क्‍या कोई टीवी रिपोर्टर फेसबुक पर लिखने वालों का औकात तय करेगा?

पंकज झा तेजतर्रार पत्रकार हैं. छत्‍तीसगढ़ में दीपकमल पत्रिका के संपादक हैं. पंकज फेसबुक पर भी काफी सक्रिय रहते हैं. समसामयिक तथा राजनीतिक मुद्दों पर भी खुलकर लिखते-बोलते हैं. फेसबुक पर ही एक कमेंट पर ए‍नडीटीवी के किसी कर्मचारी ने उन्‍हें औकात में रहने की हिदायत दी है. इस मामले पर पंकज लिखते हैं कि एनडीटीवी के कर्मचारी अखिलेश शर्मा को हम सभी जानते हैं. अगर आप मेरे नीचे के पोस्ट पर आयी उनकी टिप्पणी पर गौर करेंगे तो पायेंगे कि अकड़ केवल सुधीर चौधरी में ही नहीं थी. कैमरा हाथ में आ जाने के बाद किस तरह लोग खुद को खुदा समझने लग जाते हैं उसका उदहारण आपको नीचे के पोस्ट में मिलेगा. ''तुमसे पहले जो शख्स यहां गद्दीनशी था, उसे भी अपने खुदा होने पे इतना ही यकीं था.''  पंकज झा का कहना है कि अब पाठक ही यह तय करें कि क्या कोई टीवी रिपोर्टर भी अब फेसबुक पर लिखने वालों का औकात तय करेगा?

Pankaj Jha : दो घोटाला आपस में गड्ड-मड्ड हो गए हैं. दोनों के सरगनाओं की गिरफ्तारी होनी चाहिए. कोलगेट के लिए मनमोहन सिंह की और न्युजगेट के लिए सुभाष चन्द्रा की.

विकास भारतीय : यह कारपोरेट, सरकार और मीडिया का कॉकटेल है, जिसमें जनता का भरपूर खून मिला है और जिसे पीने पर खूब नशा भी आता है। यह इस नशे का ही असर है कि ये तीनों मिलकर लोकतंत्र को बेसुध किए हैं। जी न्‍यूज के संपादक सुधीर चौधरी और समीर अहलुवालिया जैसे लोगों का नशा जेल से निकलने के बाद भी हिरण नहीं होगा…और क्‍यों हो बर्खा दत्‍त, वीर सांघवी, प्रभू चावला, प्रणव राय, राजदीप सरदेसाई…का भरापूरा उदाहरण इनके सामने है। ये तो केवल 100 करोड की दलाली कर रहे थे, वो भी शायद मालिक या प्रबंधन के कहने पर..यहां उपरोक्‍त महानुभावों ने तो सरकार को बचाने और मंत्री बनवाने जैसी दलाली की, एनडीटीवी और हिंदुस्‍तान टाइम्‍स ने कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स में अपना वारा-न्‍यारा किया, भास्‍कर जैसे संस्‍थान ने खुद कोयला ब्‍लॉक हासिल किया… ये खेल तो और चलेगा और तब तक चलेगा जब तक इस देश के 'आम आदमी' के रगों में खून का आखिरी कतरा बचा है…आखिर 'लाल रंग' का नशा ऐसे ही तो नहीं उतरता है न!

Akhilesh Sharma : और उस बीजेपी से सवाल पूछो जिसने पिछला सत्र नहीं चलने दिया मनमोहन सिंह के इस्तीफ़े की मांग पर। अब क्या साँप सूंघ गया? कहाँ गई वो मांग? अब तो मुद्दा बदल गया क्योंकि गडकरी का सवाल आएगा तो कहाँ जाएँगे?

Akhilesh Sharma : पीएम की गिरफ़्तारी की मांग करते हो। तुम्हारी हैसियत है ये सवाल करने की। वो भारत के प्रधानमंत्री हैं कम से कम उस पद की गरिमा का ख्याल रखो।

Pankaj Jha : ये लोकतंत्र है अखिलेश. आपका पहला कमेन्ट ज़रूर गौर करने लायक था लेकिन दूसरी टिप्पणी कहीं से यह नहीं लग रहा है कि आप की हो. यहां हैसियत देख कर सच और झूठ का फैसला नहीं किया जाता. हम सब जानते हैं कि कोयला आवंटन में 1 लाख 86 हज़ार करोड़ के नुकसान का आकलन है और उस समय कोयला विभाग मनमोहन सिंह के अधीन था. सो उस अपराध में हम भारत के लोग अपने सेवक मनोमहन सिंह को बर्खास्त करने का प्रस्ताव करते हैं. यह मेरी हैसियत के अंदर की बात है. आश्चर्य लग रहा है आप के जैसा प्रबुद्ध पत्रकार इसमें हैसियत का सवाल कहां देखने लगा. भारत के नागरिक होने के नाते हम हज़ार बार यह कहना चाहेंगे कि पीएम इस्तीफा दें और उन्हें गिरफ्तार किया जाय.

