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काटजू कांग्रेस को खुश करने के लिए बयान दिया करते हैं?

नई दिल्ली। प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मार्कंडेय काटजू की नरेंद्र मोदी के खिलाफ टिप्पणी को लेकर बीजेपी पहले ही भड़की हुई थी, लेकिन जैसे ही काटजू के बचाव में कांग्रेस सामने आई, बीजेपी का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। बीजेपी संसद के बजट सत्र में इस मुद्दे को जोरशोर से उठाने की तैयारी में है। मार्कंडेय काटजू के साथ कांग्रेस इसे अभिव्यक्ति की आजादी से जुड़ा हुआ मामला बता रही है, लेकिन बीजेपी सुनने को तैयार नहीं है। पार्टी ने उनपर इस्तीफे का दबाव भी बढ़ा दिया है तो क्या सियासी टिप्पणी करने वाले मार्कंडेय काटजू अपने पद से इस्तीफा देंगे?

नई दिल्ली। प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मार्कंडेय काटजू की नरेंद्र मोदी के खिलाफ टिप्पणी को लेकर बीजेपी पहले ही भड़की हुई थी, लेकिन जैसे ही काटजू के बचाव में कांग्रेस सामने आई, बीजेपी का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। बीजेपी संसद के बजट सत्र में इस मुद्दे को जोरशोर से उठाने की तैयारी में है। मार्कंडेय काटजू के साथ कांग्रेस इसे अभिव्यक्ति की आजादी से जुड़ा हुआ मामला बता रही है, लेकिन बीजेपी सुनने को तैयार नहीं है। पार्टी ने उनपर इस्तीफे का दबाव भी बढ़ा दिया है तो क्या सियासी टिप्पणी करने वाले मार्कंडेय काटजू अपने पद से इस्तीफा देंगे?

नरेंद्र मोदी के खिलाफ मार्कंडेय काटजू की टिप्पणी से आगबबूला बीजेपी इस मुद्दे को गुरुवार से शुरु होने वाले बजट सत्र में उठा सकती है। लालकृष्ण आडवाणी के घर मंगलवार को हुई कार्यकारी समिति की बैठक में पार्टी ने रणनीति तैयार कर ली है। बीजेपी की मांग है कि या तो मार्कंडेय काटजू प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दें या फिर सरकार उन्हें पद से हटाए। बीजेपी प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद के मुताबिक जिस तरह काटजू कांग्रेस के हाथों में खेल रहे हैं। जुडिशियल पोस्ट पर बैठा आदमी जो पीसीआई का चेयरमैन है। क्या वो राजनीति कर सकता है? अगर काटजू को राजनीति करनी है तो या तो वो इस्तीफ़ा दें या उन्हें हटाया जाए।

वहीं मार्कंडेय काटजू का दावा है कि उन्होंने अंग्रेजी अखबार में मोदी के खिलाफ अपील एक आम आदमी की हैसियत से की थी। वो एजेंडा में स्वीकार कर चुके हैं कि अखबार में छपे लेख के साथ उनके नाम के आगे प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन पद का जिक्र नहीं होना चाहिए था। सवाल ये है क्या काटजू ने अपनी सीमाओं का अतिक्रमण किया? काटजू के बचाव में खड़ी कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी बेवजह मामले को तूल दे रही है। काटजू ने जो कुछ लिखा वो अभिव्यक्ति की आजादी के दायरे में रहकर लिखा है।

वैसे जस्टिस काटजू पहले भी विवादित बयानों के लिए चर्चा में रहे हैं। वो देश की 90 फीसदी आबादी को बेवकूफ करार दे चुके हैं। मीडिया में अखिलेश सरकार की आलोचना को उन्होंने गलत ठहराया और ममता बनर्जी के कामकाज पर उन्होंने अजीबगरीब टिप्पणी की। सुप्रीम कोर्ट के जज के पद से रिटायर होने के 15 दिनों के अंदर काटजू प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन बन गए थे। अब बीजेपी यही सवाल उठा रही है कि गैर कांग्रेसी सरकारों के खिलाफ काटजू क्या कांग्रेस को खुश करने के लिए बयान दिया करते हैं? (आईबीएन)

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