इस सड़ी व्यवस्था को चाहिए ढाई किलो का घूंसा

एक फिल्म में सनी दियोल का डायलॉग खूब चला था 'तारीख पर तारीख'… यह संवाद देश के लोगों ने इसलिए पसंद किया था क्योंकि यह संवाद आम भारतीयों के जीवन का हिस्सा बन गया है। देश की न्याय व्यवस्था बस 'तारीख पर तारीख' है। ऐसी व्यवस्था पर सनी दियोल का ढाई किलो का घूंसा भी अच्छा लगेगा, क्योंकि हम सब देश की सडिय़ल व्यवस्था से आक्रांत हैं और इस सडिय़ल व्यवस्था पर घूंसा चलाने की हमारी औकात नहीं है। आप देखिए न, दिल्ली की सड़कों पर चलती हुई बस में वीभत्स तरीके से किसी लड़की के साथ दुराचार किया जाता रहा और हम इस व्यवस्था का एक बाल भी बांका नहीं कर पाए। एक सिपाही मारा गया तो इतना हल्ला मचा। जबकि सिपाही अपनी शारीरिक वजहों से मारा गया, लेकिन इस पर मचाया गया बावेला देश का मौलिक चरित्र है।

यह नहीं होता तो दुनिया को कैसे पता चलता कि एक युवती के साथ हुए बलात्कार की लोमहर्षक घटना पर साबित हुए सत्ताई नाकारेपन को लेकर भारतवर्ष में किस तरह झूठ बोला जाता है और उसे परोसा जाता है। इस झूठ को परोसने के लिए कैसे-कैसे आडम्बरी चेहरे आ रहे हैं सामने, वह देख रहे हैं न। अब पीडि़त छात्रा को सरकार ने आनन-फानन एयर एम्बुलेंस के जरिए सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल भेज दिया। आप किसी भ्रम में न रहें, यह युवती के इलाज के लिए नहीं बल्कि यह सब आंदोलन का इलाज करने के लिए है। घटना को लेकर देशभर में व्याप्त जन-आक्रोश का इलाज करने के लिए है। जब झूठ और भ्रष्टाचार की बुनियाद पर टिकी केंद्र की सरकार सिपाही की हत्या का कुचक्र फैलाने में कामयाब नहीं हो पाई और तथाकथित हत्याकांड प्रामाणिक तौर पर टांय-टांय-फिस्स हो गया तो फौरन युवती को सिंगापुर भेजने की जरूरत याद आ गई। सरकार नई-नई पेशबंदियां कर रही है, देशवासियों को इसके बारे में सतर्क रहने की जरूरत है।

युवती को सिंगापुर के लिए बड़े ही गोपनीय तरीके से रवाना करने के बाद सफदरजंग अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक बीडी अथानी जिस तरह युवती के स्वास्थ्य की अद्यतन जानकारियां दे रहे थे, उसे आप गौर से देखते सुनते और गुनते तो आप इसे कल रात ही युवती की मौत के बुलेटिन के रूप में देख लेते। ईश्वर करे, युवती सिंगापुर से सही-सलामत लौटे और इस लोमहर्षक आपराधिक वारदात का कानूनी अध्याय आगे बढ़ सके। लेकिन हृदय विदारक घटना के बाद जिस तरह सरकार अपना आचरण दिखा रही है, उससे पूरी दुनिया को यह भ्रम हो गया है कि केंद्र की सरकार बलात्कारियों के साथ है या भुक्तभोगी के साथ? जो घटना प्रामाणिक है, उसकी जांच और प्रति-जांच की जरूरत ही क्या है? यह कोई राजनीतिक मसला था कि जांच की जांच के लिए जांच आयोग का गठन किया जा रहा है। सरकार समझती है कि वह देश के लोगों को झांसा पट्टी दे रही है, जबकि सरकार अपनी असलियत का पर्दाफाश करा रही है। अगर देश की जनता को जरा भी शर्म होगी तो समय आने पर ऐसी सरकारों, ऐसे नेताओं और ऐसी पार्टियों का हिसाब-किताब चुकता कर लेगी।

अपराध पर परदा डालने और न्याय की मांग करने वाले लोगों के खिलाफ आपराधिक कुचक्र में सरकार के शामिल रहने का उदाहरण भारतवर्ष में ही मिल सकता है। इस घटना के बाद तो सड़कों पर यह चर्चा आप सुन लेंगे कि अगर अमेरिका में ऐसी घटना होती और नाराज नागरिक व्हाइट हाउस घेर लेते तो अमेरिकी राष्ट्रपति क्या करते! अमेरिकी राष्ट्रपति बाहर आते, नाराज लोगों से बातें करते, उनके साथ शोक में शरीक होते, आंसुओं से रोते और अपनी प्रशासनिक नाकामियों को कबूल करते हुए अमेरिकी जनता से माफी मांगते। लेकिन यह भारतवर्ष में नहीं हो सकता, क्योंकि ऐसा करने के लिए राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्री या नेता का नैतिक रूप से मजबूत होना सबसे अधिक जरूरी है। नैतिकता से हीन लोगों की जमात भारतीय लोकतंत्र की अलमबरदार है, तो उनसे आप नैतिक और साहसिक कदम की अपेक्षा करने की बेवकूफी कैसे कर सकते हैं! हमारे नेता इतने छद्मी और आडम्बरी हैं कि उन्हें जनता के बीच आना सम्मान के खिलाफ लगता है।

दरअसल, भारतवर्ष का नेता हीनभावना का शिकार है, वह कुएं का मेढ़क है और कुएं को ही अपना संसार मानता है। उसी कुएं में गंदगी फैलाता है, उसी गंदगी को खाता है और उसी में अन्य मेढ़कों के साथ सियासत करता है। बाहर झांके तब तो उसे पता चले कि व्यक्तित्वों का कैसा आभामंडल है! यूपी की छात्रा के साथ दिल्ली में जघन्य अपराध करने वाले लोग जिस चरित्र और स्तर के हैं, ऐसे ही लोग अधिकांशत: जब संसद में भी हों तो कैसा व्यक्तित्व और कैसा चरित्र। यह बातें सामान्य नाराजगी में नहीं कही या लिखी जा रही हैं, यह बातें अब दस्तावेजी प्रमाण की तरह हैं। वैसे, नेताओं का व्यवहार अपने आप ही ऐसी दुश्चरित्रता का प्रमाण दे देता है। राजपथ और जनपथ पर प्रदर्शन कर रही महिलाओं पर जब लाठियां बरस रही थीं, तब यही प्रमाण तो देशवासियों के जेहन पर मुहर लगा रहा था…

वरिष्‍ठ पत्रकार प्रभात रंजन दीन के फेसबुक वॉल से साभार.

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