कुंभ मेला में छोटी नदियां बचाने का जुनून

इलाहाबाद। प्रयाग महाकुंभ मेला के समापन काल में विश्व भर के जाने माने चित्रकारों का सम्मेलन सेक्टर छह में शुरू किया गया है। 27 फरवरी को मुम्बई के विख्यात फिल्मकार पंकज मिस्त्री भी पहुंच गए हैं। उन्होंने कुंभ मेला को अपने कैमरे में कैद किया। खासकर गंगा के हाल, तम्बुओं के छोड़े अवशेष, कलश और हवनकुण्डों पर उनकी नजर पडी़।

छोटी नदियां बचाओ अभियान के शिविर में पहले से जुटे मिस्र, नेपाल, भूटान और तिब्बत आदि देशों के अतिरिक्त देश के विभिन्न हिस्से से आए चित्रकारों ने चित्र प्रदर्शनी शुरू किया है। इसमें वसुधैव कुटुम्बकम से जुड़े कलाकारों ने गंगा, यमुना और दूसरी नदियों समेत कुंभ के घटनाक्रमों को सहेजने लायक कई कलाकृतियों की रचना भी की है। उन्होंने 100 से ज्यादा कलश और कपड़ों से बने झोले भी अपनी कला कृतियों के माध्यम से सजाए।

वसुधैव कुटुम्बकम के निदेशक ए.के. डगलस ने शंकराचार्य अधोक्षजानंददेव तीर्थ को पूरी प्रदर्शनी का अवलोकन कराया। प्रसाद के रूप में कपड़े के झोले भी वितरित किए गए। जल बचाओ, जीवन बचाओ और शांति का संदेश देती एक दर्जन से ज्यादा कलाकृतियां प्रस्तुत की गई हैं। ये सब हवनकुंडों की भभूत, गाय के गोबर और संगम में बिक रहे हैं। ये कलाकृतियां विश्व शांति और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती हैं। इस अवसर पर शंकराचार्य ने कहा कि ऐसी कलाकृतियां देवालयों और शिक्षालयों में पहुंचनी चाहिए। उन्होंने कहा कि होली के दौरान वृन्दावन में इन कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी।

28 फरवरी को इलाबाद इंटर कॉलेज के विद्यार्थी और शिक्षक सेक्टर छह स्थित छोटी नदियां बचाओ कैम्प में पहुंचेंगे। कैम्प में स्थानीय विद्यार्थी और शिक्षक विश्व शांति के इस अभियान से जुड़ेंगे। कार्यक्रम में स्थानीय संसाधनों द्वारा मौके पर ही बनाई कलाकृतियों के जरिये संदेश दिया जा रहा है। इसके लिए राष्‍ट्रीय और अंतराष्‍ट्रीय कलाकार और फिल्ममेकर अपनी पूरी टीम समेत मौजूद हैं। नदियों के संरक्षण के इस अभियान को कथावाचक श्री देवकीनंदन ठाकुर का समर्थन भी हासिल हुआ है। कैम्प में देर शाम गंगा और शिव की पूजा के साथ परफार्मिंग आर्ट का कार्य शुरु हो गया है। इस टीम में मशहूर फिल्ममेकर पंकज मिस्त्री, चित्रकार श्रीधर अयर, ए.के. डगलस, भेपाल से आनंद प्रकाश, धर्मशाला से सिमरन संधू, त्रिपुरा से बबली दास, पटना से मुकेश कुमार यादव, दिल्ली से विलास कुलकर्णी और रवि रंजन, नेपाल से श्यामसुंदर यादव, राम, समुंद्र और ज्योति जैसे प्रमुख चित्रकारों के साथ इजिप्ट से हयाम और हासिम ने भी हिस्सा लिया। नील नदी के आंदोलन में शामिल रहे हयाम और हासिम अब ससुर खदेरी नदी के अंत से उद्गम तक के हालात का जायजा लेंगे।

छोटी नदियां बचाओ अभियान की संयोजक मोनिका आर्या ने बताया कि चित्रकारों और कला विशेशज्ञों का दल गंगा और यमुना की सहायक नदी ससुर खदेरी की असली तस्वीर समाज के सामने पेश करेंगे। इसके लिए दो दिन तक एक दल नदी किनारे भ्रमण करेगा। नदियों के लिए कार्य करने वाले कौशल किशोर, पीएन द्विवेदी, राघवेन्द्र प्रताप सिंह, राकेश मिश्र, राजेश तिवारी, केनिथ जॉन, एसएस पांडे और अजय मिश्र जैसे विशेशज्ञों का दल ससुर खदेरी के भौगोलिक हालात का जायजा भी लेंगे। इस काम के लिए स्वामी विज्ञानानंद नदी के उद्गम से अंत की ओर एक यात्रा दल लेकर काम शुरु कर चुके हैं। मोनिका आर्या ने बताया कि दो मार्च की शाम को इसी कैम्प में जल संरक्षण को समर्पित एक कवि सम्मेलन का आयोजन भी किया गया है।

कुंभनगरी से शिवाशंकर पांडेय की रिपोर्ट.

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