दिव्या का जाना ‘जी न्यूज़’ के लिए बेहतर है. उन्हें तो पहले ही चला जाना चाहिए था. कुछ भी हो, मालिकों का ये फैसला जरूर रंग लाएगा. संपादकीय में कुछ और लोगों को भी चले जाना चाहिए. तभी का भला हो पाएगा. जी न्यूज को राजनीति का अखाड़ा कहा जाता है. यहां एक पूरा ग्रुप है दिव्या वर्मा का.
जैसा कि आपने कहा है, उनकी मर्जी के बगैर कुछ नहीं हो सकता था. जी सबसे पुराना चैनल है. बावजूद उसे लोग सीरियसली नहीं लेते. और ना ही वो नंबर वन पर जा सका. इस सबके पीछे बड़ी वहज जी में गुटबाजी. अब वक्त आ गया है कि संपादकीय में कुछ बड़े उलटफेर किए जाएं और चैनल को सही ढंग से चलाया जाए.
–मैक मोहन सिंह











