जो बाजार के आलोचक हैं, उन्हें कोई संपादक नहीं बनाना चाहता

विमल कुमार

: इंटरव्यू : कवि और पत्रकार विमल कुमार : एसपी ने कम विवेकवान और भक्त शिष्यों की फौज खड़ी की, जिनमें से कई आज चैनल हेड हैं : मैं तब यह नहीं जानता था कि मीडिया का इतना पतन हो जाएगा और वह भी सत्ता-विमर्श का एक हिस्सा बन जाएगा : उर्मिलेश और नीलाभ मिश्र, दोनों मुझसे आज भी योग्य हैं : अज्ञेय जी ने शब्दों की गरिमा को, रघुवीर सहाय ने जनता की संवेदना को और राजेंद्र माथुर ने संपादक पद की गरिमा को बचाए रखा :