Akhilesh Sharma : चमड़े की ज़बान है। हिलाओ क्या फ़र्क पड़ता है। लोक तंत्र को नाम पर ये बकवास भी सुनी। प्रधानमंत्री को गिरफ़्तार करने की मांग? कौन सी दुनिया में रहते हो?

Akhilesh Sharma : और मैं कोई प्रबुद्ध पत्रकार नहीं हूँ।

डॉ.सौरभ मालवीय : अखिलेश जी आज कल सिटीजन जनरलिस्ट का भी समय है, आप की नाराजगी आश्चर्य? लोकतन्त्र है

Pankaj Jha : आप दुबारा पोस्ट पढ़िए. मनमोहन सिंह के गिरफ्तारी की मांग है, प्रधानमंत्री की नहीं. ज़ाहिर है पद की गरिमा का ख़याल कर के ही नाम से लिखा है.

Pankaj Jha : यानी इस्तीफा होगा उनका या वे हारेंगे और फिर गिरफ्तार होंगे हम उस दिन की बाट जोह रहे हैं अखिलेश..

Pankaj Jha : प्रबुद्ध तो हम लोग चैनल का नाम देख कर समझ लेते हैं. हालांकि यह पैमाना सच में गलत है. अखिलेश.  आपके डिस्क्लेमर (कि आप प्रबुद्ध नहीं हैं) के बाद यह साबित हो गया.

डॉ.सौरभ मालवीय : पंकज जी, मनमोहन सिंह जी कहां से चुनाव जीत कर आए है? फिर हारने की चर्चा होगी कृपया बताए?

Akhilesh Sharma : तो ख़ुश रहो। चैनल का नाम देखो और पत्रकार की औक़ात तय करो। मेरी फ़्रेंड लिस्ट में ग़लती से शामिल हो गए। अब पीएम को गिरफ़्तार कर वापस आना। टाटा

Pankaj Jha : पी एम को नहीं मनमोहन सिंह को. हालांकि ऐसी असहिष्णुता वास्तव में यही साबित करता है कि आज का इलेक्ट्रोनिक मीडिया उसी काबिल है जिसकी चर्चा (सुधीर चौधरी के सन्दर्भ में) आज दिन भर हो रही है. उफ्फ्फ..कौन से देवताई का घमंड है भाई. समझ नहीं आ रहा है अखिलेश.

डा. अनिल पांडेय : बरखा वाला चैनल  NDTV नारायण दत्त तिवारी वीडियोज

डा. अनिल पांडेय : ज़ी न्यूज़ के संपादक सुधीर चौधरी और बिज़नेस हेड समीर आहुलवालिया की आज हुई गिरफ़्तारी का स्वागत किया जाना चाहिए। मीडिया के लिए यह बहुत अच्छा सबक है। यह और ऐसा कुछ बहुत पहले होना चाहिए था। आगे यह सिलसिला जारी रहना चाहिए। भस्मासुर में तब्दील होती जा रही मीडिया और उस के सरोकार जिस तरह हमारे सामने है, यह झटका बहुत पहले मिलना चाहिए था। जिस तरह मीडिया पर प्रबंधन और उस का व्यवसाय हावी होता जा रहा है, संपादक नाम की संस्था अब दलाल, लायजनर, मैनेजर और मालिकों का पिट्ठू बन कर जन-सरोकारों से मुंह मोड़ कर सिर्फ़ और सिर्फ़ व्यवसाय देखने में लग गई है, वह हैरतंगेज़ है। सिर्फ़ और सिर्फ़ मीडिया मालिकों के हित साधने में लगे संपादकों को उन की इस कुत्तागिरी के लिए जितनी सज़ा दी जाए कम है। मीडिया को बचाने के लिए यह बहुत ज़रुरी हो गया है। ऐसे तमाम मालिकों और संपादकों को गिरफ़्तार किया जाना चाहिए जो समाचार और व्यवसाय का फ़र्क भूल कर सिर्फ़ और सिर्फ़ व्यवसाय जानते हैं। मालिकों की तिजोरी भरना जानते हैं। और सांसद और उद्योगपति नवीन ज़िंदल तो कोयला स्कैम में गले तक धंसे पड़े हैं, उन की भी जगह जेल ही है। कानून अगर ठीक से काम करेगा तो ज़िंदल भी एक-न-एक दिन जेल में ज़रुर होंगे। लेकिन दिक्कत यह है कि कानून बड़े अपराधियों के खिलाफ़ काम करते समय सो जाता है और यह बड़े अपराधी बेल ले कर मज़े लेते हैं। अब देखिए न कि फ़ेसबुक पर कमेंट करने वाली लड़कियां कितनी जल्दी गिरफ़्तार हो जाती हैं, पुलिस और जज सभी एक साथ सक्रिय हो जाते हैं। पर बाल ठाकरे जीवन भर कानून हाथ में लिए रहे पर उन का क्या हुआ? उन्हें तिरंगे में लपेट कर विदा किया गया। यह देश और देश के स्वाभिमान पर एक गंभीर तमाचा है। जूता है देश-प्रेमियों के मुंह पर। पर मीडिया इस पर खामोश है।!!!!!!..

