एडिटर को आदेश- बिजनेस हेड को रिपोर्ट करें!

सोचिए, संपादक किसे रिपोर्ट करता होगा? आप कहेंगे- प्रधान संपादक को, सीईओ को, मैनेजिंग एडिटर को, मैनेजिंग डायरेक्टर को, चेयरमैन को या इनमें से किसी को भी। और, आपका कहना ठीक भी है। ऐसा अपने मीडिया में चलता है। लेकिन संपादक अपने बिजनेस हेड को रिपोर्ट करे, यह थोड़ी अजीब बात है। है न! कहां संपादक और कहां बिजनेस हेड। दोनों के अलग-अलग काम। दोनों के अलग-अलग विधान। दोनों के अलग-अलग तेवर। दोनों के अलग-अलग कलेवर। दोनों के अलग-अलग अंदाज। दोनों के अलग-अलग सरोकार। लेकिन इस बाजारवादी व्यवस्था में शेर और बकरी, दोनों एक साथ एक घाट पर पानी पीने लगे हैं। इस मार्केट इकोनामी में शेर सियार को रिपोर्ट करता दिख सकता है तो कहीं सियार हाथी का शिकार करते हुए मिल सकता है। वजह, तीन तिकड़म से माल कमाकर मालामाल करने वाला बंदा सबसे बड़ा अधिकारी मान लिया गया है। अन्य उद्योगों की तरह मीडिया में भी सबका माई-बाप रेवेन्यू हो गया है। यही वजह है कि विचार-समाचार से लेकर अचार बेचने वाले तक, सभी आजकल सुबह-शाम राग ‘सबसे बड़ा रुपैय्या भैया’ गाते हुए मिल जाएंगे। सबके सब रेवेन्यू की छतरी तले आने लगे हैं। रेवेन्यू की ‘जय गान’ कर नंबर बढ़ाने लगे हैं। कुछ लोग देर से ना-नुकुर के बाद शरमाते-सकुचाते रेवेन्यू की छतरी तले आ रहे हैं तो कुछ दौड़ते, जीभ लपलपाते भागे चले आ रहे हैं। इतनी सब कथा-कहानी के बाद अब आते हैं मूल खबर पर।