं कराया कोई मामला : न्यायाधीश, मंत्री, सांसद, आईएएस और आईपीएस पदाधिकारियों के भ्रष्टाचार में शामिल होने और जेल जाने की खबरें आए दिन अखबारों में छपती रहती है। परन्तु अखबार भी भ्रष्टाचार में लिप्त रहता है, यह सुनना पाठकों को अटपटा सा लगेगा। पर यह सच्चाई है। सरकार की जांच एजेंसियां मामलों को सामने लाती हैं, परन्तु सरकार शक्तिशाली अखबार मालिकों के विरुद्ध केवल राशि-वसूली की काररवाई कर संतोष कर लेती है।

उड़ने से पहले कटे पंख : नौ वर्ष बाद भी पहेली है प्रेस छायाकार सीमा की आत्‍महत्‍या

मुंगेर। भड़ास4मीडिया डाट काम के आगमन के पूर्व तक देश में अखबारों से जुड़ी कई सनसनीखेज और लोमहर्षक घटनाएं घटती रहीं और घटनाएं समय के अन्तराल में बिना हलचल पैदा किए दफन हो गईं। परन्तु कुछ घटनाएं कई ऐसे प्रश्न छोड़ गईं जिसका उत्तर समय मांग रहा है। ऐसी ही सनसनीखेज और दुखःद घटना दैनिक हिन्दुस्तान के मुंगेर कार्यालय से जुड़ी है।

न्‍यायालय के आदेश के बावजूद प्रेस पंजीयक नहीं कर रहा हिंदुस्‍तान मामले की जांच

मुंगेर। भारत सरकार के प्रेस पंजीयक कार्यालय, नई दिल्ली ने न्यायालय के आदेशों का सम्मान करना पूरी तरह छोड़ ही दिया है। केन्द्रीय सूचना आयोग के केस नं0 – सीआईसी/ओके/सी/2008/657/एडी में 10 दिसंबर, 2008 को पारित आदेश को भी प्रेस पंजीयक कार्यालय, नई दिल्ली ने दो वर्ष सात माह के अधिक समय से कूड़ादान में डाल रखा है। प्रेस पंजीयक के हाथ न्यायालय के आदेश के पालन में कांप रहे हैं क्योंकि जांच की कार्रवाई देश के शक्तिशाली मीडिया हाउस मेसर्स एचटी मीडिया लिमिटेड के दैनिक हिन्दुस्तान के अवैध प्रकाशन और अरबों रुपयों के सरकारी राजस्व के घपले से जुड़ा है।

सीएम के हस्‍तक्षेप के बाद पत्रकार को फंसाने की साजिश नाकाम

: हिंदुस्‍तान के भ्रष्‍टाचार से लड़ना पड़ा महंगा : भ्रष्टाचार के विरुद्ध जंग का एलान करने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भ्रष्टाचारियों से लड़ने वाले पत्रकारों की रक्षा किस प्रकार करते हैं, मुंगेर के वरीय पत्रकार श्रीकृष्ण प्रसाद के साथ घटित घटना के दस्तावेज स्वतः खुलासा करते हैं। पुलिस दस्तावेज यह भी उजागर करता है कि बिहार में भ्रष्टाचार की जड़ काफी मजबूत हो चुकी है और इस जड़ को काटने का प्रयास करने वाले लोगों को अपनी जान भी गंवानी पड़ सकती है।