(हर बार की तरह ही विचार पूरी तरह से निजी नही चोरी की है…!!)

Gopal Samanta : Media -medium of entertainment through dramatic and idiotic acts….

Vinay Pandey : Ye Akhilesh ji garam kahe ho gaye ? Bhai democracy men to sabase bada haisiyatdaar janta hai. PM to hamara naukar hai ji. sewak. usaki kya haisiyat hai. agar aap loktantr ki baat karate hain to. par ek aadami ka naam aapane kyun chhod diya NAVIN JINADAL ka naam ?

Thakur Gautam Katyayn : अखिलेश जी आप तो उम्र में मुझसे बड़े हैं, फिर भी आपको मुफ्त में सलाह देना चाहूँगा, "आप दांत के बदले जीभ बनना सीखिए अन्यथा सामाजिक जीवन से संन्यास ले लीजिए, अन्यथा बहुत बड़ा दुर्घटना होने वाला है आपके जीवन में और फिर पछताने से कुछ नहीं होगा और आप भी नीरा राडिया और बरखा दत्त की श्रेणी में आकर धन से तो मजबूत होंगे लेकिन जन से नहीं, आप जैसे 'महात्मा पत्रकार' की क्या औकात होती है यह सबों को पता है…

Ashish Kumar 'Anshu' : Akhilesh Sharma: lagta hai aaPka gussa kaheen aur hai, nikal kaheen aur raha hai? kyonki aaPaki bhasha natural naheen lag rahee hai…

Manish Chandra Mishra : मेरे पास पक्की जानकारी है। अखिलेश जी एनडीटीवी के लिए विजज्ञापन नहीं ला पाये और अब उनके नौकरी पे बन आई है। बोले तो पूरे के पूरे फ्रस्ट्रेसन में चल रहा है उनका मामला। ;);)

Sushil Shukla : भटगांव एक्स्टेंशन 1,2, के लिए किसकी? पूर्ति के लिए किसकी? मदनपुर नार्थ के लिए किसकी? गिरफ्तारी होनी चाहिए ….

Pankaj Jha : सबकी गिरफ्तारी होनी चाहिए  Sushil Shukla जी. सहमत हूं आपसे. लेकिन शुरुआत सरगना से होना चाहिए. अन्याय यहीं पे हो जाता है कि सरगना तो बच जाता है और छोटे-छोटे चोरों के चक्कर में हम पड़े रहते हैं. बिना लाग-लपेट के दो टुक बात यह बार-बार कहना है कि कोल आवंटन के समय यह विभाग मनमोहन सिंह के पास था, पहले उनका इस्तीफा हो. वे गिरफ्तार हों. फिर चाहे जितने को और जिसको सूली पे चढाना ज़रूरी हो चढ़ाते रहिये.

Shravan Kumar Shukla : NDTV Congres ke mukhpatra ki tarah hai.. jo sari dunia janti hai.. SARKARI chamchai karke Seat Hathiyane me inka koi jod nahi

Ravindra Nath : कैसे कैसे बदतमीज लोग भरे पड़े हैं, सच में आश्चर्य होता है. अभी कुछ दिन पहले ही, एक सज्जन मेरे तर्कों को काट नहीं पाए तो उसे कुतर्क करार दे दिया, और मैंने ज़रा उनके प्राण प्रिय देवता परम आदरणीय (उनके लिए) के लिए खुजलीवाला लिख दिया तो ऐसे बिदक गए जैसे किसी ने काट खाया हो, ऐसे लोग किसी काम के नहीं होते सिवाय चमचागिरी के.

Sushil Jhunjhunwala : जिंदल ने मुफ्त कोल ब्लाक लिये लेकिन बिजली खुले बाजार में बेची। पी एम ओ के कितने लोग देशको चूना लगाने के इल्जाम का शिकार हुए। केजड़ी आया तो क्यू लग जायेगी तिहाड़ जाने की।

पंकज झा के फेसबुक वॉल से साभार.   

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